पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वाार अनुसूचित जाति का अपमान किए जाने से जुड़ा विवाद सामने आया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने रविवार (26 अप्रैल 2026) को ममता बनर्जी के एक वायरल वीडियो क्लिप पर स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने मामले में बंगाल राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी किया है।
दरअसल, ममता बनर्जी द्वारा अनुसूचित जाति समुदाय के लिए अपमानजनक शब्द च*** का इस्तेमाल किया गया। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य में दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल 2026 को होना है जिससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।
चुनावी रैली में बयान पर विवाद
आयोग के अनुसार, गुरुवार (23 अप्रैल 2026) को कोलकाता के चौरंगी क्षेत्र में एक चुनावी रैली के दौरान ममता बनर्जी ने अपनी सरकार के कामकाज का जिक्र करते हुए जनबाजार इलाके के संदर्भ में एक ऐसा शब्द इस्तेमाल किया, जिसे अनुसूचित जाति समुदाय के प्रति अपमानजनक माना जाता है।
NCSC ने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि इस तरह की टिप्पणी ना केवल आपत्तिजनक है बल्कि कानूनन दंडनीय भी हो सकती है। आयोग ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की भाषा का प्रयोग अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(s) के तहत अपराध की श्रेणी में आता है।
National Commission for Scheduled Castes (NCSC) has taken suo motu cognizance of the alleged derogatory use of the word “Chamar” by Mamata Banerjee against the Scheduled Caste community during an election rally at Chowringhee on 23 April 2026. https://t.co/yEWLBKNoeN
— National Commission for Scheduled Castes (@NCSC_GoI) April 26, 2026
आयोग ने यह भी कहा कि किसी भी सार्वजनिक मंच से जातिसूचक अपमान समाज में विभाजन पैदा करता है और इससे संवैधानिक मूल्यों को ठेस पहुँचती है।
आयोग का नोटिस और जाँच के आदेश
मामले को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी किया है। आयोग की निदेशक सोनाली दत्ता द्वारा भेजे गए नोटिस में तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट माँगी गई है।
नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि समय सीमा के भीतर जवाब नहीं दिया गया, तो आयोग संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत प्राप्त सिविल कोर्ट जैसी शक्तियों का इस्तेमाल कर सकता है और संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन जारी कर सकता है।
NCSC के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने कहा कि आयोग किसी भी स्तर पर जाति आधारित अपमान को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए राज्य में अनुसूचित जाति समुदाय के खिलाफ बढ़ती घटनाओं पर भी चिंता जताई है।

