पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में सर्ब नंदी पाड़ा इलाके में बुधवार (7 जनवरी 2026) की सुबह उस वक्त भारी तनाव पैदा हो गया, जब लोकोनाथ मंदिर के सामने स्थित एक मूर्ति कार्यशाला में दर्जनों धार्मिक मूर्तियों को तोड़ दिया गया। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, दो लोगों ने रात के अंधेरे में देवी सरस्वती और माँ काली की मूर्तियों को तोड़ा।
पिछले 30 वर्षों से मूर्तियाँ बनाने का काम कर रहे अनुभवी मूर्तिकार जयंत दास ने बताया कि उनकी बनाई करीब 60 से 70 मूर्तियाँ जमीन पर टूटी हुई पड़ी थीं। उन्होंने कहा कि दशकों से इस इलाके में काम करने के बावजूद उन्होंने ऐसी घटना पहले कभी नहीं देखी। इस घटना से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान के साथ-साथ गहरा मानसिक आघात भी पहुँचा है।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए और दोषियों की गिरफ्तारी की माँग को लेकर नाराजगी जाताई। पुलिस द्वारा आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज की जाँच में अमित दास और उसके भाई असित दास की संलिप्तता सामने आई है। जयंत दास के अनुसार, अमित दास ने घटना से कुछ दिन पहले उनकी कार्यशाला में आकर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी थी।
शांतिपुर पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है और आरोपितों की तलाश में छापेमारी जारी है, हालाँकि खबर लिखे जाने तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी।
Mamata Banerjee is shielding rabid, dangerous fundamentalists in Bengal.
— Pradeep Bhandari(प्रदीप भंडारी)🇮🇳 (@pradip103) January 7, 2026
In a shocking display, Multiple Ma Kali and Ma Saraswati murti were DESECRATED near the Loknath Temple in Shantipur – SYMBOL OF BENGALs DEVOTIONAL & CULTURAL ASMITA.
Few days before, famous singer… pic.twitter.com/3jdY0V4ZJO
इस घटना पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। भाजपा नेता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य में खतरनाक कट्टरपंथियों को संरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने शांतिपुर की घटना को बंगाल की सांस्कृतिक और धार्मिक अस्मिता पर हमला बताया।

