सड़कों पर घूम रहे अनाथ बच्चों को गोद क्यों नहीं लेते: डॉग लवर्स से सुप्रीम कोर्ट का सवाल, आवारा कुत्तों को गोद लेने पर चाहते हैं ‘इंसेंटिव’

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (13 जनवरी 2025) को आवारा कुत्तों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि इस केस में कई वकील कुत्तों के पक्ष में लंबी-लंबी दलीलें दे रहे हैं लेकिन कोई भी इंसानों की बात नहीं कर रहा है। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने यह टिप्पणी उस समय की जब एक वकील ने आवारा कुत्तों को गोद लेने के लिए इंसेंटिव देने का सुझाव दिया।

बार ऐंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता वैभव गग्गर ने अदालत को बताया कि वह एक 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जो दिल्ली की सड़कों पर रहती हैं और करीब 200 कुत्तों की देखभाल करती हैं। गग्गर ने दलील दी कि देश में आवारा कुत्तों को गोद लेने के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनाई जानी चाहिए और इसके तहत इंसेंटिव दिया जाना चाहिए। वकील ने कहा कि यह इंसेंटिव नसबंदी और टीकाकरण जैसी सुविधाओं के रूप में हो सकता है।

इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “क्या आप सच में गंभीर हैं? अभी एक युवा वकील ने हमें सड़कों पर रह रहे अनाथ बच्चों के आँकड़े दिखाए। शायद कुछ वकीलों को उन बच्चों को गोद लेने के लिए भी दलीलें देनी चाहिए। साल 2011 में मेरे जज बनने के बाद से यह मेरी सबसे लंबी सुनवाई है और अब तक किसी ने इंसानों के लिए इतनी लंबी दलील नहीं दी।”

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर आवारा कुत्तों के काटने से किसी की मौत होती है, तो वह संबंधित अधिकारियों पर ‘भारी मुआवजा’ लगाने का आदेश दे सकता है। इसके साथ ही, अदालत ने यह भी संकेत दिया कि कुत्तों को खिलाने वालों की जवाबदेही और जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।