संयुक्त सदस्य-सचिव मुशफिक उस सलीहीन ने कहा कि पत्र में जमात के साथ गठबंधन को पार्टी के मूल सिद्धांतों के खिलाफ बताया गया है। साथ ही, जुलाई 2025 में हुए विद्रोह की मूल भावना के खिलाफ बताया गया। पत्र में यह भी कहा गया कि जमात का विवादास्पद इतिहास रहा है। 1971 के स्वतंत्रता संग्राम में अपराध में इसका हाथ था और इसके छात्र संगठन छत्र शिबीर ने उस वक्त काफी भ्रम फैलाया। इसलिए गठबंधन NCP के मूल मूल्यों और लोकतांत्रिक नैतिकता के खिलाफ हैं।
पार्टी में दरार की वजह
इस दरार के कारण पार्टी के कई नेताओं ने इस्तीफा देना ही उचित समझा। वरिष्ठ संयुक्त सदस्य-सचिव तसनीम जारा ने इस्तीफा देते हुए कहा कि वह अब स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ेंगी। उनके पति और पार्टी के संयुक्त संयोजक खालिद सैफुल्लाह ने भी संगठन छोड़ दिया। इसी तरह, सहसंयोजक तज्नुवा जेबीन ने लिखा कि गठबंधन की रणनीति के कारण उन्होंने इस्तीफा देने का निर्णय लिया।
अधिकारियों ने बताया कि ज्यादातर महिला नेताओं ने जमात या किसी भी धर्म आधारित दल के साथ गठबंधन के खिलाफ स्पष्ट विरोध दर्ज कराया था। ये धरा बीएनपी से गठबंधन के पक्ष में था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, NCP अगले एक-दो दिनों में जमात के साथ सीट बंटवारे का फैसला कर सकता है। जमात के महासचिव मिया गुलाम पारवर ने कहा कि बातचीत जारी है और सीट बंटवारे का मुद्दा जल्द स्पष्ट हो जाएगा।
एलडीपी के अध्यक्ष कोल (सेवानिवृत्त) ओली अहमद और आठ दलों के वरिष्ठ नेता भी इस गठबंधन में शामिल हैं। जमात-नेता शफीकुर रहमान ने प्रेस क्लब में कहा कि 300 निर्वाचन क्षेत्रों के लिए नामांकन सूची लगभग तैयार है और बाकी काम नामांकन दाखिल होने के बाद निष्पक्ष तरीके से पूरा किया जाएगा।

