योगी सरकार की अभ्युदय योजना ने बेटियों को दिए पंख, UPSC में तीन बेटियों ने लहराया परचम: 5 वर्षों में 250 छात्राएँ हुई सफल

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना बेटियों के लिए पंख बनकर उभरी है, जिसके सहारे वे देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा में सफलता का परचम लहरा रही है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में इस योजना का लाभ लेकर प्रदेश की तीन बेटियों ने सफलता हासिल की है।

मानसी की 444वीं रैंक

गाजियाबाद के प्रताप विहार की रहने वाली मानसी ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 444वीं रैंक हासिल की। प्राइवेट जॉब करने वाले पिता समेत परिवार में पाँच सदस्य हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद मानसी ने घर पर ही तैयारी की और अभ्युदय योजन के मार्गदर्शन से सफलता हासिल की।

अदिति सिंह की 859वीं रैंक

झाँसी की अदिति सिंह ने 859वीं रैंक प्राप्त की। इंजानियर पिता और शिक्षिका माँ की बेटी अदिति ने सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन माध्यम से तैयारी की। खास बात यह रही कि वह खुद भी अभ्युदय योजना के तहत अन्य छात्रों को पढ़ाकर उनकी मदद कती रहीं।

तनीषा की 930वीं रैंक

आगरा की तनीषा सिंह ने 930वीं रैंक हासिल की। रेवेन्यू इंस्पेक्टर पिता और गृहिणी माँ के परिवार से आने वाली तनीषा ने घर पर रहकर ऑनलाइन पढ़ाई की और अभ्युदय योजना की मदद से सफलता प्राप्त की।

कीर्तिका सिंह बनी डिप्टी एसपी

इससे पहले साल 2022 में लखनऊ की रहने वाली कीर्तिका सिंह ने उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग की परीक्षा में 58वीं रैंक हासिल कर डिप्टी एसपी के पद पर कार्यरत हुईं। एटा में तैनात कीर्तिका किसान परिवार से हैं। उन्होंने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम से तैयारी की और भ्दुयदय योजना का लाभ उठाया।

अभ्युदय योजना से 250 बेटियाँ बनी अधिकारी

खास बात यह है कि साल 2021 में शुरू हुई मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत अब तक 250 से अधिक बेटियाँ सफलता हासिल कर चुकी हैं और अधिकारी बनकर यूपी को दिशा दिखा रही हैं। यह उपलब्धि न केवल उनकी मेहनत का परिणाम है, बल्कि योगी सरकार की शिक्षा केंद्रित योजनाओं की प्रभावशीलता का भी प्रमाण है। ‘नारी तू नारायणी’ की भावना को साकार करती ये बेटियाँ आज समाज के लिए प्रेरणा बन रहीं हैं।