Saturday, June 15, 2024
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‘ब्राह्मण संपादक’ रूपा झा ने तो माफ कर दिया, पर क्या बिहार के ‘एक्टिविस्ट पत्रकार’ वेद प्रकाश के दिमाग से ‘जाति’ जा पाएगी

बिहार की जमीन पर वीडियो बना-बनाकर अगड़ा-पिछड़ा करने वाले वेद प्रकाश ने एक माफीनामा सोशल मीडिया में पोस्ट किया है। माफी उन्होंने बीबीसी के एक 'ब्राह्मण संपादक' से माँगी है। उसी ब्राह्मण से जिस पर वे अपने वीडियो में मीडिया व अन्य संस्थानों पर कब्जे का आरोप लगाते रहते हैं। जिसे हर समस्या के लिए जिम्मेदार ठहराते हैं।

बिहार में हाल के समय में यूट्यूबर पत्रकारों की एक खेप तैयार हुई है। मनीष कश्यप के मामले के बाद से ये लगातार चर्चा में है। इनमें मनीष कश्यप, रवि भट्ट, निभा सिंह, अभिषेक तिवारी, अभिषेक मिश्रा, सूरज, रवि रंजन जैसे कुछ यूट्यूबर पत्रकार इसलिए चर्चित रहे हैं कि वे ग्राउंड जीरो पर उतरकर व्यवस्था की खामियों को उजागर कर देते हैं। दूसरी ओर वेद प्रकाश (Ved Prakash) जैसे यूट्यूबर हैं जो खुद को पत्रकार से पहले ‘एक्टिविस्ट’ बताते हैं। यहाँ तक कि उनके यूट्यूब चैनल का नाम भी ‘द एक्टिविस्ट (@theActivist)’ ही है। 14 लाख से ज्यादा लोग उनके चैनल को फाॅलो करते हैं। करीब 5000 वीडियो इस यूट्यूब चैनल पर मौजूद हैं।

इनमें से ज्यादातर वीडियो में आप पाएँगे कि ये एक खास राजनीतिक एजेंडे के साथ बनाए गए हैं। यह वही एजेंडा है जिसे दलितों के नाम पर, पिछड़ों के नाम पर, मुस्लिमों के नाम पर राजनीति करने वाले आगे बढ़ाते रहते हैं। वेद प्रकाश यूट्यूबर पत्रकार का चोला ओढ़कर इसे बढ़ाते हैं। वे अपने वीडियो में ‘जय भीम’ कहना नहीं भूलते। अगड़े-पिछड़े की बात करने से नहीं चूकते। यहाँ तक कि छात्रों से यह भी पूछ लेते हैं कि वे सरस्वती की पूजा क्यों करते हैं। कुल मिलाकर वे अपने वीडियो में जातीय पक्ष को उभार देने के लिए वह सब कुछ करते हैं जिसकी सामान्य तौर पर पत्रकारों और पत्रकारिता से अपेक्षा नहीं की जाती है।

बिहार की जमीन पर वीडियो बना-बनाकर अगड़ा-पिछड़ा करने वाले वेद प्रकाश अब एक माफीनामे को लेकर चर्चा में हैं। यह माफीनामा उन्होंने खुद सोशल मीडिया में पोस्ट किया है। माफी उन्होंने बीबीसी के एक ‘ब्राह्मण संपादक’ से माँगी है। उसी ब्राह्मण से जिस पर वे अपने वीडियो में मीडिया व अन्य संस्थानों पर कब्जे का आरोप लगाते रहते हैं। जिसे हर समस्या के लिए जिम्मेदार ठहराते हैं।

दरअसल वेद प्रकाश को यह माफी एक कानूनी मामले में राहत पाने के लिए माँगनी पड़ी है। इस मामले में भी वे दलित बनाम ब्राह्मण एजेंडा को बढ़ाने के कारण ही फँसे थे। वेद प्रकाश ने माफीनामे में लिखा है, “दलित एक्टिविस्ट और जर्नलिस्ट होने के नाते मीना (Meena Kotwal) को न्याय दिलाने के मकसद से मैंने इस संबंध में खबर बनाई और बीबीसी के इंडियन लैंग्वेज हेड रूपा झा को इस बात का जिम्मेदार बताते हुए उन पर एक पोस्ट किया। जिसकी भाषा उचित नहीं थी और मेरे पोस्ट पर कई लोगों ने आपत्तिजनक कमेंट्स कर दिए। इस पूरे मामले में रूपा झा ने दिल्ली के बाराखंबा थाने में मुकदमा दर्ज किया था।”

माफीनामे में वेद प्रकाश ने कहा है कि जाँच के दौरान वे अपने आरोपों के समर्थन में कोई सबूत नहीं पेश कर पाए। हालाँकि इसका जिम्मेदार उन्होंने मीना कोटवाल और उनके पति राजा पांडेय को बताया है। आगे उन्होंने लिखा है, “आज रूपा जी और हमारी आपसी सहमति से केस को खत्म कर दिया गया है। मीना और उसके पति राजा पांडेय द्वारा गलत सूचना दी गई, जिसके आधार पर मैंने पोस्ट किया एवं मेरे पोस्ट और उस पर आने वाली आपत्तिजनक प्रतिक्रिया से रूपा जी की भावनाएँ आहत हुई। इसके लिए मैं क्षमा/खेद और दुख प्रकट करता हूँ।”

वेद प्रकाश ने यह माफीनामा 9 मई 2023 को पोस्ट किया है। पोस्ट के साथ दो तस्वीर भी लगाई है। इसमें से एक में वे मीना तो दूसरे में रूपा झा के साथ दिख रहे हैं। पोस्ट में वेद प्रकाश ने बताया है कि यह केस करीब चार साल से चल रहा था। यह भी दावा किया है कि इस मामले को उठाने और रूपा झा को इसका जिम्मेदार बताने के लिए मीना कोटवाल और उनके पति ने उनसे व्यक्तिगत तौर पर संपर्क किया था। गौर करने वाली बात यह है कि बीबीसी ने उस समय भी मीना की विदाई का कारण उनका जाॅब काॅन्ट्रैक्ट पूरा होना बताया था। लेकिन उस समय ब्राह्मण बनाम दलित का एजेंडा चलाने वालों ने इसे खारिज कर दिया था। अब कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए आश्चर्यजनक तौर पर वेद प्रकाश ने इसे कबूल कर लिया है। इतना ही नहीं मीना और उनके पति पर यह भी आरोप लगाया है कि जब नई दिल्ली की अदालत से जमानत पाने के लिए गारंटर की जरूरत पड़ी और उन्होंने संपर्क किया तब भी पति-पत्नी ने इनकार कर दिया।

उल्लेखनीय है कि जिस मीना कोटवाल को इस प्रकरण का वेद प्रकाश कसूरवार बता रहे हैं, वह इस समय ‘मूकनायक’ नाम से एक वेबसाइट चलाती हैं। पहले बीबीसी में रह चुकी हैं।वायर और द प्रिंट जैसे वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल के लिए लिखती हैं। उनकी पत्रकारिता के मूल में वही सब कुछ है जो वेद प्रकाश की कथित पत्रकारिता का आधार है। वेद प्रकाश के माफीनामे वाले पोस्ट से यह भी पता चलता है कि मीना भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) में उनकी जूनियर थीं।

ऐसे वक्त में जब बिहार के ही एक यूट्यूबर पत्रकार मनीष कश्यप पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया गया है, उसी राज्य में पत्रकारिता के नाम पर अगड़ा-पिछड़ा एजेंडा चलाने वाले यूट्यूबर पत्रकार वेद प्रकाश को माफ कर देना रूपा झा की सहृदयता है। लेकिन सवाल है कि पत्रकार से पहले खुद को एक्टिविस्ट कहने वाले वेद प्रकाश की नीयत और सोच में इससे फर्क पैदा होगा? वैसे पत्रकार के ‘एक्टिविस्ट’ बनने के जोखिम बहुत सारे हैं, इस फेर में उसे पता भी नहीं चलता कि वह कब एक पक्ष बन गया, फिर भी एक्टिविस्ट से यह अपेक्षा की जाती है कि वह समाज के सभी वर्गों की आवाज बनेगा। लेकिन जो एक्टिविस्ट से पहले भी ‘दलित’ जोड़े, एक माफीनामे वाले पोस्ट में ‘जय भीम’ जोड़ने के लिए दर्जन बार एडिट कर ले, लगता नहीं कि उसके दिमाग से ‘जाति’ जा पाएगी। आज भले उसने कानूनी पचड़े से बचने के लिए मीना कोटवाल प्रकरण में जाति का एंगल ठूँसने के लिए माफी माँग ली हो, लेकिन कल को फिर जैसे ही उसे मीडिया से निकाली गई किसी मीना में दलित और किसी रुपा में ब्राह्मण दिखेगा, वह दोबारा मीडिया पर ब्राह्मणों के कब्जे का उतने ही जोर से प्रलाप करेगा।

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अजीत झा
अजीत झा
देसिल बयना सब जन मिट्ठा

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