Tuesday, September 29, 2020
Home देश-समाज नीरव मोदी की गिरफ़्तारी से दुःखी और अवसादग्रस्त कॉन्ग्रेस पेट पर मूसल न मार...

नीरव मोदी की गिरफ़्तारी से दुःखी और अवसादग्रस्त कॉन्ग्रेस पेट पर मूसल न मार ले

आखिर विपक्ष या मोदी-विरोधी क्या चाहते हैं? क्या उन्हें यह बात पता भी है कि वो क्या चाहते हैं? या फिर, उनकी पूरी कैम्पेनिंग सिर्फ इस आधार पर थी कि वो तो भाग गया, अब हाथ आएगा नहीं और नरेन्द्र मोदी अनंतकाल तक कोसा जाता रहेगा?

नीरव मोदी याद ही होगा, वही नकली हीरे बेचने वाला क्यूट टाइप का आदमी जिसमें पंजाब नेशनल बैंक को चर्चा में ला दिया था। फिर नरेन्द्र मोदी के साथ ‘मोदी’ उपनाम शेयर करने के कारण उसे कॉन्ग्रेस वाले, और मज़े लेने वाले पत्रकार, भाई-भाई कहकर भी बुलाने लगे थे, तस्वीरें निकाली जा रही थीं कि मोदी ने माइनॉरिटी रिपोर्ट टाइप भविष्य देखकर उसके साथ फोटो खिंचाने से मना क्यों नहीं किया… रॉबर्ट वाड्रा को दूल्हा बनाकर घर ले आने वाले लोग जब नीरव मोदी और नरेन्द्र मोदी की साथ की तस्वीर पर बवाल करते हैं तो उनका क्यूटाचार चरमसुख देने लगता है।

नीरव मोदी का पैसे लेने वाला घोटाला हो रहा था कॉन्ग्रेस के शासन काल में, पकड़ाया मोदी के काल में, कॉन्ग्रेस ने ऐसे अपराधियों के लिए कोई कानून तक बनाना सही नहीं समझा, मोदी सरकार ने कानून बनाया, और अब कोशिशें जारी हैं कि वो जब लंदन में पाया गया है, तो उसे वापस भारत लाया जाए, लेकिन भ्रष्टाचार का पोषक कौन है? मोदी!

विपक्ष के लिए नीरव मोदी, विजय माल्या आदि बड़े मुद्दे हैं इस बार के चुनाव में। भले ही कांड कॉन्ग्रेस के दौर में हुए, मोदी सरकार ने उन्हें पकड़ा, और अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों एवम् संधियों के दायरे में रहकर जितना दबाव बनाया जा सकता था, बनाकर उनकी ‘घरवापसी’ के प्रयत्न चल रहे हैं, लेकिन कॉन्ग्रेस तो राफेल टाइप इसी बात को एक-दो लाख बार बोलेगी ही। काहे कि आदत है। ऊपर से नीचे तक लबरा लोग ही तो है इस पार्टी में। 

अध्यक्ष ही जब बकैत निकल गया हो, और महासचिव बनने तक की इच्छा आप रखते हों, तो कीजिएगा भी तो क्या! प्रलाप करना ही बचता है। इसलिए, अब जो बयान आते हैं, वो आपकी समझ में नहीं आएँगे। आप सोचने लगेंगे कि अगर भारत सरकार नीरव मोदी को भारत लाने की कोशिश कर रही है, तब इसमें गलत क्या हो सकता है?

कॉन्ग्रेस के कुछ नेताओं के हिसाब से ‘टाइमिंग’ गलत है। जिस देश में हर साल पाँच चुनाव होते हैं, उसमें आप सड़क बनवा दीजिए, बल्ब लगवा दीजिए, चोर पकड़ लीजिए, पाकिस्तान पर बम मार दीजिए, सब कुछ ‘चुनाव’ के नाम पर विपक्ष खेल जाती है।

विपक्ष की मजबूरी आप समझ सकते हैं। विपक्ष के पास सच में एक भी मुद्दा नहीं है। उनके जो मीडिया कैम्पेनर्स थे, वो भी आजकल बहकी-बहकी बातें करने लगे हैं। बेचारे जब तमाम सवाल पूछकर थक गए तो दो साल यह बोलते रहे कि सवाल पूछने नहीं दिया जा रहा! अब उनका ये लॉजिक भी नहीं चलता क्योंकि लोगों ने पूछना शुरु किया कि कौन सा सवाल आपको पूछने नहीं दिया जा रहा, तो चुप हो गए। 

पहले टीवी पर ये बोलकर, कोट हैंगर में टाँगते हुए, बाल बिखरा कर, सॉल्ट और पेप्पर लुक में कूल बनकर पत्रकार लोग निकल लेते थे। अब वहाँ से निकलने के रास्ते में होते हैं कि लोग सोशल मीडिया पर घेरकर पूछ लेते हैं, “चाचा, कौन सा सवाल पूछ नहीं पा रहे? इतना जो टीवी पर बोल रहे हैं, वहीं सवाल पूछ लेते!” चचवा के पास जवाब नहीं होता।

मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ भले ही न रहा हो, लेकिन विपक्ष का दूसरा स्तम्भ तो ज़रूर है। विपक्ष अब सोच नहीं पा रहा कि लोकपाल भी बन गया, घोटाला साबित नहीं हो पाया, मोदी की डिज़ायनर जैकेट का दाम जानने में जनता उत्सुक नहीं है, तो आखिर करें क्या? 

आप जरा सोचिए कि नीरव मोदी चाहे चुनाव की टाइमिंग पर आए, या चुनाव के बाद, आपको क्या चाहिए? आपको एक चोर भारत के कोर्ट में चाहिए, जिसने एक बैंक से पैसे गलत तरीके से लिए और फ़रार हो गया। अगर आपको इस बात से फ़र्क़ नहीं पड़ा था कि ‘मेरा तो पंजाब नेशनल बैंक में खाता भी नहीं’, तो फिर आपके लिए नीरव मोदी आए, न आए, एक ही बात है। लेकिन, अगर आपने नीरव मोदी के, कानून के अभाव में भाग जाने पर मोर्चा संभाला था, तो आप सच-सच बताइए, उसे वापस लाने के प्रयत्न पर आप सरकार से सवाल किस आधार पर पूछ रहे हैं?

या, आपको लगता है कि जिस देश में लोटा लेकर खेत में बैठे आदमी फेसबुक पर वो तस्वीर और इन्स्टा पर सीज़र सैलेड की फोटो हर आधे घंटे में शेयर करता है, फिर भी आधार कार्ड के मामले में प्रायवेसी का बहाना बनाकर सुप्रीम कोर्ट में पहुँच जाता है, वहाँ नीरव मोदी जैसों के कंधे में हॉलीवुड फ़िल्म स्टाइल का चिप फ़िट करके, अपने सेटैलाइट से ट्रैक करता रहे कि वो कहाँ है, और फोन करके राष्ट्राध्यक्षों को बोले, “अरे, वो मोदी जी आपसे गले मिले थे ना, उनका एक काम था। लीजिए बात करेंगे।” किस तर्क से चलते हैं भाई? दो देश क्या व्हाट्सएप्प चैट पर मीम शेयर करके संधियाँ निपटाते हैं?

क्या चोरों को वापस लाने की बात पर आचार संहिता लागू कर दी जाए? या फिर, जो प्रोसेस है, उसके हिसाब से चलते हुए प्रयास करते रहें? आखिर विपक्ष या मोदी-विरोधी क्या चाहते हैं? क्या उन्हें यह बात पता भी है कि वो क्या चाहते हैं? या फिर, उनकी पूरी कैम्पेनिंग सिर्फ इस आधार पर थी कि वो तो भाग गया, अब हाथ आएगा नहीं और नरेन्द्र मोदी अनंतकाल तक कोसा जाता रहेगा?

बात इतनी-सी है कि विपक्ष वालों को अपने चुनावी कैम्पेन का स्क्रिप्ट हर दिन बदलना पड़ रहा है। वो जो कल्पना करके चल रहे थे, वैसा हो नहीं रहा। उन्होंने सोचा था कि पहले साल नहीं, दूसरे साल नहीं, तीसरे साल नहीं, लेकिन चौथे साल तो कोई मंत्री घोटाला कर ही देगा, पाँचवे में तो दो-चार मंत्रालयों से धुआँ निकलेगा, और फिर हम सब मिलकर मोदी को दबोच कर लिंच कर देंगे। 

वो तो हुआ नहीं, उनके दिमाग में जलने वाली आग और धुआँ मानसिक मवाद बनकर, विचित्र बयानों के रूप में बाहर आ रहा है। इसलिए नीरव मोदी भी टाइमिंग के हिसाब से लंदन में पकड़ा जा रहा है। हाल ही में शशि थरूर ने पुलवामा हमले के बारे में बोलते हुए कह दिया कि पुलवामा तक उनकी पार्टी बेहतर पोजिशन में थी, लेकिन भाजपा ने बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद वापसी कर ली है। 

यहाँ कॉन्ग्रेस लगभग दुःखी है कि मोदी के टाइम में सेना ने ऐसा एक्शन क्यों ले लिया। उसी तरह विपक्ष दुःखी है कि इंग्लैंड सरकार माल्या और नीरव मोदी पर एक्शन क्यों ले रही है। कॉन्ग्रेस चिंतित है कि मोदी सरकार कॉन्ग्रेस सरकार की तरह क्यों काम नहीं कर रही जहाँ हर आदमी अपनी पार्टी, परिवार और स्वयं की जेब में पैसे और पावर भर रहा हो?

कॉन्ग्रेस की यही समस्या है कि वो इतना नकारा तो चौवालीस सीट पाने के बाद भी नहीं महसूस कर पाया जितना विपक्ष में कि इतने नेताओं के महागठबंधन के बाद भी मोदी को घेरने के लिए उसके पास सिवाय अहंकार और अभिजात्य घमंड के और कुछ भी नहीं है। आप ज़रा सोचिए कि आप शारीरिक तौर पर तो कमजोर हैं ही, लेकिन आपके नाक में कीड़े घुस जाएँ और आपकी खोपड़ी को भी धीरे-धीरे खाली कर दें, तो कैसा महसूस करेंगे? 

आप भारत की उस पार्टी की तरह फ़ील करेंगे जिसे सत्ता से बाहर रहने का कुछ अनुभव तो था, लेकिन जनता का विश्वास पूरी तरह से खोने का अंदेशा नहीं था। कॉन्ग्रेस अपने सत्तारूढ़ समय के कुकर्मों से संसद और राज्यों से नकारी गई, लेकिन विपक्ष में होकर अपनी मूर्खता, घमंड और जनता से डिस्कनेक्टेड होने के कारण लगातार किए जा रहे प्रलापों से पूरी तरह से एक्सपोज होकर इस स्थिति में पहुँच चुकी है कि उनके अध्यक्ष और नई इंदिरा गाँधी के लिए भी रैलियों की ज़मीन तो छोड़िए, कुर्सियाँ भी खाली रह जाती हैं। 

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अजीत भारतीhttp://www.ajeetbharti.com
सम्पादक (ऑपइंडिया) | लेखक (बकर पुराण, घर वापसी, There Will Be No Love)

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

तिलक लगा, भगवा पहन एंकरिंग करना अपराध है? सुदर्शन न्यूज ने केंद्र के शो-कॉज नोटिस का दिया जवाब

‘यूपीएससी जिहाद’ कार्यक्रम को लेकर सूचना प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी शो-कॉज नोटिस का सुदर्शन न्यूज ने जवाब दे दिया है।

16 दिसंबर को बस फूँका, 17 को हिंदुओं पर पथराव: दिल्ली दंगों में ताहिर हुसैन के बयान से नए खुलासे

ताहिर हुसैन के बयान से दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों को लेकर कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिससे अब तक सब अनजान थे।

दीपिका, सारा, श्रद्धा और रकुल… सबने NCB को दिए एक जैसे जवाब, बताया- हैश ड्रग नहीं है

दीपिका, सारा, श्रद्धा और रकुल से एनसीबी ने पूछताछ भले अलग-अलग की हो, पर दिलचस्प यह है कि सवालों जवाब सबके एक जैसे ही थे।

कहीं देवी-देवताओं की मूर्ति पर हथौड़े से वार, कहीं आग में जलता रथ: आंध्र प्रदेश में मंदिरों पर हुए हालिया हमले

पिछले कुछ समय से लगातार आंध्र प्रदेश में हिंदू मंदिरों पर हमले की घटनाएँ सामने आ रही हैं। ऐसे 5 मामलों में क्या हुआ, जानें।

गायत्री मंत्र जपते थे भगत सिंह, आर्य समाजी था परिवार, सावरकर के थे प्रशंसक: स्वीकार करेंगे आज के वामपंथी?

भगत सिंह का वामपंथ टुकड़े-टुकड़े वाला नहीं था। न ही उन्होंने कभी ऐसा लिखा कि वे हिन्दू धर्म को नहीं मानते या फिर वे हिन्दू देवी-देवताओं से घृणा करते हैं।

हरामखोर का मतलब नॉटी है तो फिर नॉटी का मतलब क्या है? संजय राउत से बॉम्बे HC ने पूछा

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चल रही सुनवाई में बेंच ने कंगना को हरामखोर कहे जाने पर संजय राउत के भाषाई ज्ञान पर सवाल उठाया।

प्रचलित ख़बरें

‘मुझे सोफे पर धकेला, पैंट खोली और… ‘: पुलिस को बताई अनुराग कश्यप की सारी करतूत

अनुराग कश्यप ने कब, क्या और कैसे किया, यह सब कुछ पायल घोष ने पुलिस को दी शिकायत में विस्तार से बताया है।

‘दीपिका के भीतर घुसे रणवीर’: गालियों पर हँसने वाले, यौन अपराध का मजाक बनाने वाले आज ऑफेंड क्यों हो रहे?

दीपिका पादुकोण महिलाओं को पड़ रही गालियों पर ठहाके लगा रही थीं। अनुष्का शर्मा के लिए यह 'गुड ह्यूमर' था। करण जौहर खुलेआम गालियाँ बक रहे थे। तब ऑफेंड नहीं हुए, तो अब क्यों?

बेच चुका हूँ सारे गहने, पत्नी और बेटे चला रहे हैं खर्चा-पानी: अनिल अंबानी ने लंदन हाईकोर्ट को बताया

मामला 2012 में रिलायंस कम्युनिकेशन को दिए गए 90 करोड़ डॉलर के ऋण से जुड़ा हुआ है, जिसके लिए अनिल अंबानी ने व्यक्तिगत गारंटी दी थी।

एंबुलेंस से सप्लाई, गोवा में दीपिका की बॉडी डिटॉक्स: इनसाइडर ने खोल दिए बॉलीवुड ड्रग्स पार्टियों के सारे राज

दीपिका की फिल्म की शूटिंग के वक्त हुई पार्टी में क्या हुआ था? कौन सा बड़ा निर्माता-निर्देशक ड्रग्स पार्टी के लिए अपनी विला देता है? कौन सा स्टार पत्नी के साथ मिल ड्रग्स का धंधा करता है? जानें सब कुछ।

ड्रग्स स्कैंडल: रकुल प्रीत ने उगले 4 बड़े बॉलीवुड सितारों के नाम, करण जौह​र ने क्षितिज रवि से पल्ला झाड़ा

NCB आज दीपिका पादुकोण, सारा अली खान और श्रद्धा कपूर से पूछताछ करने वाली है। उससे पहले रकुल प्रीत ने क्षितिज का नाम लिया है, जो करण जौहर के करीबी बताए जाते हैं।

आजतक के कैमरे से नहीं बच पाएगी दीपिका: रिपब्लिक को ज्ञान दे राजदीप के इंडिया टुडे पर वही ‘सनसनी’

'आजतक' का एक पत्रकार कहता दिखता है, "हमारे कैमरों से नहीं बच पाएँगी दीपिका पादुकोण"। इसके बाद वह उनके फेस मास्क से लेकर कपड़ों तक पर टिप्पणी करने लगा।

‘केस वापस ले, वरना ठोक देंगे’: करण जौहर की ‘ड्रग्स पार्टी’ की शिकायत करने वाले सिरसा को पाकिस्तान से धमकी

करण जौहर के घर पर ड्रग्स पार्टी होने का दावा करने वाले सिरसा को पाकिस्तान से जान से मारने की धमकी मिली है।

तिलक लगा, भगवा पहन एंकरिंग करना अपराध है? सुदर्शन न्यूज ने केंद्र के शो-कॉज नोटिस का दिया जवाब

‘यूपीएससी जिहाद’ कार्यक्रम को लेकर सूचना प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी शो-कॉज नोटिस का सुदर्शन न्यूज ने जवाब दे दिया है।

16 दिसंबर को बस फूँका, 17 को हिंदुओं पर पथराव: दिल्ली दंगों में ताहिर हुसैन के बयान से नए खुलासे

ताहिर हुसैन के बयान से दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों को लेकर कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिससे अब तक सब अनजान थे।

सुब्हानी हाजा ने इराक में IS से ली जिहादी ट्रेनिंग, केरल में जमा किए रासायनिक विस्फोटक: NIA कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद

केरल के कोच्चि स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने सोमवार को ISIS आतंकी सुब्हानी हाजा मोइदीन को उम्रकैद की सज़ा सुनाई।

‘हाँ, मैंने माल के बारे में पूछा, हम सिगरेट को माल कहते हैं; वीड मतलब मोटी सिगरेट-हैश मतलब पतली’

मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि एनसीबी के सामने पूछताछ में दीपिका पादुकोण ने कहा कि 'माल' सिगरेट का कोड वर्ड है।

दीपिका, सारा, श्रद्धा और रकुल… सबने NCB को दिए एक जैसे जवाब, बताया- हैश ड्रग नहीं है

दीपिका, सारा, श्रद्धा और रकुल से एनसीबी ने पूछताछ भले अलग-अलग की हो, पर दिलचस्प यह है कि सवालों जवाब सबके एक जैसे ही थे।

मथुरा: श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति को लेकर दाखिल याचिका पर 30 सितंबर को सुनवाई

मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मालिकाना हक को लेकर दाखिल याचिका पर सीनियर सिविल जज छाया शर्मा की अदालत ने सुनवाई के लिए 30 सितंबर की तारीख निर्धारित की है।

कहीं देवी-देवताओं की मूर्ति पर हथौड़े से वार, कहीं आग में जलता रथ: आंध्र प्रदेश में मंदिरों पर हुए हालिया हमले

पिछले कुछ समय से लगातार आंध्र प्रदेश में हिंदू मंदिरों पर हमले की घटनाएँ सामने आ रही हैं। ऐसे 5 मामलों में क्या हुआ, जानें।

‘अनुराग कश्यप को जेल भेजो’: गिरफ्तारी के लिए मुंबई पुलिस को आठवले ने दिया 7 दिन का अल्टीमेटम

पायल घोष का समर्थन करते हुए रामदास आठवले ने कहा है कि यदि अनुराग कश्यप की सात दिनों में गिरफ्तारी नहीं हुई तो वे धरने पर बैठेंगे।

गायत्री मंत्र जपते थे भगत सिंह, आर्य समाजी था परिवार, सावरकर के थे प्रशंसक: स्वीकार करेंगे आज के वामपंथी?

भगत सिंह का वामपंथ टुकड़े-टुकड़े वाला नहीं था। न ही उन्होंने कभी ऐसा लिखा कि वे हिन्दू धर्म को नहीं मानते या फिर वे हिन्दू देवी-देवताओं से घृणा करते हैं।

हमसे जुड़ें

264,935FansLike
78,073FollowersFollow
325,000SubscribersSubscribe