Tuesday, January 26, 2021
Home राजनीति रोहिंग्या प्रेमी केजरीवाल को यूपी-बिहार के लोगों से नफरत क्यों: BJP नेता कपिल मिश्रा...

रोहिंग्या प्रेमी केजरीवाल को यूपी-बिहार के लोगों से नफरत क्यों: BJP नेता कपिल मिश्रा का लेख

जब NRC की चर्चा शुरू हुई तो केजरीवाल जैसे बौखला ही गए। उन्हें अपने बचे-खुचे वोट बैंक को खोने का डर हैं। बांग्लादेशी और रोहिंग्या न सिर्फ दिल्ली के स्लम में राशनकार्ड और आधार बना कर केजरीवाल के वोटबैंक बन रहे हैं, बल्कि कई बार वो अपराधों में संलिप्त पाए गए हैं।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के मन में बसी पूर्वांचलियों से नफरत के पीछे असली कारण क्या है? असली कारण हैं बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों से मोहब्बत। NRC की जो तलवार घुसपैठियों पर लटक रही हैं, उससे डर कर केजरीवाल रोज पूर्वांचल के लोगों के बारे में अनाप-शनाप बयान दे रहे हैं। अगर ध्यान से देखा जाए तो जिस दिन से NRC पर चर्चा शुरू हुई, उसी दिन से केजरीवाल ने यूपी-बिहार के लोगों के बारे में बदतमीजी भरे बयान देने शुरू कर दिए।

भारत की राजधानी अपने आप में मिनी इंडिया है। यहाँ की कला, संस्कृति, पहचान, त्यौहार- सब जैसे पूरे देश की एक छोटी सी झलक हैं। यूपी, बिहार, पंजाब, राजस्थान, उड़ीसा, बंगाल, तमिलनाडु, केरल, आंध्र, कर्नाटक, हिमाचल, हरियाणा, असम, मिज़ोरम, सिक्किम, उत्तरांचल- भारत का ऐसा कोई कोना नहीं जहाँ के लोग दिल्ली में ना रहते हों। दिल्ली में रहने वाले लोग पढ़ाई के लिए, बीमारियों के ईलाज के लिए, छुट्टियों के लिए, अपने नाते-रिश्तेदारों को दिल्ली बुलाएँगे, ये स्वाभाविक हैं। राजधानी होने के नाते दिल्ली में स्वभावतः हमेशा से बाकी देश से बेहतर सुविधाएँ रही हैं।

ख़ुद हरियाणा में जन्में और फिर यूपी के ग़ाज़ियाबाद में रहे केजरीवाल के मन में यूपी-बिहार के लिए जो नफरत पैदा हुई है, उसके अन्य अन्य कारण भी हैं। पहले पंजाब में हार, फिर दिल्ली नगर निगम में हुई भयानक हार, उसके बाद यूपी में प्रचंड बहुमत से भाजपा की जीत, फिर एक-एक कर के हर राज्य में जमानत जब्त होना और फिर आखिर में जिस हरियाणा में केजरीवाल ने व्यक्तिगत प्रचार किया और जहाँ के चुनाव के नाम पर राज्यसभा के सीटों तक का सौदा किया गया, वहाँ उनके उम्मीदवारों की न केवल जमानत जब्त हुई बल्कि नोटा से भी हार कर शर्मिंदा होना पड़ा।

इन सब हारों को केजरीवाल ने व्यक्तिगत अपमान के तौर पर लिया। केजरीवाल और उनके आसपास के लोग जनता को ही जिम्मेदार बताने लगे। कभी ईवीएम को गाली और कभी जनता को ही ग़लत ठहराना, केजरीवाल गैंग को ऐसे बयान देने की जैसे आदत बन गयी। इसी नफरत के कारण पहले दिल्ली सरकार के सभी अस्पतालों में बिना दिल्ली के वोटर कार्ड और आधार के मुफ्त ईलाज पर बैन लगाया गया। केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना को भी दिल्ली में लागू होने से रोक दिया गया।

हजारों लोग अपने माता-पिता तक को दिल्ली में लाकर ईलाज करवाने में तरस गए। केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना दिल्ली में बने केंद्र सरकार के अस्पतालों में लागू थी और एम्स, राम मनोहर लोहिया जैसे अस्पतालों में मुफ्त ईलाज जारी रहा। आयुष्मान योजना की सफलता और दिल्ली सरकार की स्वास्थ्य सुविधाओं का ठप्प होना भी एक कारण रहा कि केजरीवाल नफरत से भरते चले गए।

एक छोटा सा उदाहरण देखिए। रेबीज का इंजेक्शन पूरी दिल्ली में केवल केंद्र सरकार के अस्पतालों में ही उपलब्ध है। दिल्ली सरकार के अस्पतालों में रोजाना लगभग 15,000 केस आते हैं, जो बिना दवाई के सीधा केंद्र सरकार कब अस्पतालों में भेजे जाते हैं। नफरत और हार से बौखलाए केजरीवाल ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले जिस प्रकार का शारीरिक हमला अमानुतुल्ला खान द्वारा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी जी पर करवाया, वो पूरे देश ने देखा।

इस सबके बाद जब NRC की चर्चा शुरू हुई तो केजरीवाल जैसे बौखला ही गए। उन्हें अपने बचे-खुचे वोट बैंक को खोने का डर हैं। बांग्लादेशी और रोहिंग्या न सिर्फ दिल्ली के स्लम में राशनकार्ड और आधार बना कर केजरीवाल के वोटबैंक बन रहे हैं, बल्कि कई बार वो अपराधों में संलिप्त पाए गए हैं। चैन खींचने से लेकर, चोरी, लूट, हत्या और ड्रग माफिया का पूरा धंधा बांग्लादेशी घुसपैठियों द्वारा चलाया जा रहा है। यही केजरीवाल का वोट बैंक है और फंडिंग का सोर्स भी।

केजरीवाल कुछ भी करके इन घुसपैठियों को बचाना चाहते हैं। आज केजरीवाल को यूपी-बिहार, बंगाल और राजस्थान से आए लोगो से नफरत है। इसके उलट उन्हें बांग्लादेश और म्यांमार से आए घुसपैठियों से मोहब्बत है। देशद्रोही, नक्सली और टुकड़े-टुकड़े गैंग की राजनीति करने वाले केजरीवाल अपने वोट बैंक को एक साफ सन्देश दे रहे हैं- “दिल्ली में NRC लागू नहीं होने दूँगा और टुकड़े-टुकड़े गैंग को बचाऊँगा।

वो आदमी जो खुद जेब मे 500 रुपए लेकर दिल्ली आया और दिल्ली का मुख्यमंत्री बन गया, उसे आज यूपी-बिहार के उन लोगों से घृणा हो रही है, जो 500 रुपए का किराया लगाकर आयुष्मान योजना से दिल्ली में ईलाज करवाते हैं। वो आदमी जो चंदा लेने और कार्यकर्ता ढूँढने के लिए पूरे देश से अपील करता है, वो दिल्ली में उनके आने पर बैन लगाना चाहता है।

भाजपा अध्यक्ष का पूर्वांचली होना भी केजरीवाल की नफरत का एक बड़ा कारण है। दिल्ली में निगम और लोकसभा चुनावों में मनोज तिवारी की अध्यक्षता में भाजपा के हाथों केजरीवाल की बड़ी हार अब व्यक्तिगत दुश्मनी से हटकर पूरे समाज से नफरत में बदल चुकी है। केजरीवाल का अहंकार अब बदतमीजी में बदल चुका है। जिस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल वो यूपी-बिहार के लोगों के खिलाफ कर रहे हैं, वो समाज मे एक बड़े गुस्से को जन्म दे रही है।

यूपी बिहार के स्वाभिमानी समाज में, खासतौर पर युवाओं में भयानक गुस्सा पनप रहा है और इस अपमान की बहुत भारी कीमत केजरीवाल को चुकानी पड़ेगी।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Kapil Mishra
Kapil Mishra is a BJP leader and a former member of Delhi Legislative Assembly.

 

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

तेज रफ्तार ट्रैक्टर से मरा ‘किसान’, राजदीप ने कहा- पुलिस की गोली से हुई मौत, फिर ट्वीट किया डिलीट

राजदीप सरदेसाई ने तिरंगे में लिपटी मृतक की लाश की तस्वीर अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर करते हुए लिखा कि इसकी मौत पुलिस की गोली से हुई है।

लौंडा नाच को जीवनदान देने वाले रामचंद्र मांझी, डायन प्रथा के खिलाफ लड़ रही छुटनी देवी: दोनों को पद्मश्री सम्मान

गणतंत्र दिवस के अवसर पर 7 को पद्म विभूषण, 10 को पद्म भूषण और 102 को पद्मश्री पुरस्कार। इन्हीं में दो नाम रामचंद्र मांझी और छुटनी देवी के हैं।

महिला पुलिस कॉन्स्टेबल को जबरन घेर कर कोने में ले गए ‘अन्नदाता’, किया दुर्व्यवहार: एक अन्य जवान हुआ बेहोश

महिला पुलिस को किसान प्रदर्शनकारी चारों ओर से घेरे हुए थे। कोने में ले जाकर महिला कॉन्स्टेबल के साथ दुर्व्यवहार किया गया।

रस्सी से लाल किला का गेट तोड़ा, जहाँ से देश के PM देते हैं भाषण, वहाँ से लहरा रहे पीला-काला झंडा

किसान लाल किले तक घुस चुके हैं और उन्होंने वहाँ झंडा भी फहरा दिया है। प्रदर्शनकारी किसानों ने लाल किले के फाटक पर रस्सियाँ बाँधकर इसे गिराने की कोशिश भी कीं।
00:32:37

मीलॉर्ड! आज खुश तो बहुत होंगे आप: ऑपइंडिया एडिटर के चंद सवाल

शायद अब सुप्रीम कोर्ट को लगेगा कि औरों के भी संवैधानिक अधिकार हैं, लिब्रांडू मीडिया गिरोह इसे सफल आंदोलन करार देगा, जबकि पुलिस पर तलवारों से हमले हुए हैं!

लाल किला पर खालिस्तानी झंडा फहराने पर SFJ देगा ₹1.83 करोड़, पहुँच गई ‘किसानों’ की ट्रैक्टर रैली

दिल्ली में जारी 'किसानों' का विरोध प्रदर्शन अब हिंसा और अराजकता में बदल गया है। लाल किला तक किसानों की ट्रैक्टर रैली का जत्था पहुँच चुका है।

प्रचलित ख़बरें

12 साल की लड़की का स्तन दबाया, महिला जज ने कहा – ‘नहीं है यौन शोषण’: बॉम्बे HC का मामला

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने शारीरिक संपर्क या ‘यौन शोषण के इरादे से किया गया शरीर से शरीर का स्पर्श’ (स्किन टू स्किन) के आधार पर...

दिल्ली में ‘किसानों’ ने किया कश्मीर वाला हाल: तलवार ले पुलिस को खदेड़ा, जगह-जगह तोड़फोड़, पुलिस वैन पर पथराव

दिल्ली में प्रदर्शनकारी पुलिस के वज्र वाहन पर चढ़ गए और वहाँ जम कर तोड़-फोड़ मचाई। 'किसानों' द्वारा तलवारें भी भाँजी गईं।

राहुल गाँधी बोले- किसान मजबूत होते तो सेना की जरूरत नहीं होती… अनुवादक मोहम्मद इमरान बेहोश हो गए

इरोड में राहुल गाँधी के अंग्रेजी भाषण का तमिल में अनुवाद करने वाले प्रोफेसर मोहम्मद इमरान मंच पर ही बेहोश होकर गिर पड़े।

दलित लड़की की हत्या, गुप्तांग पर प्रहार, नग्न लाश… माँ-बाप-भाई ने ही मुआवजा के लिए रची साजिश: UP पुलिस ने खोली पोल

बाराबंकी में दलित युवती की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया। पुलिस ने बताया कि पिता, माँ और भाई ने ही मिल कर युवती की हत्या कर दी।

महिला पुलिस कॉन्स्टेबल को जबरन घेर कर कोने में ले गए ‘अन्नदाता’, किया दुर्व्यवहार: एक अन्य जवान हुआ बेहोश

महिला पुलिस को किसान प्रदर्शनकारी चारों ओर से घेरे हुए थे। कोने में ले जाकर महिला कॉन्स्टेबल के साथ दुर्व्यवहार किया गया।

छठी बीवी ने सेक्स से किया इनकार तो 7वीं की खोज में निकला 63 साल का अयूब: कई बीमारियों से है पीड़ित, FIR दर्ज

गुजरात में अयूब देगिया की छठी बीवी ने उसके साथ सेक्स करने से इनकार कर दिया, जब उसे पता चला कि उसके शौहर की पहले से ही 5 बीवियाँ हैं।
- विज्ञापन -

 

मुंगेर में माँ दुर्गा भक्तों पर गोलीबारी करने वाले सभी पुलिस अधिकारी बहाल, जानिए क्या कहती है CISF रिपोर्ट

बिहार पुलिस द्वारा दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस पर बर्बरता बरतने के महीनों बाद सभी निलंबित अधिकारियों को वापस सेवा में बहाल कर दिया गया है।

‘असली’ हार्वर्ड प्रोफेसर श्रीकांत दातार को मोदी सरकार ने दिया पद्मश्री, अभी हैं बिजनेस स्कूल के डीन

दातार से पहले हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का नाम एनडीटीवी की पूर्व कर्मचारी निधि राजदान के कारण चर्चा में आया था। उन्होंने दावा किया था कि उन्हें यूनिवर्सिटी ने पत्रकारिता पढ़ाने के लिए नियुक्त कर लिया है।

तेज रफ्तार ट्रैक्टर से मरा ‘किसान’, राजदीप ने कहा- पुलिस की गोली से हुई मौत, फिर ट्वीट किया डिलीट

राजदीप सरदेसाई ने तिरंगे में लिपटी मृतक की लाश की तस्वीर अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर करते हुए लिखा कि इसकी मौत पुलिस की गोली से हुई है।

रिपब्लिक डे पर ये कौन से किसानों की तस्वीरें शेयर कर रही कॉन्ग्रेस? फिर हिंसा पर उतारू वो कौन हैं जो पुलिस को मार...

पिछले दिनों कॉन्ग्रेस ने इस आंदोलन की आग में घी डालने का काम किया। उसी का नतीजा है कि राजधानी में एक बार फिर पुलिस व्यवस्था को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है।

लौंडा नाच को जीवनदान देने वाले रामचंद्र मांझी, डायन प्रथा के खिलाफ लड़ रही छुटनी देवी: दोनों को पद्मश्री सम्मान

गणतंत्र दिवस के अवसर पर 7 को पद्म विभूषण, 10 को पद्म भूषण और 102 को पद्मश्री पुरस्कार। इन्हीं में दो नाम रामचंद्र मांझी और छुटनी देवी के हैं।

‘किसान’ रैली में 1 की मौत: तेज रफ़्तार ट्रैक्टर के पलटने से हुआ हादसा

किसानों के हिंसक विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के डीडीयू मार्ग पर एक ट्रैक्टर के पलट जाने से एक ‘किसान’ की मौत हो गई है।

महिला पुलिस कॉन्स्टेबल को जबरन घेर कर कोने में ले गए ‘अन्नदाता’, किया दुर्व्यवहार: एक अन्य जवान हुआ बेहोश

महिला पुलिस को किसान प्रदर्शनकारी चारों ओर से घेरे हुए थे। कोने में ले जाकर महिला कॉन्स्टेबल के साथ दुर्व्यवहार किया गया।

रस्सी से लाल किला का गेट तोड़ा, जहाँ से देश के PM देते हैं भाषण, वहाँ से लहरा रहे पीला-काला झंडा

किसान लाल किले तक घुस चुके हैं और उन्होंने वहाँ झंडा भी फहरा दिया है। प्रदर्शनकारी किसानों ने लाल किले के फाटक पर रस्सियाँ बाँधकर इसे गिराने की कोशिश भी कीं।
00:32:37

मीलॉर्ड! आज खुश तो बहुत होंगे आप: ऑपइंडिया एडिटर के चंद सवाल

शायद अब सुप्रीम कोर्ट को लगेगा कि औरों के भी संवैधानिक अधिकार हैं, लिब्रांडू मीडिया गिरोह इसे सफल आंदोलन करार देगा, जबकि पुलिस पर तलवारों से हमले हुए हैं!

उपद्रवी ‘अन्नदाता’ को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस जान-जोखिम में डालकर बैठी सड़क पर: जगह-जगह हो रहे भयंकर तोड़-फोड़

उपद्रव को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस जहाँ जान को जोखिम में डालकर सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है। वहीं वामपंथी गिरोह सोशल मीडिया पर पुलिस को नेगेटिव दिखाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहा।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,695FollowersFollow
386,000SubscribersSubscribe