Friday, October 22, 2021
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रोहिंग्या प्रेमी केजरीवाल को यूपी-बिहार के लोगों से नफरत क्यों: BJP नेता कपिल मिश्रा का लेख

जब NRC की चर्चा शुरू हुई तो केजरीवाल जैसे बौखला ही गए। उन्हें अपने बचे-खुचे वोट बैंक को खोने का डर हैं। बांग्लादेशी और रोहिंग्या न सिर्फ दिल्ली के स्लम में राशनकार्ड और आधार बना कर केजरीवाल के वोटबैंक बन रहे हैं, बल्कि कई बार वो अपराधों में संलिप्त पाए गए हैं।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के मन में बसी पूर्वांचलियों से नफरत के पीछे असली कारण क्या है? असली कारण हैं बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों से मोहब्बत। NRC की जो तलवार घुसपैठियों पर लटक रही हैं, उससे डर कर केजरीवाल रोज पूर्वांचल के लोगों के बारे में अनाप-शनाप बयान दे रहे हैं। अगर ध्यान से देखा जाए तो जिस दिन से NRC पर चर्चा शुरू हुई, उसी दिन से केजरीवाल ने यूपी-बिहार के लोगों के बारे में बदतमीजी भरे बयान देने शुरू कर दिए।

भारत की राजधानी अपने आप में मिनी इंडिया है। यहाँ की कला, संस्कृति, पहचान, त्यौहार- सब जैसे पूरे देश की एक छोटी सी झलक हैं। यूपी, बिहार, पंजाब, राजस्थान, उड़ीसा, बंगाल, तमिलनाडु, केरल, आंध्र, कर्नाटक, हिमाचल, हरियाणा, असम, मिज़ोरम, सिक्किम, उत्तरांचल- भारत का ऐसा कोई कोना नहीं जहाँ के लोग दिल्ली में ना रहते हों। दिल्ली में रहने वाले लोग पढ़ाई के लिए, बीमारियों के ईलाज के लिए, छुट्टियों के लिए, अपने नाते-रिश्तेदारों को दिल्ली बुलाएँगे, ये स्वाभाविक हैं। राजधानी होने के नाते दिल्ली में स्वभावतः हमेशा से बाकी देश से बेहतर सुविधाएँ रही हैं।

ख़ुद हरियाणा में जन्में और फिर यूपी के ग़ाज़ियाबाद में रहे केजरीवाल के मन में यूपी-बिहार के लिए जो नफरत पैदा हुई है, उसके अन्य अन्य कारण भी हैं। पहले पंजाब में हार, फिर दिल्ली नगर निगम में हुई भयानक हार, उसके बाद यूपी में प्रचंड बहुमत से भाजपा की जीत, फिर एक-एक कर के हर राज्य में जमानत जब्त होना और फिर आखिर में जिस हरियाणा में केजरीवाल ने व्यक्तिगत प्रचार किया और जहाँ के चुनाव के नाम पर राज्यसभा के सीटों तक का सौदा किया गया, वहाँ उनके उम्मीदवारों की न केवल जमानत जब्त हुई बल्कि नोटा से भी हार कर शर्मिंदा होना पड़ा।

इन सब हारों को केजरीवाल ने व्यक्तिगत अपमान के तौर पर लिया। केजरीवाल और उनके आसपास के लोग जनता को ही जिम्मेदार बताने लगे। कभी ईवीएम को गाली और कभी जनता को ही ग़लत ठहराना, केजरीवाल गैंग को ऐसे बयान देने की जैसे आदत बन गयी। इसी नफरत के कारण पहले दिल्ली सरकार के सभी अस्पतालों में बिना दिल्ली के वोटर कार्ड और आधार के मुफ्त ईलाज पर बैन लगाया गया। केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना को भी दिल्ली में लागू होने से रोक दिया गया।

हजारों लोग अपने माता-पिता तक को दिल्ली में लाकर ईलाज करवाने में तरस गए। केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना दिल्ली में बने केंद्र सरकार के अस्पतालों में लागू थी और एम्स, राम मनोहर लोहिया जैसे अस्पतालों में मुफ्त ईलाज जारी रहा। आयुष्मान योजना की सफलता और दिल्ली सरकार की स्वास्थ्य सुविधाओं का ठप्प होना भी एक कारण रहा कि केजरीवाल नफरत से भरते चले गए।

एक छोटा सा उदाहरण देखिए। रेबीज का इंजेक्शन पूरी दिल्ली में केवल केंद्र सरकार के अस्पतालों में ही उपलब्ध है। दिल्ली सरकार के अस्पतालों में रोजाना लगभग 15,000 केस आते हैं, जो बिना दवाई के सीधा केंद्र सरकार कब अस्पतालों में भेजे जाते हैं। नफरत और हार से बौखलाए केजरीवाल ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले जिस प्रकार का शारीरिक हमला अमानुतुल्ला खान द्वारा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी जी पर करवाया, वो पूरे देश ने देखा।

इस सबके बाद जब NRC की चर्चा शुरू हुई तो केजरीवाल जैसे बौखला ही गए। उन्हें अपने बचे-खुचे वोट बैंक को खोने का डर हैं। बांग्लादेशी और रोहिंग्या न सिर्फ दिल्ली के स्लम में राशनकार्ड और आधार बना कर केजरीवाल के वोटबैंक बन रहे हैं, बल्कि कई बार वो अपराधों में संलिप्त पाए गए हैं। चैन खींचने से लेकर, चोरी, लूट, हत्या और ड्रग माफिया का पूरा धंधा बांग्लादेशी घुसपैठियों द्वारा चलाया जा रहा है। यही केजरीवाल का वोट बैंक है और फंडिंग का सोर्स भी।

केजरीवाल कुछ भी करके इन घुसपैठियों को बचाना चाहते हैं। आज केजरीवाल को यूपी-बिहार, बंगाल और राजस्थान से आए लोगो से नफरत है। इसके उलट उन्हें बांग्लादेश और म्यांमार से आए घुसपैठियों से मोहब्बत है। देशद्रोही, नक्सली और टुकड़े-टुकड़े गैंग की राजनीति करने वाले केजरीवाल अपने वोट बैंक को एक साफ सन्देश दे रहे हैं- “दिल्ली में NRC लागू नहीं होने दूँगा और टुकड़े-टुकड़े गैंग को बचाऊँगा।

वो आदमी जो खुद जेब मे 500 रुपए लेकर दिल्ली आया और दिल्ली का मुख्यमंत्री बन गया, उसे आज यूपी-बिहार के उन लोगों से घृणा हो रही है, जो 500 रुपए का किराया लगाकर आयुष्मान योजना से दिल्ली में ईलाज करवाते हैं। वो आदमी जो चंदा लेने और कार्यकर्ता ढूँढने के लिए पूरे देश से अपील करता है, वो दिल्ली में उनके आने पर बैन लगाना चाहता है।

भाजपा अध्यक्ष का पूर्वांचली होना भी केजरीवाल की नफरत का एक बड़ा कारण है। दिल्ली में निगम और लोकसभा चुनावों में मनोज तिवारी की अध्यक्षता में भाजपा के हाथों केजरीवाल की बड़ी हार अब व्यक्तिगत दुश्मनी से हटकर पूरे समाज से नफरत में बदल चुकी है। केजरीवाल का अहंकार अब बदतमीजी में बदल चुका है। जिस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल वो यूपी-बिहार के लोगों के खिलाफ कर रहे हैं, वो समाज मे एक बड़े गुस्से को जन्म दे रही है।

यूपी बिहार के स्वाभिमानी समाज में, खासतौर पर युवाओं में भयानक गुस्सा पनप रहा है और इस अपमान की बहुत भारी कीमत केजरीवाल को चुकानी पड़ेगी।

 

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Kapil Mishra
Kapil Mishra is a BJP leader and a former member of Delhi Legislative Assembly.

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