U-Turn: चुनावी ‘धंधे’ में अब उतरा मूँछ वाला ‘गुंडा’, अभिनेताओं की राजनीति को कभी बताया था दुर्भाग्य!

प्रकाश राज नरेंद्र मोदी की आलोचना में इतने खो गए कि अपना नेशनल अवॉर्ड वापस करने तक की भी घोषणा कर दी थी। लेकिन शायद उन्होंने अपने घर में रखे 5 नेशनल अवॉर्ड्स को देखने के बाद यू-टर्न लेने की योजना बनाई।

भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक अलग मुक़ाम बनाने के बाद अब प्रकाश राज ने अपनी कमाई इज्जत पर बट्टा लगाने की कसम खा ली है। यह और बात है कि बेइज्जती के कीचड़ में भी वो लोट-पोट होकर गर्व महसूस कर रहे हैं। पहले के प्रकाश राज को राजनीति में कोई ख़ास रूचि नहीं थी। लेकिन 2014 में मोदी सरकार के सत्ता संभालने के साथ ही उन्हें देश में सब कुछ बिगड़ता सा नज़र आने लगा। वैसे तो इस जमात में और भी कई लोग हैं लेकिन प्रकाश राज इसके नेतृत्वकर्ताओं में से एक हैं। इस पर आगे चर्चा होती रहेगी लेकिन शुरुआत करते हैं उनके नवंबर 2017 में दिए गए बयान से। प्रकाश राज ने उस दौरान अभिनेताओं के राजनीति में आने को देश का दुर्भाग्य बताते हुए कहा था कि वो अभिनेताओं के राजनीति में आने को सही नहीं मानते। उन्होंने यह भी कहा था कि वो किसी भी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़ेंगे।

प्रकाश राज उस समय अप्रत्यक्ष रूप से तमिल अभिनेता कमल हासन पर निशाना साध रहे थे। तमिलनाडु में राजनीति और सिनेमा के संगम को आगे बढ़ाते हुए सुपरस्टार रजनीकांत और कमल हासन राजनीति में एंट्री की घोषणा कर चुके हैं। प्रकाश राज को अपने उस बयान को भूलने में बस 1 साल से कुछ ही महीने अधिक लगे। नवंबर 2017 में अभिनेताओं की राजनीति में एंट्री को देश का दुर्भाग्य बताने वाले प्रकाश राज ने जनवरी 2019 में घोषणा कर दी कि वो लोकसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतरेंगे। अभिनय के लिए नेशनल अवॉर्ड जीत चुके प्रकाश राज ने वास्तविकता में भी ऐसा ही किरदार निभाया, जैसा वो फ़िल्मों में निभाते आ रहे हैं।

बेंगलुरु सेंट्रल से चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे प्रकाश राज ने अब कहा है कि चुनाव एक धंधा बन चुका है और वो अभिनेता और स्थानीय होने के कारण इतिहास बदलने की क्षमता रखते हैं। प्रकाश राज ने ख़ुद को सेक्युलर इंडिया की आवाज़ बताते हुए आगे कहा कि आज की चुनाव प्रणाली एक ब्रांडिंग बन चुकी है, मार्केटिंग टूल बन चुकी है। बकौल राज, वो नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ नहीं हैं, सिर्फ़ सत्ता से सवाल पूछ रहे हैं। वॉन्टेड, सिंघम और दबंग-2 में मुख्य विलेन की भूमिका निभा चुके प्रकाश राज वास्तविक दुनिया में लीड हीरो बनने की फ़िराक़ में हैं, भले ही उनकी कथनी और करनी में कोई मेल नहीं हो।

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

वामपंथी पार्टियों के दुलारे प्रकाश राज को आम आदमी पार्टी का भी समर्थन मिल रहा है। भाजपा और संघ को भर-भर कर गालियाँ देने वाले प्रकाश राज यू-टर्न लेने के मामले में अपने साथी अरविन्द केजरीवाल को भी पीछे छोड़ चुके हैं। वामपंथी पार्टियों के सम्मेलनों में उनके चेहरे को ख़ूब भुनाया गया। कहने को तो वो निर्दलीय मैदान में हैं लेकिन उन्हें किन पार्टियों का समर्थन प्राप्त है, यह किसी से छिपा नहीं है। गाय और गोमूत्र को लेकर भी उनके बयान ख़ासे चर्चा में रहे। उन्होंने अपने आलोचकों को गोमूत्र में गोबर मिलाकर कपड़े साफ़ करने को कहा था। खैर, उनकी यू-टर्न की एक और बानगी देखिए।

प्रकाश राज नरेंद्र मोदी की आलोचना में इतने खो गए कि उन्होंने अपना नेशनल अवॉर्ड वापस करने तक की भी घोषणा कर दी थी। लेकिन फिर शायद उन्होंने अपने घर में रखे पाँच नेशनल अवॉर्ड्स को जी भर देखने के बाद यू-टर्न लेने की योजना बनाई। बाद में उन्होंने कहा कि वो इतने भी बड़े मूर्ख नहीं हैं कि अपने अवॉर्ड्स वापस कर दें। उन्हें पता भी नहीं चला कि उन्होंने अनजाने में ही सही, अवॉर्ड वापसी करने वाले अपने साथियों को मूर्ख ठहरा दिया। अभी से ही यू-टर्न ले रहे प्रकाश राज शायद वो सारे दाँव-पेंच आज़मा रहे हैं जो उन्होंने फ़िल्मों में एक्टिंग के दौरान सीखे हैं।

वैसे बहुत लोगों को पता नहीं है लेकिन ये बात जानने लायक है कि प्रकाश राज पहले ऐसे एक्टर हैं, जिन्हें तेलुगू फ़िल्म इंडस्ट्री (टॉलीवुड) द्वारा बैन किया गया था। कई तेलुगू फ़िल्मों में काम कर चुके प्रकाश राज को उनकी ही इंडस्ट्री ने प्रतिबंधित कर दिया था। माँ दुर्गा के नाम पर बनी एक आपत्तिजनक टाइटल वाली फ़िल्म का भी उन्होंने समर्थन किया था। आलम यह है कि दिखावा के चक्कर में वो विदेशों में छुट्टियाँ मनाने के दौरान भी अपने आलोचकों के बारे में ही सोचते रहते हैं और अपनी लक्ज़री वाली लाइफस्टाइल से जुड़ी चीजें सोशल मीडिया पर पोस्ट कर तथाकथित ‘ट्रॉल्स’ को डेडिकेट करते हैं। कई ट्वीटर यूजर्स ने तो कहा भी है कि प्रकाश राज 24 घंटे आलोचकों को नीचा दिखाने के तरीके के बारे में ही सोचते रहते हैं।

अगर अभिनेताओं का राजनीति में आना ग़लत है, देश का दुर्भाग्य है तो प्रकाश राज आज ख़ुद राजनीति में क्यों हैं? अगर अवॉर्ड वापसी सही था तो उन्होंने ये क्यों कहा कि अवॉर्ड वापस करना उनके लिए मूर्खता है? अगर उनका व्यवहार अच्छा रहा है तो जिस इंडस्ट्री में उन्होंने कई हिट फ़िल्में दीं, उसने ही उन्हें क्यों प्रतिबंधित कर दिया? उमर ख़ालिद, कन्हैया कुमार और शेहला रशीद के साथ फोटो खिंचवा कर उन्हें प्रोत्साहित करने वाले प्रकाश राज भाजपा और केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ किसी भी तरह के कृत्य का समर्थन कर अपने-आप को लोकतंत्र का सबसे बड़ा हीरो मानते हैं। और तो और, स्टैचू ऑफ यूनिटी से भी उन्हें ख़ासी दिक्कत थी।

इन अभिनेताओं के साथ असल दिक्कत यह है कि ये पहले तो सामाजिक कार्यकर्ता होने का ढोंग रचते हैं और फिर धीमे-धीमे राजनीति को गंदगी बताते-बताते कैसे उसी में उतर जाते हैं, पता ही नहीं चलता। ये ग़रीबों के लिए कार्य करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता नहीं होते, ये ख़ुद को एक्टिविस्ट कहलाना पसंद करते हैं और उसके लिए एकमात्र क्राइटेरिया है, वर्तमान मोदी सरकार को गालियाँ देना और इस जमात के अन्य लोगों का समर्थन करना, चाहे वो कोई भी हो। प्रकाश राज ने भी देखा कि जब करुणानिधि, अन्नादुराई, जयललिता और एनटीआर जैसे फ़िल्मों से जुड़े लोग मुख्यमंत्री बन सकते हैं और अम्बरीष, चिरंजीवी, विजयकांत जैसे अभिनेता अच्छे पदों पर पहुँच सकते हैं तो वो क्यों नहीं!

शायद इसी लालच से प्रकाश राज का मन डोल गया होगा। कर्णाटक में वामपंथी दलों व मोदी विरोधी खेमे के पोस्टर बॉय तो वो हैं ही। वो अलग बात है कि कॉन्ग्रेस ने ख़ूब कोशिश की कि वो बेंगलुरु सेंट्रल से न उतरें क्योंकि पार्टी ने वहाँ से एक मुस्लिम को टिकट दिया है और उसे अंदेशा है कि प्रकाश राज उसी का वोट काट बैठेंगे। ऐसे में, कॉन्ग्रेस को डर है कि कहीं भाजपा सांसद पीसी मोहन जीत की हैट्रिक न लगा बैठें। अब देखना यह है कि राजनीति को गाली देकर राजनीति में उतरे ‘एक्टिविस्ट’ प्रकाश राज का राजनीतिक करियर कितना लम्बा चलता है।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by paying for content

यू-ट्यूब से

बड़ी ख़बर

"पाकिस्तानी सेना अभी कश्मीर मसले पर भारत से युद्ध लड़ने की स्थिति में नहीं है। सुस्त होती अर्थव्यवस्था और बढ़ती महँगाई का आम आदमी के जीवन पर त्रासद असर पड़ा है।"- ये शब्द किसी भारतीय नेता या अधिकारी के नहीं हैं। ये बयान है पाकिस्तान की सैन्य वैज्ञानिक आयशा सिद्दीका के।

ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

अमानुल्लाह जेहरी

PAk से आज़ादी माँग रहे बलूचिस्तान में बीएनपी नेता और उनके 14 साल के पोते को गोलियों से छलनी किया

पाकिस्तान को अपने स्वतन्त्रता दिवस (14 अगस्त) के दिन तब शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा जब ट्विटर पर बलूचिस्तान के समर्थन में BalochistanSolidarityDay और 14thAugustBlackDay हैशटैग ट्रेंड करने लगा था। इन ट्रेंडों पर तकरीबन क्रमशः 100,000 और 54,000 ट्वीट्स हुए।

राजस्थान: मुसलमानों के हाथों मारे गए हरीश जाटव के नेत्रहीन पिता के शव के साथ सड़क पर उतरे लोग, पुलिस से झड़प

हरीश जाटव की बाइक से एक मुस्लिम महिला को टक्कर लग गई थी। इसके बाद मुस्लिम महिला के परिजनों ने उसकी जमकर पिटाई की। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस मॉब लिंचिंग के मामले को एक्सीडेंट साबित करने पर तुली हुई है।
चापेकर बंधु

जिसके पिता ने लिखी सत्यनारायण कथा, उसके 3 बेटों ने ‘इज्जत लूटने वाले’ अंग्रेज को मारा और चढ़ गए फाँसी पर

अंग्रेज सिपाही प्लेग नियंत्रण के नाम पर औरतों-मर्दों को नंगा करके जाँचते थे। चापेकर बंधुओं ने इसका आदेश देने वाले अफसर वॉल्टर चार्ल्स रैंड का वध करने की ठानी। प्लान के मुताबिक जैसे ही वो आया, दामोदर ने चिल्लाकर अपने भाइयों से कहा "गुंडया आला रे" और...
शाजिया इल्मी

भारत विरोधी नारे लगा रहे लोगों से सियोल में अकेले भिड़ गईं BJP नेता शाजिया इल्मी

शाजिया इल्मी को भारत विरोधी नारों से आपत्ति हुई तो वह प्रदर्शनकारियों के बीच पहुँच गईं और उन्हें समझाने की कोशिश की। जब प्रदर्शनकारी नहीं माने, तो वे भी इंडिया जिंदाबाद के नारे लगाने लगीं।
कविता कृष्णन

कविता कृष्णन का ईमेल लीक: देश विरोधी एजेंडे के लिए न्यायपालिका, सेना, कला..के लोगों को Recruit करने की योजना

वामपंथियों की जड़ें कितनी गहरी हैं, स्क्रीनशॉट्स में इसकी भी नज़ीर है। कविता कृष्णन पूर्व-सैन्यकर्मी कपिल काक के बारे में बात करतीं नज़र आतीं हैं। वायुसेना के पूर्व उप-प्रमुख यह वामपंथी प्रोपेगंडा फैलाते नज़र आते हैं कि कैसे भारत ने कश्मीर की आशाओं पर खरा उतरने में असफलता पाई है, न कि कश्मीर ने भारत की
कपिल काक

370 पर सरकार के फैसले के खिलाफ SC पहुॅंचे पूर्व एयर वाइस मार्शल कपिल काक, कविता कृष्णन के लीक ईमेल में था नाम

वामपंथी एक्टिविस्ट कविता कृष्णन ने सोशल मीडिया में वायरल हुए अपने लीक ईमेल में भी कपिल काक, जस्टिस शाह के बारे में बात की है। लीक मेल में जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 से मिला विशेष दर्जा हटने के विरोध की रणनीति का ब्यौरा मौजूद है।
जनसंख्या नियंत्रण

‘धर्मांध मुस्लिम ‘हम 2, हमारे 25′ की मानसिकता से बाहर निकलने को तैयार ही नहीं’

“मुस्लिम समाज में एक से अधिक पत्नी रखने की धार्मिक ‘छूट’ है। इसलिए ‘हम पाँच हमारे पच्चीस’ की जनसंख्या बढ़ाने वाली जो फैक्ट्री शुरू थी, उस फैक्ट्री पर ‘तालाबंदी’ घोषित कर दी गई।”

कश्मीर पर The Wire की कवरेज घटिया हिन्दूफ़ोबिक प्रोपेगंडा के अलावा कुछ नहीं है

वायर की पूरी कश्मीर रिपोर्टिंग केवल और केवल झूठ और प्रोपेगंडा पर ही आधारित है। यही नहीं, इसका मकसद भी केवल भारत की बुराई नहीं, बल्कि 'हिन्दू फ़ासीवाद', 'डरा हुआ मुसलमान' के दुष्प्रचार से हिन्दुओं को बदनाम करने के साथ दबाए रखना, और 'इस्लाम खतरे में है' के हौव्वे को भड़काकर जिहाद को बढ़ावा देना है।
राम मंदिर

राम मंदिर के लिए हलचल तेज़: ‘पत्थर तराशने के काम में तेज़ी, राजस्थान से पहुँचेंगे कारीगर’

"जब से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तेज हुई है, राम भक्त भी उत्साह में हैं। मंदिर के लिए नक्काशीदार पत्थर की शीट्स और खम्भों की सफाई चालू है। पत्थरों को तेजी से तराशने का फैसला अयोध्या और अन्य स्थानों के संतों के सुझावों के अनुसार होगा और इस सम्बन्ध में बातचीत चालू है।"
आलिया अब्दुल्ला

खुश हूँ कि 370 के विरोध में कश्मीरी लड़के सड़क पर नहीं उतरे, हमारे पास और रास्ता है: शेख अब्दुल्ला की पोती

आलिया अब्दुल्ला ने बोलने के संवैधानिक अधिकार को रेखांकित करते हुए कहा कि सरकार को घाटी के राजनेताओं से अपनी भाषा बोलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए और उनके (घाटी के नेताओं) विचारों का सम्मान करना चाहिए।

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

82,036फैंसलाइक करें
11,531फॉलोवर्सफॉलो करें
89,260सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

शेयर करें, मदद करें: