Wednesday, October 20, 2021
Homeदेश-समाजदेश के सबसे संवेदनशील अयोध्या मामले पर एक बार फिर टली सुनवाई, 10 जनवरी...

देश के सबसे संवेदनशील अयोध्या मामले पर एक बार फिर टली सुनवाई, 10 जनवरी को नई पीठ करेगी फैसला

देश के सबसे संवेदनशील राम जन्मभूमि मामले पर बढ़ते विवादों में दायर की गई अपीलों पर आज सुनवाई एक बार और टाल दी गई है। इस मामले पर अब 10 जनवरी को सुनवाई होगी। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ ने आज (4 जनवरी 2019, शुक्रवार) बताया कि आगे की सुनवाई नई पीठ द्वारा की जाएगी।

आपको बता दें कि इस मामले पर पहले पूर्व चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा की तीन अध्यक्षता वाली पीठ सुनवाई कर रही थी। जिसकी वजह से इस विवाद पर दो सदस्यों की बेंच विस्तार से सुनवाई नहीं कर सकती है, इसलिए इस मुद्दे पर तीन या फिर उससे अधिक जजों की बेंच ही सुनवाई करेगी। ये सुनवाई इलाहाबाद हाइकोर्ट के 30 सिंतबर 2010 के फैसले के खिलाफ दायर की गई कुल 14 अपीलों पर होगी।

नवंबर 2018 में जनहित याचिका लगाकर वकील हरिनाथ राम ने इस मामले पर जल्द से जल्द हर रोज़ सुनवाई करने की मांग की थी। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावेड़कर ने भी इस बात को कहा था कि केंद्र सरकार चाहती है कि अयोध्या मामले पर रोज़ाना सुनवाई हो।

चुनाव नजदीक होने की वजह से राम मंदिर मामले को हर पार्टी और राजनैतिक संगठन द्वारा उछाला जा रहा है। केंद्र में एनडीए के सहयोगी शिवसेना का कहना है कि अगर 2019 के चुनावों से पहले राम मंदिर नहीं बनता है, तो ये जनता के साथ धोखा होगा। वहीं केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने अध्यादेश लाने का विरोध करते हुए कहा कि इस मामले में सभी पक्षों को सुप्रीम कोर्ट का ही आदेश मानना चाहिए।

इन सबसे अलग आपको बता दें कि 2019 का ये शुरुआती महीना, सुनवाई के लिए एक ऐसा समय है जब चुनाव की गर्मा-गर्मी में सरकार पर तमाम संगठनों द्वारा अध्यादेश लाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन हाल ही में एएनआई को दिए इंटरव्यू में मोदी ने इस बात को कहा है कि मंदिर से जुड़ा अध्यादेश लाया जाएगा या फिर नहीं, इस पर फैसला कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा। साथ ही उन्होंने कानूनी प्रक्रिया के धीमा चलने का कारण कांग्रेस को ठहराया। इस इंटरव्यू में प्रधानमंत्री मोदी ने जनता के मन मे उठ रहे सवालों और खुद पर लगाये जा रहे आरोपों पर भी खुलकर बात कही।

इलाहाबाद कोर्ट का पुराना फैसला

साल 2010 में 30 सिंतबर को इलाहाबाद के हाइकोर्ट में 3 सदस्यों की बेंच ने 2:1 के बहुमत से फैसला लिया था कि 2.77 एकड़ की ज़मीन को तीनों पक्षों में यानि सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला में बराबर-बराबर बांट दिया जाए। लेकिन हाई कोर्ट के इस फैसले को किसी भी पक्ष द्वारा नहीं स्वीकार गया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को लेकर चुनौती भी दी गई, जिसके कारण सुप्रीम कोर्ट ने इन फैसले पर 9 मई 2011 में रोक लगा दी। इलाहाबाद उच्च न्यायलय से निकलने के बाद ये मामला सर्वोच्च न्यायलय पर बीते 8 साल से है।

 

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘…पूरी पार्टी ही हैक कर ली है मोटा भाई ने’: सपा कार्यकर्ता ने मंच से किया BJP का प्रचार, लोगों ने लिए मजे; वीडियो...

SP के धरना प्रदर्शन का एक वीडियो क्लिप वायरल हो रहा है, जिसमें पार्टी का एक कार्यकर्ता अनजाने में बीजेपी के लिए प्रचार करता दिखाई दे रहा है।

स्मृति ईरानी ने फैबइंडिया के ट्रायल रूम से पकड़ा था हिडन कैमरा, ‘खादी’ के अवैध इस्तेमाल सहित कई मामले: ब्रांड का विवादों से है...

फैबइंडिया का विवादों से पुराना नाता रहा है। एक मामले में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने गोवा के कैंडोलिम में स्थित फैबइंडिया आउटलेट के ट्रायल रूम में हिडन कैमरा पकड़ा था।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
130,106FollowersFollow
411,000SubscribersSubscribe