Tuesday, January 26, 2021
Home राजनीति गुजरात के जिस टाटा प्लांट को राहुल गाँधी ने कोसा था, उनके नेता ने...

गुजरात के जिस टाटा प्लांट को राहुल गाँधी ने कोसा था, उनके नेता ने उसे बताया ‘विकास का मॉडल’

राहुल गाँधी की समझ के अनुसार गुजराती करदाताओं के 33,000 करोड़ रुपए मिट्टी में मिल गए क्योंकि बाज़ार में इसकी बिलकुल माँग नहीं थी और डीलर्स ने नैनो कार का ऑर्डर लेना ही बंद कर दिया था।

लगभग तीन साल पहले राहुल गाँधी ने गुजरात के सानंद स्थित टाटा मोटर्स प्लांट की आलोचना की थी। अब उनकी ही पार्टी के नेता उसकी प्रशंसा कर रहे हैं। उसे ‘विकास का मॉडल’ बता रहे हैं। लोकसभा में कॉन्ग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल की ममता सरकार पर हमला बोलते हुए की। 

कॉन्ग्रेस नेता ने सानंद प्लांट की सराहना करते हुए बताया कि कैसे ममता सिंगूर में ममता बनर्जी की राजनीति से पश्चिम बंगाल को नुकसान और गुजरात को फ़ायदा हुआ। हालॉंकि ऐसा करते हुए उन्होंने अपनी ही पार्टी के पूर्व अध्यक्ष को भी झुठला दिया।

अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “जिस तरह सिंगूर से टाटा मोटर्स के प्लांट हटाया गया, कॉन्ग्रेस उसका बिलकुल समर्थन नहीं करती। इस प्लांट को तब हटाया गया जब उसमें सरकार के 1000 करोड़ रुपए खर्च हो चुके थे। वहीं गुजरात के सानंद में बनाया गया प्लांट देश के लिए विकास का मॉडल है।” 

पश्चिम बंगाल में बुद्धदेब भट्टाचार्या की सरकार ने टाटा मोटर्स को ग्रीन फील्ड ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट (greenfield automobile manufacturing plant) स्थापित करने के लिए ज़मीन प्रदान की थी, जिससे वहाँ पर नैनो कार का निर्माण किया जा सके। उस दौरान विपक्ष यानी ममता बनर्जी की अगुवाई में किसानों ने उस प्लांट का जमकर विरोध किया। इस विरोध-प्रदर्शन की वजह से टाटा मोटर्स ने प्लांट गुजरात के सानंद में स्थापित करने का फैसला लिया। इसके बाद देश के कई राज्यों ने टाटा को प्लांट स्थापित करने के लिए अनुरोध किया। 

नवंबर 2017 में राहुल गाँधी ने इस प्लांट को कोसा था, उनके मुताबिक़ प्लांट असफल था क्योंकि नैनो कार कामयाब नहीं हुई। इसके अलावा राहुल गाँधी ने गुजरात सरकार पर आरोप भी लगाया था कि सरकार ने प्लांट को 33,000 करोड़ रुपए दिए थे लेकिन सड़क पर कोई नैनो कार नज़र नहीं आती। 

यानी राहुल गाँधी की समझ के अनुसार गुजराती करदाताओं के 33,000 करोड़ रुपए मिट्टी में मिल गए क्योंकि बाज़ार में इसकी बिलकुल माँग नहीं थी और डीलर्स ने नैनो कार का ऑर्डर लेना ही बंद कर दिया था। 

आँकड़ों को लेकर राहुल गाँधी की उदासीनता कभी छुपी नहीं रही है। इस बात को तथ्य में ढालते हुए उन्होंने झूठ ही परोसा। सच ये था कि गुजरात सरकार ने टाटा मोटर्स को कोई आर्थिक सहयोग नहीं दिया था, बल्कि कंपनी को 456.79 करोड़ रुपए का लोन दिया था। कंपनी को कम ब्याज दर वाला लोन बतौर प्रोत्साहन (incentive) दिया गया था। तमाम राज्य सरकारों ने टाटा मोटर्स को इस तरह के ऑफर देकर प्लांट स्थापित करने का निवेदन किया था।    

यह बात गलत नहीं है कि 2017 तक सड़कों पर नैनो कार लगभग नहीं के बराबर नज़र आती थीं। लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं था कि सानंद प्लांट असफल था। टाटा मोटर्स ने इंडिका और नैनो से लेकर एक लंबा सफ़र तय किया है। कमर्शियल पोर्टफोलियो के अलावा इन गाड़ियों की उपयोगिता और भी तमाम क्षेत्रों में है। प्लांट में टिअगो और टिगोर (Tiago and Tigor) जैसी गाड़ियों का निर्माण होता है, इसी प्लांट में टिगोर इलेक्ट्रिक कार का भी निर्माण किया जाता है। 

पिछले साल सितंबर में कंपनी ने बताया था कि प्लांट से लगभग 3 लाख टिअगो की बिक्री हो चुकी है। प्लांट उस वक्त भी कार निर्माण कर रहा था जब राहुल गाँधी ने इसे असफल बताया था। अब उनकी ही पार्टी के नेता ने प्लांट की सफलता को जाना और समझा है और इसे विकास का मॉडल बताया है।    

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

 

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

Video: किसानों के हमले में दीवार से एक-एक कर गिरते रहे पुलिसकर्मी, 109 घायल

वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़ द्वारा किए गए हमले से पुलिसकर्मी एक-एक कर लाल किले की दीवार से नीचे गिरते जा रहे हैं।

बिहारी-गुजराती-तमिल-कश्मीरी किसान हो तो डूब मरो… क्योंकि किसान सिर्फ पंजाबी-खालिस्तानी होते हैं, वही अन्नदाता हैं

वास्तविकता ये है कि आप इतने दिनों से एक ऐसी भीड़ के जमावड़े को किसान का आंदोलन कहते रहे। जिसकी परिभाषा वामपंथी मीडिया गिरोह और विपक्षियों ने गढ़ी और जिसका पूरा ड्राफ्ट एक साल पहले हुए शाहीन बाग मॉडल के आधार पर तैयार हुआ।

जर्मनी, आयरलैंड, स्पेन आदि में भी हो चुकी हैं ट्रैक्टर रैलियाँ, लेकिन दिल्ली वाला दंगा कहीं नहीं हुआ

दिल्ली में जो आज हुआ, स्पेन, आयरलैंड, और जर्मनी के किसानों ने वो नहीं किया, हालाँकि वो भी अन्नदाता ही थे और वो भी सरकार के खिलाफ अपनी माँग रख रहे थे।

किसानों के आंदोलन में खालिस्तानी कड़े और नारे का क्या काम?

सवाल उठता है कि जो लोग इसे पवित्र निशान साहिब बोल रहे हैं, वो ये बताएँ कि ये नारा और कड़ा किसका है? यह भी बताएँ कि एक किसान आंदोलन में मजहबी झंडा कहाँ से आया? उसे कैसे डिफेंड किया जाए कि तिरंगा फेंक कर मजहबी झंडा लगा दिया गया?

कैपिटल हिल के लिए छाती पीटने वाले दिल्ली के ‘दंगाइयों’ के लिए पीट रहे ताली: ट्रम्प की आलोचना करने वाले करेंगे राहुल-प्रियंका की निंदा?

कैपिटल हिल वाले अगर दंगाई थे तो दिल्ली के उपद्रवी संत कैसे हुए? ट्रम्प की आलोचना हो रही थी तो राहुल-प्रियंका की निंदा क्यों नहीं? ये दोहरा रवैया अपनाने वाले आज भी फेक न्यूज़ फैलाने में लगे हैं।

वीडियो: जब दंगाई को किसी ने लाल किला पर तिरंगा लगाने दिया, और उसने फेंक दिया!

लाल किले पर एक आदमी सिखों का झंडा चढ़ाने खम्बे पर चढ़ा। जब एक आदमी ने उसकी ओर तिरंगा बढ़ाया तो उसने बेहद अपमानजनक तरीके से तिरंगे को दूर फेंक दिया।

प्रचलित ख़बरें

दिल्ली में ‘किसानों’ ने किया कश्मीर वाला हाल: तलवार ले पुलिस को खदेड़ा, जगह-जगह तोड़फोड़, पुलिस वैन पर पथराव

दिल्ली में प्रदर्शनकारी पुलिस के वज्र वाहन पर चढ़ गए और वहाँ जम कर तोड़-फोड़ मचाई। 'किसानों' द्वारा तलवारें भी भाँजी गईं।

12 साल की लड़की का स्तन दबाया, महिला जज ने कहा – ‘नहीं है यौन शोषण’: बॉम्बे HC का मामला

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने शारीरिक संपर्क या ‘यौन शोषण के इरादे से किया गया शरीर से शरीर का स्पर्श’ (स्किन टू स्किन) के आधार पर...

महिला पुलिस कॉन्स्टेबल को जबरन घेर कर कोने में ले गए ‘अन्नदाता’, किया दुर्व्यवहार: एक अन्य जवान हुआ बेहोश

महिला पुलिस को किसान प्रदर्शनकारी चारों ओर से घेरे हुए थे। कोने में ले जाकर महिला कॉन्स्टेबल के साथ दुर्व्यवहार किया गया।

दलित लड़की की हत्या, गुप्तांग पर प्रहार, नग्न लाश… माँ-बाप-भाई ने ही मुआवजा के लिए रची साजिश: UP पुलिस ने खोली पोल

बाराबंकी में दलित युवती की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया। पुलिस ने बताया कि पिता, माँ और भाई ने ही मिल कर युवती की हत्या कर दी।

तेज रफ्तार ट्रैक्टर से मरा ‘किसान’, राजदीप ने कहा- पुलिस की गोली से हुई मौत, फिर ट्वीट किया डिलीट

राजदीप सरदेसाई ने तिरंगे में लिपटी मृतक की लाश की तस्वीर अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर करते हुए लिखा कि इसकी मौत पुलिस की गोली से हुई है।

राहुल गाँधी बोले- किसान मजबूत होते तो सेना की जरूरत नहीं होती… अनुवादक मोहम्मद इमरान बेहोश हो गए

इरोड में राहुल गाँधी के अंग्रेजी भाषण का तमिल में अनुवाद करने वाले प्रोफेसर मोहम्मद इमरान मंच पर ही बेहोश होकर गिर पड़े।
- विज्ञापन -

 

लालकिला में देर तक सहमें छिपे रहे 250 बच्चे, हिंसा के दौरान 109 पुलिसकर्मी घायल; 55 LNJP अस्पताल में भर्ती

दिल्ली में किसान ट्रैक्टर रैली का सबसे बुरा प्रभाव पुलिसकर्मियों पर पड़ा है। किसानों द्वारा की गई इस हिंसा में 109 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं, जिनमें से 1 की हालात गंभीर बताई जा रही है।

Video: किसानों के हमले में दीवार से एक-एक कर गिरते रहे पुलिसकर्मी, 109 घायल

वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़ द्वारा किए गए हमले से पुलिसकर्मी एक-एक कर लाल किले की दीवार से नीचे गिरते जा रहे हैं।

बिहारी-गुजराती-तमिल-कश्मीरी किसान हो तो डूब मरो… क्योंकि किसान सिर्फ पंजाबी-खालिस्तानी होते हैं, वही अन्नदाता हैं

वास्तविकता ये है कि आप इतने दिनों से एक ऐसी भीड़ के जमावड़े को किसान का आंदोलन कहते रहे। जिसकी परिभाषा वामपंथी मीडिया गिरोह और विपक्षियों ने गढ़ी और जिसका पूरा ड्राफ्ट एक साल पहले हुए शाहीन बाग मॉडल के आधार पर तैयार हुआ।

जर्मनी, आयरलैंड, स्पेन आदि में भी हो चुकी हैं ट्रैक्टर रैलियाँ, लेकिन दिल्ली वाला दंगा कहीं नहीं हुआ

दिल्ली में जो आज हुआ, स्पेन, आयरलैंड, और जर्मनी के किसानों ने वो नहीं किया, हालाँकि वो भी अन्नदाता ही थे और वो भी सरकार के खिलाफ अपनी माँग रख रहे थे।

किसानों के आंदोलन में खालिस्तानी कड़े और नारे का क्या काम?

सवाल उठता है कि जो लोग इसे पवित्र निशान साहिब बोल रहे हैं, वो ये बताएँ कि ये नारा और कड़ा किसका है? यह भी बताएँ कि एक किसान आंदोलन में मजहबी झंडा कहाँ से आया? उसे कैसे डिफेंड किया जाए कि तिरंगा फेंक कर मजहबी झंडा लगा दिया गया?

‘RSS नक्सलियों से भी ज्यादा खतरनाक, संघ समर्थक पैर छूकर गोली मार देते हैं’: कॉन्ग्रेसी सांसद और CM भूपेश बघेल का ज्ञान

कॉन्ग्रेस के सीएम भूपेश ने कहा कि आरएसएस के समर्थक पैर छूकर गोली मार देते हैं। महात्मा गाँधी की हत्या कैसे किया गया था? पहले पैर छुए फिर उनके सीने में गोली मारी।

कैपिटल हिल के लिए छाती पीटने वाले दिल्ली के ‘दंगाइयों’ के लिए पीट रहे ताली: ट्रम्प की आलोचना करने वाले करेंगे राहुल-प्रियंका की निंदा?

कैपिटल हिल वाले अगर दंगाई थे तो दिल्ली के उपद्रवी संत कैसे हुए? ट्रम्प की आलोचना हो रही थी तो राहुल-प्रियंका की निंदा क्यों नहीं? ये दोहरा रवैया अपनाने वाले आज भी फेक न्यूज़ फैलाने में लगे हैं।

‘लाल किले पर लहरा रहा खालिस्तान का झंडा- ऐतिहासिक पल’: ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग ने मनाया ‘ब्लैक डे’

गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर 'खालिस्तानी झंडा' फहराने को लेकर ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग (APML) काफी खुश है। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ द्वारा स्थापित पाकिस्तानी राजनीतिक पार्टी ने इसे 'ऐतिहासिक क्षण' बताया है।

वीडियो: जब दंगाई को किसी ने लाल किला पर तिरंगा लगाने दिया, और उसने फेंक दिया!

लाल किले पर एक आदमी सिखों का झंडा चढ़ाने खम्बे पर चढ़ा। जब एक आदमी ने उसकी ओर तिरंगा बढ़ाया तो उसने बेहद अपमानजनक तरीके से तिरंगे को दूर फेंक दिया।

देशी-विदेशी शराब से लदी मिली प्रदर्शनकारी किसानों की ट्रैक्टर: दिल्ली पुलिस ने किया सीज, देखें तस्वीरें

पुलिस ने शराब से भरे एक ट्रैक्टर को सीज किया है। सामने आए फोटो में देखा जा सकता है कि पूरा ट्रैक्टर शराब से भरा हुआ है। यानी कि शराब के नशे में ट्रैक्टरों को चलाया जा रहा है।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,695FollowersFollow
386,000SubscribersSubscribe