‘चाचा नेहरू मदरसा’ के अंदर मंदिर निर्माण संभव नहीं, सलमा अंसारी को AMU ने पढ़ाया नियम-कानून

सलमा अंसारी का मदरसा AMU से लीज पर ली गई ज़मीन पर है। पट्टा केवल 10 वर्षों के लिए था और AMU अधिकारियों की अनुमति के बिना किसी भी तरह का निर्माण संभव नहीं हो पाएगा।

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की पत्नी सलमा अंसारी हाल ही में तब चर्चा में आईं, जब उन्होंने घोषणा की थी कि वह ‘चाचा नेहरू मदरसा’ के अंदर एक मंदिर बनाना चाहती हैं, जिसे वह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय परिसर में चलाती हैं।

सलमा अंसारी ने घोषणा की थी कि उनके मदरसे में छात्र, जिनमें कथित रूप से हिंदू परिवारों के भी कई छात्र हैं, अक्सर प्रार्थना करने के लिए परिसर के बाहर जाते हैं, जो उनकी सुरक्षा के लिए ठीक नहीं रहता। अंसारी ने कहा था कि वह परिसर के अंदर एक हिंदू मंदिर और एक मस्जिद बनाने की योजना बनी रही हैं।

सलमा अंसारी की इस घोषणा पर AMU प्रशासन का ध्यान भी गया। अमर उजाला की ख़बर के अनुसार, AMU प्रशासन का कहना है कि सलमा अंसारी का मदरसा AMU से लीज पर ली गई ज़मीन पर है। पट्टा केवल 10 वर्षों के लिए था और AMU अधिकारियों की अनुमति के बिना किसी भी तरह का निर्माण संभव नहीं हो पाएगा।

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AMU अधिकारियों ने यह भी कहा कि सलमा अंसारी ने AMU प्रशासन को मंदिर निर्माण के लिए अभी तक कोई आधिकारिक पत्र नहीं लिखा है।

ख़बर में कहा गया कि भले ही सलमा अंसारी ने मंदिर निर्माण के लिए कागजी कार्रवाई शुरू कर दी हो, लेकिन AMU प्रशासन द्वारा मंदिर-मस्जिद निर्माण की अनुमति संभव नहीं है। इसकी वजह यह है कि साल 2017 के बाद शिक्षण संस्थानों में धार्मिक स्थल के निर्माण पर रोक लगा दी गई थी।

हालाँकि, सलमा अंसारी ने कथित तौर पर AMU अधिकारियों को मदरसा के लिए पट्टे की अवधि 10 साल से बढ़ाकर 30 साल करने के संदर्भ में पत्र लिखा है।

सलमा अंसारी की घोषणा के बाद, सपा विधायक ज़मीर उल्लाह ख़ान ने कहा था कि यह एक बुरा क़दम है और अगर मदरसा परिसर के अंदर एक मंदिर का निर्माण किया जाता है, तो अन्य मदरसों में मंदिरों का निर्माण करने की माँग उठ जाएगी।

AMU के विद्वान और धर्मशास्त्र के प्रोफेसर मुफ्ती ज़ाहिद ने कहा था कि मुसलमानों को मूर्ति पूजा का प्रचार करने की अनुमति नहीं है, केवल मदरसे के अंदर मंदिर बनाने की अनुमति दी जाए।

यहाँ यह उल्लेखनीय है कि सलमा अंसारी की घोषणा रॉ के पूर्व अधिकारियों के दावों के संदर्भ में संडे गार्डियन के लेख के तुरंत बाद आई। इस लेख में भारतीय खुफ़िया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग के एक पूर्व अधिकारी ने सनसनीखेज ख़ुलासा किया था कि पूर्व राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने 1990-92 के बीच ईरान में भारतीय राजदूत रहते तेहरान में रॉ के सेट-अप को उजागर कर वहाँ काम कर रहे अधिकारियों की ज़िंदगी को ख़तरे में डाल दिया था।

उन्होंने यह भी दावा किया है कि अंसारी ने आईबी के एडिशनल सेक्रेटरी रतन सहगल के साथ मिलकर 1992 बम धमाकों से पहले रॉ के गल्फ यूनिट को पंगु कर दिया था। (शायद वे 1993 के धमाकों की बात कर रहे थे, लेकिन भूल से ट्वीट में गलत साल का उल्लेख कर दिया है।)

द संडे गार्डियन में प्रकाशित ख़बर में दावा किया गया कि पूर्व रॉ अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तेहरान में राजदूत होने के दौरान, “रॉ के अभियानों को नुकसान पहुँचाने” को लेकर अंसारी के ख़िलाफ़ जाँच की माँग की थी।

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