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CM की कुर्सी के लिए अयोध्या को ठुकराया, अब राम मंदिर पर लहरिया लूट रहे उद्धव ठाकरे

उद्धव ठाकरे ने कहा है कि जिस साल वे अयोध्या गए उसके अगले ही साल नवंबर महीने में यह समस्या हल हो गई। इसके अलावा वह मुख्यमंत्री भी बन गए। उन्होंने कहा कि यह मेरी श्रद्धा और विश्वास है। इसे भले कोई अंधी श्रद्धा कह सकता है, लेकिन यही मेरी आस्था है और रहेगी।

अयोध्या में भव्य राम मंदिर का भूमि पूजन 5 अगस्त को होना है। एक तरफ स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और कॉन्ग्रेसी कठपुतली साकेत गोखले जैसे लोग हैं जो इसमें अड़ंगा डालने के लिए कभी मुहुर्त पर सवाल उठा रहे तो कभी अदालत का दरवाजा खटखटा रहे। दूसरी तरफ अरविंद केजरीवाल और उद्धव ठाकरे जैसे भी हैं जो इस आयोजन में किसी न किसी तरह अपनी हिस्सेदारी जता हिंदू भावनाओं पर सवार हो श्रेय लूटने की कोशिश में हैं।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शिवसेना के मुखपत्र सामना को एक इंटरव्यू दिया है। इसमें उन्होंने दावा किया है कि उनकी यात्रा ने राम मंदिर की समस्या का हल निकाला।

उन्होंने कहा कि जिस साल वे अयोध्या गए उसके अगले ही साल नवंबर महीने में यह समस्या हल हो गई। इसके अलावा वह मुख्यमंत्री भी बन गए। उन्होंने कहा कि यह मेरी श्रद्धा और विश्वास है। इसे भले कोई अंधी श्रद्धा कह सकता है, लेकिन यही मेरी आस्था है और रहेगी।

उद्धव ने कहा, “फिलहाल सभी कोरोना से जूझ रहे हैं, मैं ठीक हूँ और मैं अयोध्या ज़रूर जाऊँगा। भले आज मैं मुख्यमंत्री हूँ लेकिन जब मुख्यमंत्री नहीं था तब भी मुझे वहॉं पूरा मान-सम्मान मिला। शिवसेना प्रमुख और बाला साहेब का बेटा होने की हैसियत से।”

राम मंदिर आंदोलन से शिवसेना का नाता रहा है। दिवंगत बाला साहेब ठाकरे इसके लिए अपनी पूरी जिंदगी लगे रहे। लेकिन, उनकी विरासत को उद्धव ने मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए खुद अपने ही ​हाथों से तिलांजलि दी थी।
बात ज्यादा पुरानी नहीं है। बीते साल 24 नवंबर को उद्धव ठाकरे को अयोध्या जाना था। महीनों पहले उन्होंने इसका बकायदा ऐलान किया था। लेकिन ऐन वक्त पर यह दौरा रद्द कर दिया गया था।

औपचारिक तौर पर इसकी वजह सुरक्षा कारण बताया गया था, लेकिन कई मीडिया रिपोर्टों में स्पष्ट तौर पर कहा गया था कि ऐसा राजनीतिक वजहों से किया गया था।

असल में उस समय महाराष्ट्र में उद्धव भाजपा से नाता तोड़कर कॉन्ग्रेस और शिवसेना की मदद से सरकार बनाने की जुगत में लगे थे। उसके बाद से उद्धव के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार ने जिस तरह हिंदुओं से जुड़े मसलों पर अपना स्टैंड दिखाया है उससे जाहिर है कि यह दौर रद्द करने की वजह राजनैतिक मजबूरियॉं भी थी।

लेकिन, सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद अब जब अयोध्या में श्रीराम का भव्य मंदिर बनने की बेला आ पहुॅंची है तो वे इसमें अपनी हिस्सेदारी बताने पर लौट आए हैं।

सामना को दिए इंटरव्यू में उद्धव ने महाराष्ट्र और राजस्थान के राजनीतिक हालात पर भी चर्चा की। उद्धव ठाकरे ने कहा जिस किसी को मेरी सरकार गिरानी है, वह गिरा सकता है। मैं भी देख रहा हूँ, उन्हें इंतज़ार किसका है? सरकार भले तीन पहिए की (ऑटो रिक्शा) है, इसमें पीछे दो लोग बैठे हैं। लेकिन यह ग़रीबों की गाड़ी है और इसका स्टेयरिंग मेरे हाथ में है।

ऑपरेशन लोटस के महाराष्ट्र में सफल या असफल होने के सवाल पर उद्धव ने कहा, “मैं भविष्यवाणी कैसे कर सकता हूँ? जिसे करना है वह करके देखे, जोड़-तोड़ करके देखे। राजनीतिक दलों में ऐसा क्या नहीं मिलता है जो नेताओं को दूसरे दलों में जाने की ज़रूरत पड़ती है।” इस तरह के तमाम उदाहरण हैं, ऐसे ही तोड़-फोड़ की राजनीति होती है। ऐसा कौन सा विपक्षी नेता है जो दूसरे दल में जाकर शीर्ष पद पर पहुँचता है या मुख्यमंत्री बनता है। सभी ने केवल ‘इस्तेमाल करके फेंक दो नीति अपनाई है।’

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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