Sunday, July 25, 2021
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UP के बाराबंकी में हटाई गई ‘पकरिया पेड़ वाली’ मजार, रात में ही प्रशासन ने समतल कर दी जमीन

बाराबंकी के मुंशीगंज बाजार में सड़क के बीचों-बीच स्थित सालों पुराने 'पकरिया पेड़ वाली' मजार को हटा कर कहीं और शिफ्ट कर दिया गया। प्रशासन ने एक ही रात में...

उत्तर प्रदेश में सड़क का अतिक्रमण कर बनाए गए धार्मिक स्थानों को हटाने के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार सख्त नज़र आ रही है। इसी क्रम में बाराबंकी के फतेहपुर कस्बे के मुख्य मार्ग और मुंशीगंज बाजार में सड़क के बीचों-बीच स्थित सालों पुराने ‘पकरिया पेड़ वाली’ मजार को हटा कर कहीं और शिफ्ट कर दिया गया। प्रशासन ने शनिवार (मार्च 13, 2021) की रात ये कार्यवाही की।

इससे पहले वहाँ के स्थानीय लोगों और प्रबुद्ध जनों को भरोसे में लिया गया। उसे बातचीत की गई। ये पूरी प्रक्रिया देर रात की गई, ताकि कोई तनाव न उत्पन्न हो। शिफ्टिंग को लेकर SDM और CO की संयुक्त अध्यक्षता में कोतवाली परिसर में सभासदों, व्यापारियों व गणमान्य नागरिकों के साथ बैठक भी हुई। SDM पंकज सिंह ने बताया कि सरकार द्वारा सार्वजनिक स्थलों व रास्तों से ऐसे स्थान व अतिक्रमण हटाए जाने का निर्देश है।

स्थानीय लोगों ने भी कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए मजार और पेड़ को हटा कर कहीं और शिफ्ट किए जाने से उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। दरअसल, देवा से महादेवा व तराई क्षेत्रों को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर पेड़ व मजार होने से इसकी दोनों तरफ सड़क संकरी हो गई थी। 80 साल पुराना पेड़ भी एक तरफ झुक चुका था। इस कारण वहाँ आए दिन ट्रैफिक जाम लगता था और लोगों को आवागमन में दिक्कत होती थी।

पेड़ की टहनियाँ आसपास बने दुकानों और घरों पर फ़ैल गई थीं, जिससे उन्हें नुकसान हो रहा था। इस पेड़ के गिरने से आसपास के मकान ध्वस्त भी हो सकते थे। वन विभाग, पीडब्ल्यूडी व ईओ नगर पंचायत पेड़ की आयु पूरी होने व जनहित में इसे तत्काल हटाने की रिपोर्ट प्रशासन को पहले ही सौंप चुके थे। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मजार को स्थानीय ईदगाह मैदान में रखा गया। वहीं मुस्लिम समाज के कुछ लोगों ने इसका विरोध भी किया।

यूपी में सार्वजनिक सड़कों पर एक जनवरी 2011 या इसके बाद हुए धार्मिक निर्माण हटाए जाएँगे। हाई कोर्ट के आदेश पर गृह विभाग की ओर ये निर्देश जारी किए गए थे। गृह विभाग की ओर से कहा गया है कि अतिक्रमण होने पर संबंधित जिला अधिकारी ही दोषी माना जाएगा। यूपी सरकार का दावा है कि 44 विकास योजनाओं को लागू करके राज्य देश में अग्रणी स्थान पर है। चार वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था 10.90 लाख से बढ़कर 21.73 लाख करोड़ रुपए हो गई है। 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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