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बिहार में शराब से मर गए 14, सवाल पर तू-तड़ाक करने लगे CM नीतीश कुमार: RJD विधायक ने कहा- शराबबंदी मानसिक दिवालियापन

मुख्यमंत्री के इस व्यवहार से भाजपा विधायकों में काफी नाराजगी है। उन्होंने नीतीश कुमार से माफी की माँग की है। भाजपा ने सीएम नीतीश के बयान को अमर्यादित करार देते हुए जमकर नारेबाजी की और नीतीश कुमार से इस्तीफा भी माँगा।

बिहार के छपरा में ज़हरीली शराब पीने से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है। शराबबंदी वाले बिहार में ज़हरीली शराब से हुई मौत को लेकर विधानसभा में जब सीएम नीतीश कुमार से सवाल हुआ तो नीतीश अपना आपा खो बैठे। इतना ही नहीं नीतीश तुम-तड़ाक पर उतर आए। उन्होंने भाजपा विधायकों को शराबी भी कहा और सदन छोड़कर चले गए।

दरअसल, बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय कुमार सिन्हा ने छपरा में ज़हरीली शराब के कारण हुई मौतों का मुद्दा उठाया। उन्होंने ज़हरीली शराब से हुई मौतों पर सरकार की शराबबंदी नीति को जिम्मेदार ठहराया। इसके बाद मुख्यमंत्री अपना आपा खो बैठे और विपक्ष के नेता के साथ बदसलूकी करने लगे। गुस्से में लाल नीतीश ने कहा, “क्या हो गया, ए… चुप हो जाओ। तुम (भाजपा) लोग गंदा काम कर रहे हो। सबको भगाओ यहाँ से। अब तो बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। तुम लोग शराबी हो गए हो। अब टॉलरेट नहीं किया जाएगा। तुम लोग पूरे बिहार में गंदा काम कर रहे हो। पहले क्या बोलते थे, अगर नहीं संभले तो काफी बुरा हो जाएगा। तुम लोग शराब के पक्ष में हो गए।”

नीतीश कुमार ने आगे कहा, “तुम लोग (भाजपा के विधायक) गिर गए हो, कितना इज्जत दिया तुम लोगों को, लेकिन तुम क्या कर रहे हो, तुम लोग अपने आप को बर्बाद कर रहे हो। सभा में जारी शोर-शराबे के बीच सीएम नीतीश कुमार गुस्से में तमतमाए नजर आए।”

मुख्यमंत्री के इस व्यवहार से भाजपा विधायकों में काफी नाराजगी है। उन्होंने नीतीश कुमार से माफी की माँग की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भाजपा ने सीएम नीतीश के बयान को अमर्यादित करार देते हुए जमकर नारेबाजी की और नीतीश कुमार से इस्तीफा भी माँगा। हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई।

बिहार में भले ही नीतीश कुमार राजद के साथ मिलकर सरकार चला रहे हैं लेकिन शराबबंदी को लेकर जदयू और राजद एकमत नहीं हैं। राजद विधायक और पूर्व मंत्री सुधाकर सिंह ने सीएम नीतीश कुमार को मानसिक दिवालियापन से ग्रसित बताया। सुधाकर सिंह ने कहा कि किसी भी खाद्य पदार्थ या पेय पदार्थ पर प्रतिबंध लगाना मानसिक दिवालियापन है। प्रतिबंध के स्थान पर जागरूकता फैलाई जानी चाहिए। लोगों को यह समझाया जाना चाहिए कि शराब का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

बता दें कि शराबबंदी वाले बिहार के छपरा में जहरीली शराब पीने से अब तक 14 लोगों की मौत हो गई है। इसमें सबसे अधिक मौतें मसरख में हुई है। ज़हरीली शराब से मसरख में 10 अमनौर में तीन और मढ़ौरा में एक शख्स की जान चली गई।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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