आदिवासियों को गोली से मारा जा सकेगा: विवादित बयान के लिए राहुल गाँधी को लीगल नोटिस

जैसे-जैसे चुनाव नतीजों के दिन नज़दीक आ रहे हैं कॉन्ग्रेस अध्यक्ष की ऐसी बचकानी हरकतें दिन पर दिन और भी खुलकर सामने आने लगी हैं। उनके भाषणों में...

राहुल गाँधी की बेलगाम बयानबाजियों को रोकने के लिए भाजपा के उपाध्यक्ष प्रभात झा ने उन्हें हाल ही में दो लीगल नोटिस भेजे हैं। बीते दिनों राहुल ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को ‘हत्या का आरोपित’ बताया था और अब उन्होंने प्रधानमंत्री पर इल्ज़ाम मढ़ते हुए कहा है कि उन्होंने आदिवासियों के लिए ऐसा कानून बनाया है जिसमें लिखा है कि आदिवासियों को गोली से मारा जा सकेगा।

चुनावी रैलियों में लोगों से ‘चौकीदार चोर है’ जैसे नारे दिलवाने के बाद अब राहुल गाँधी निराधार बातों पर उतर आए हैं। जिसके कारण पार्टी उपाध्यक्ष को कानून की ओर रुख करना पड़ा। मध्य प्रदेश के जबलपुर में रैली के दौरान बोलते हुए राहुल ने हाल ही में अमित शाह को ‘हत्या का आरोपित’ कहा था। जिस पर प्रभात झा ने कहा कि अमित शाह पर इस तरह का इल्जाम सीधे एक राष्ट्रीय पार्टी (BJP) पर निशाना साधना है, जिसके 11 करोड़ सदस्य हैं, जिनमें से एक देश के प्रधानमंत्री भी हैं।

भाजपा के वरिष्ठ नेता ने राहुल के आरोपों पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की अदालत और सीबीआई तो अमित शाह को निर्दोष घोषित कर चुकी है। ऐसे में वो जानना चाहते हैं कि क्या राहुल गाँधी खुद को अदालत समझते हैं। राहुल की टिप्पणी पर नाराजगी जताते हुए प्रभात झा ने उनसे तत्काल माफ़ी माँगने की बात की थी। साथ ही कहा था कि अगर राहुल माफ़ी नहीं माँगते हैं तो वह कोर्ट में मानहानि का मुकदमा लड़ने के लिए तैयार रहें।

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अभी इस मामले में राहुल पर सवाल उठ ही रहे थे कि ‘जुमलेबाज’ राहुल गाँधी ने फिर से हवा में तीर चला दिया। सोशल मीडिया पर उनकी एक वीडियो शेयर की जा रही है। इसमें राहुल गाँधी प्रधानमंत्री पर आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने आदिवासियों के लिए एक नया कानून बनाया है, जिसमें लिखा है कि आदिवासियों को गोली से मारा जा सकेगा। इस वीडियो में राहुल दावा कर रहे हैं कि कानून में लिखा है, “आदिवासियों पर आक्रमण होगा।”

अब ऐसे में प्रभात झा ने राहुल गाँधी को एक बार फिर लीगल नोटिस भेजा है और साथ ही स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई कानून पास नहीं हुआ है। उन्होंने राहुल के इस बयान को आदिवासियों को बरगलाने की एक कोशिश करार दिया है। और कहा कि अगर ऐसा कानून पास हुआ तो फिर राहुल गाँधी या उनके 44 सांसद उस समय कहाँ थे, जब इसे पास किया जा रहा था।

जैसे-जैसे चुनाव नतीजों के दिन नज़दीक आ रहे हैं कॉन्ग्रेस अध्यक्ष की ऐसी बचकानी हरकतें दिन पर दिन और भी खुलकर सामने आने लगी हैं। उनके भाषणों को देखकर लग रहा है जैसे मतदान के आखिरी दिन तक वह लोगों को बरगलाने का काम करेंगे, क्या पता किधर से वोट मिल जाए। लेकिन बता दें कि उनके इन तमाम झूठ को सोशल मीडिया यूजर्स अच्छे से जान और समझ रहे हैं। चुनाव जीतने के लिए राहुल द्वारा अपनाए गए इन हथकंडो को यूजर्स ट्विटर पर खुद उजागर कर रहे हैं। लोगो की मानें तो राहुल गाँधी समय-समय पर मोदी से नफरत न करने की सिर्फ़ बातें करते आए हैं, असल में उनके चेहरे पर मोदी के लिए गुस्सा और नफरत साफ़ दिखाई देती है। कुछ लोग तो समाज में अराजकता फैलाने को और लोगों को भड़काने को ही उनका उद्देश्य बता रहे हैं।

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कमलेश तिवारी की हत्या के बाद एक आम हिन्दू की तरह, आपकी तरह- मैं भी गुस्से में हूँ और व्यथित हूँ। समाधान तलाश रहा हूँ। मेरे 2 सुझाव हैं। अगर आप चाहते हैं कि इस गुस्से का हिन्दुओं के लिए कोई सकारात्मक नतीजा निकले, मेरे इन सुझावों को समझें।

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