पूर्व कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री के आवास पर CBI की छापेमारी, ₹332 करोड़ के घोटाले का आरोप

पार्टी के मणिपुर के प्रवक्ता निंगोबम बूपेंडा मेइती ने बताया कि इससे पहले हमने नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2016 और नागा समझौते पर मोदी सरकार के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन किया था। इबोबी सिंह और कॉन्ग्रेस के विरोध को डराने के लिए यह छापेमारी स्पष्ट तौर पर एक राजनीतिक प्रतिशोध है।

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने शुक्रवार (22 नवंबर) की सुबह राज्य के इंफाल और थौबल में मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के आधिकारिक और निजी आवासों पर एक साथ छापे मारे।

CBI ने मणिपुर सरकार के अनुरोध पर पूर्व मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह और मणिपुर डेवलपमेंट सोसाइटी (MDS) के तत्कालीन अध्यक्ष वाई निंग्थम सिंह, रिटायर्ड IAS अधिकारी एवं MDS के पूर्व परियोजना निदेशक डी एस पूनिया, रिटायर्ड IAS अधिकारी एवं MDS के तत्कालीन अध्यक्ष पीसी लॉमुकंगा, रिटायर्ड IAS अधिकारी एवं MDS के तत्कालीन अध्यक्ष ओ. नबाकिशोर सिंह, MDS के प्रशासनिक अधिकारी एवं तत्कालीन अध्यक्ष एस रंजीत सिंह और अन्य के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है।

ख़बर के अनुसार, इन सभी पर यह आरोप लगाया गया कि 30 जून 2009 से 06 जुलाई 2017 तक मणिपुर डेवलपमेंट सोसाइटी के अध्यक्ष के रूप में काम करते हुए अभियुक्तों ने अन्य लोगों के साथ षड्यंत्र रचते हुए सरकारी धन क़रीब 518 करोड़ रुपए की कुल राशि में से लगभग 332 करोड़ रुपए का गबन किया है। यह रकम इन्हें विकास कार्य पूरे कराने के लिए दी गई थी।

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बता दें कि बाबूपारा में कॉन्ग्रेस विधायक के आधिकारिक आवास और थौबल अथोकपम माचा लईकाई में CBI के ठिकानों पर छापेमारी सुबह करीब 7.30 बजे शुरू हुई थी। पिछले विधानसभा चुनावों से पहले, भाजपा, जो अब राज्य के सत्तारूढ़ गठबंधन का नेतृत्व करती है, उसने घोटाले की जाँच कराने का वादा किया था।

CBI की इस छापेमारी पर कॉन्ग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दर्ज की। पार्टी के मणिपुर के प्रवक्ता निंगोबम बूपेंडा मेइती ने बताया कि CBI ने मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री श्री ओकराम इबोबी सिंह के इंफाल और मणिपुर के थाउबल के आधिकारिक और निजी आवासों पर छापा मारा, क्योंकि इससे पहले हमने नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2016 और नागा समझौते पर दिल्ली के जंतर-मंतर में मोदी सरकार के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन किया था। इबोबी सिंह और कॉन्ग्रेस के विरोध को डराने के लिए यह छापेमारी स्पष्ट तौर पर एक राजनीतिक प्रतिशोध है।

उन्होंने कहा,

“हमारी लोकतांत्रिक आवाज़ को दबाने की कोई भी कार्रवाई सफल नहीं रहेगी क्योंकि हम मणिपुर के लोगों के साथ मणिपुर की रक्षा और सुरक्षा के लिए संघर्ष करते हैं।”

नवंबर 2006 में, मणिपुर के मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के निवास स्थान पर पीपुल्स रिवोल्यूशनरी पार्टी ऑफ़ कंगलिपक (PREPAK) द्वारा हमला किया गया था।

2 सितंबर 2008 को मणिपुर राज्य में विद्रोहियों ने सोते समय इंफाल के बाबूपारा में श्री इबोबी के आधिकारिक निवास पर हमला किया। हमले में एक सुरक्षाकर्मी घायल हो गया था, लेकिन सिंह स्वस्थ थे। PREPAK के एक सदस्य ने फोन के माध्यम से हमले की ज़िम्मेदारी ली थी, और संकेत दिया कि यह हमला सिंह को मणिपुर में उग्रवाद को विफल करने के लिए नीतियों को रोकने की चेतावनी के रूप में था।

सितंबर 2006 में, विकीलीक्स द्वारा जारी गोपनीय केबल में, हेनरी वी जार्डिन, प्रधान अधिकारी, अमेरिकी वाणिज्य दूतावास जनरल, कोलकाता ने मुख्यमंत्री को “मिस्टर टेन पर्सेंट” के रूप में संदर्भित किया गया जो सरकारी परियोजनाओं और कॉन्ट्रैक्ट का पैसा लेता है।

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