छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार ने CBI से छीना राज्य में छापा मारने का अधिकार

छत्तीसगढ़ के अलावा आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल ने अपने राज्य में जाँच करने और रेड मारने को दी गई सहमति पिछले साल ही वापस ले ली थी।

पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी सीबीआई से अनुमति के बिना राज्या में रेड करने का अधिकार ले लिया गया है। इस बात की जानकारी अधिकारियों ने गुरूवार (जनवरी 10, 2019) को दी।

राज्य के मुख्यमंत्री ने यह निर्णय दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान अधिनियम 1946 की धारा 6 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए लिया गया है।

छत्तीसगढ़ से पहले आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में ये नियम पहले से ही लागू है। न्यूज़ 18 के अनुसार उन्हें ये जानकारी मुख्यमंत्री भूपेश बाघेल के सेक्रेट्री गौरव द्विवेदी से प्राप्त हुई है।

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एक अधिकारिक बयान का हवाला देते हुए अधिकारियों ने बताया है कि सीएम भूपेश बाघेल की नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और कार्मिक मंत्रालय (Ministry of Personnel) से सीबीआई को राज्य में कोई भी नया मामला दाखिल नहीं करने का निर्देश देने की माँग करते हुए पत्र लिखा है।

इसके साथ ही अधिकारियों का ये भी कहना है कि वर्ष 2001 में छत्तीसगढ़ सरकार ने सीबीआई को जांच करने की सामान्य सहमति दी थी। छत्तीसगढ़ के अलावा आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल ने अपने राज्य में जाँच करने और रेड मारने को दी गई सहमति पिछले साल ही वापस ले ली थी।

दिल्ली में कार्मिक मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि इस तरह सहमति वापस लेने से सीबीआई के पास पहले से चल रही जाँच के मामलों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

जानकारी के लिए बता दें कि इतना बड़ा कदम तभी उठाया गया है जब प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाले एक पैनल ने सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा को पद से हटाकर नागरिक रक्षा, अग्निशमन सेवा, और  होमगार्ड्स महानिदेशक के पद पर नियुक्त किया है। बता दें कि केंद्रीय सतर्कता आयोग की एक रिपोर्ट में आलोक पर भ्रष्टाचार के मामले पर आरोप लगा था।

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