Homeराजनीति...जरूरत पड़े तो शेहला राशिद को गिरफ्तार करो, कोर्ट ने दिया आदेश: भारतीय सेना...

…जरूरत पड़े तो शेहला राशिद को गिरफ्तार करो, कोर्ट ने दिया आदेश: भारतीय सेना को किया था बदनाम

शेहला हाल ही में कश्मीर को लेकर सनसनीखेज दावें कर सुर्खियों में आई थीं, जब उन्होंने कहा था कि आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद सेना लोगों को प्रताड़ित कर रही है। इस मामले को लेकर उनके ख़िलाफ़ राजद्रोह का मुक़दमा किया गया था।

समय-समय पर कश्मीर की आज़ादी का राग अलापने वाली जेएनयू की शेहला रशीद द्वारा भारतीय सेना के ख़िलाफ़ ट्वीट करने के मामले में शुक्रवार (15 नवंबर) को हुई सुनवाई में दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली पुलिस (Delhi Police) को शेहला राशिद को गिरफ़्तार करने की स्थिति में 10 दिन पूर्व गिरफ़्तारी नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। दरअसल, दिल्ली की अदालत ने आरोपित शेहला राशिद की अग्रिम ज़मानत याचिका पर यह फै़सला दिया है।

शेहला हाल ही में कश्मीर को लेकर सनसनीखेज दावें कर सुर्खियों में आई थीं, जब उन्होंने कहा था कि आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद सेना लोगों को प्रताड़ित कर रही है। इस मामले को लेकर उनके ख़िलाफ़ राजद्रोह का मुक़दमा किया गया था। इसके अलावा, उन्होंने कश्मीर की चुनावी राजनीति से अलग रहने का ऐलान भी किया था।

उन्होंने यह घोषणा ऐसे वक़्त में की थी जब जम्मू-कश्मीर में बीडीसी यानी ब्लॉक डेवलपमेंट कौंसिल के चुनाव होने थे। राजनीति से तौबा करने का दोष भी उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर ही मढ़ा। उन्होंने कहा था कि कश्मीर में जो कुछ हो रहा है उसे वह बर्दाश्त नहीं कर पा रहीं, इसलिए चुनावी राजनीति से दूर रहने का फ़ैसला किया है। इसकी जानकारी उन्होंने ट्वीट कर दी थी।

ग़ौरतलब है कि शेहला ने इस साल की शुरुआत में पूर्व आईएएस और जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट (जेकेपीएम) के नेता शाह फैसल की पार्टी भी ज्वाइन की थी। लेकिन, केंद्र सरकार ने 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया। इसके बाद से आतंकवाद की दुकान बंद होने के गम में देशभर के वामपंथी गिरोह ने तमाम तरीकों से छाती कूटकर कर अपना गुस्सा ज़ाहिर किया।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

100 नाराज़ ≠ 100 वोट: भारतीय राजनीति में सिर्फ़ ‘नाराज़गी’ का फ़ैक्टर कभी निर्णायक क्यों नहीं रहा

SC/ST Act, आरक्षण, Caste census, सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की राजनीति जैसे मुद्दे निश्चित रूप से सवर्णों में असंतोष पैदा कर सकते हैं। इन प्रश्नों को खारिज करना भी राजनीतिक मूर्खता होगी।

12 वर्ष पहले गोरखनाथ पीठ के पीठाधीश्वर, फिर देश के सबसे बड़े सूबे के CM: जनता तक पहुँच और समस्याओं पर तत्काल प्रतिक्रिया –...

योगी आदित्यनाथ की गोरखनाथ पीठाधीश्वर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक की यात्रा, विरासत को आगे बढ़ाने से लेकर विकसित होते UP की पूरी कहानी।
- विज्ञापन -