Tuesday, July 27, 2021
Homeराजनीतिकॉन्ग्रेस ने बहुत दुःख दिया मेरे बेटे को, फिर से गठबंधन नहीं: देवेगौड़ा

कॉन्ग्रेस ने बहुत दुःख दिया मेरे बेटे को, फिर से गठबंधन नहीं: देवेगौड़ा

"गठबंधन सरकार के मुखिया रहे एचडी कुमारास्वामी ने साफ कर दिया है कि हम सभी 15 सीटों पर लड़ना चाहते हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस के साथ जो भुगता, वह फिर से वही नहीं बर्दाश्त करना चाहते।"

पूर्व प्रधानमंत्री और जनता दल (सेक्युलर) के अध्यक्ष एचडी देवेगौड़ा ने शनिवार को अपनी पार्टी का स्टैंड साफ करते हुए कॉन्ग्रेस के साथ कर्नाटक के आगामी विधानसभा उपचुनावों में गठबंधन की संभावना से साफ़ इंकार किया है। उन्होंने कहा कि 21 अक्टूबर को शुरू हो रहे उपचुनावों में जद(एस) अकेले मैदान में होगी। 15 विधायकों के कुमारास्वामी सरकार से समर्थन वापसी के लिए सदस्यता से इस्तीफे, और उसके बाद हुए सत्ता परिवर्तन के पश्चात यह उपचुनाव हो रहे हैं। हालाँकि देवेगौड़ा ने सभी 15 सीटों पर अपने प्रत्याशियों के चुनाव लड़ने का दावा तो किया, लेकिन भाजपा के साथ के साथ गठबंधन की संभावना पर कोई टिप्पणी ही नहीं की।

‘बर्दाश्त नहीं होता अब…’

देवेगौड़ा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “गठबंधन सरकार के मुखिया रहे एचडी कुमारास्वामी ने साफ कर दिया है कि हम सभी 15 सीटों पर लड़ना चाहते हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस के साथ जो भुगता, वह फिर से वही नहीं बर्दाश्त करना चाहते।” देवेगौड़ा ने कहा कि रविवार (22 सितंबर) को पार्टी के नेता मिल रहे हैं। तभी आगे की रणनीति पूरी तरह तय होगी

’14 महीनों से रो रहे हैं 30 जिलों के पार्टी कार्यकर्ता’

पार्टी काडर में कॉन्ग्रेस से गठबंधन को लेकर नाराज़गी का भी देवेगौड़ा ने ज़िक्र किया। दावा किया कि वे राज्य के 30 जिलों के कार्यकर्ताओं से मिले, और सभी ने भाजपा-कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन से मना किया। 14 महीने से उनका दुःख अकल्पनीय है। 21 अक्टूबर को होने वाले चुनावों की मतगणना कर 24 अक्टूबर को ही चुनाव परिणाम घोषित कर दिए जाएँगे।

मालूम हो कि जुलाई अंत में कर्नाटक विधानसभा में मुख्यमंत्री येदियुरप्पा सरकार को बहुमत प्राप्त हो गया था। 15 विधायकों के इस्तीफे के बाद 207 विधायकों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 104 का आँकड़ा चाहिए था और बीजेपी के पास 105 विधायक थे। इसीलिए विपक्ष ने मत विभाजन की माँग तक नहीं की थी। इसके पहले कॉन्ग्रेस-जद (एस) गठबंधन सरकार के मंगलवार को शक्ति-परीक्षण में असफल रहा था

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘अपनी मौत के लिए दानिश सिद्दीकी खुद जिम्मेदार, नहीं माँगेंगे माफ़ी, वो दुश्मन की टैंक पर था’: ‘दैनिक भास्कर’ से बोला तालिबान

तालिबान प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि दानिश सिद्दीकी का शव युद्धक्षेत्र में पड़ा था, जिसकी बाद में पहचान हुई तो रेडक्रॉस के हवाले किया गया।

विवाद की जड़ में अंग्रेज, हिंसा के पीछे बांग्लादेशी घुसपैठिए? असम-मिजोरम के बीच झड़प के बारे में जानें सब कुछ

असल में असम से ही कभी मिजोरम अलग हुआ था। तभी से दोनों राज्यों के बीच सीमा-विवाद चल रहा है। इस विवाद की जड़ें अंग्रेजों के काल में हैं।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
111,381FollowersFollow
393,000SubscribersSubscribe