देवेंद्र फडणवीस ने BJP सांसद के ₹40,000 करोड़ केंद्र को लौटाने के दावे को किया ख़ारिज

"आप सभी जानते हैं कि हाल ही में महाराष्ट्र में सिर्फ़ 80 घंटे के लिए हमारे नेता मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन जल्द ही फडणवीस ने इस्तीफ़ा दे दिया। हमें यह नाटक क्यों करना पड़ा? क्या हमें पता नहीं है। यह जानने के बावजूद कि हमारे पास बहुमत नहीं था, वह सीएम क्यों बने? यह एक आम सवाल है जो हर एक ज़ुबान पर है।"

महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेंद्र फड़नवीस ने भाजपा सांसद अनंत कुमार हेगड़े के इस दावे का खंडन किया है जिसमें उन्होंने राज्य के सीएम के रूप में अपने 4 दिन के कार्यकाल के दौरान केंद्र को 40,000 करोड़ रुपए वापस किए थे। उन्होंने कहा कि 26 नवंबर को इस्तीफ़ा देने से पहले उन्होंने ऐसा कोई बड़ा फ़ैसला नहीं लिया

इससे पहले अनंत कुमार हेगड़े ने एक सनसनीखेज दावा किया था कि देवेंद्र फडणवीस ने बहुमत न होने के बावजूद सीएम के रूप में शपथ ली ताकि 40,000 करोड़ रुपए का फंड केंद्र सरकार को हस्तांतरित किया जा सके, जिसका मक़सद उस धन को अगली सरकार (शिवसेना-एनसीपी-कॉन्ग्रेस) द्वारा उसके दुरुपयोग से बचाना था। अक्टूबर में विधानसभा चुनाव के बाद एक महीने तक महाराष्ट्र में चले राजनीतिक ड्रामे को एक नया मोड़ देते हुए हेगड़े ने कहा था, “आप सभी जानते हैं कि हाल ही में महाराष्ट्र में सिर्फ़ 80 घंटे के लिए हमारे नेता मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन जल्द ही फडणवीस ने इस्तीफ़ा दे दिया। हमें यह नाटक क्यों करना पड़ा? क्या हमें पता नहीं है- यह जानने के बावजूद कि हमारे पास बहुमत नहीं था, वह सीएम क्यों बने? यह एक आम सवाल है जो हर एक ज़ुबान पर है।”

इसके बाद आगे बढ़ते हुए उन्होंने कहा, “लगभग 40,000 करोड़ रुपए से अधिक रुपया सीएम के नियंत्रण में था। यदि एनसीपी, कॉन्ग्रेस और शिवसेना निश्चित रूप से सत्ता में आए तो 40,000 करोड़ रुपए विकास कार्यों के नाम पर दुरुपयोग के लिए नहीं दिए जाएँगे। यह पूरी तरह से पहले से ही योजनाबद्ध था। एक बार जब हमें पता चला, तो यह निर्णय लिया गया कि एक बड़ा नाटक आवश्यक है। इसलिए, समायोजन किया गया था और शपथ ली गई थी, शपथ के बाद 15 घंटे के भीतर फड़नवीस ने व्यवस्थित रूप से यह सुनिश्चित किया कि धन जहाँ पहुँचाना था उसे वहाँ सुरक्षित कर दिया गया।” इसके आगे उन्होंने कहा, “अगर इसे यहाँ रखा गया होता, तो आप समझ सकते हैं कि अगला मुख्यमंत्री क्या कर सकता था।”

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हेगड़े ने शनिवार को कर्नाटक के येलापुर में उपचुनाव के लिए एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ये टिप्पणियाँ की थी। लेकिन, आज देवेंद्र फडणवीस ने राष्ट्रीय मीडिया द्वारा इसकी सूचना दिए जाने के बाद इस दावे को पूरी तरह से ख़ारिज कर दिया।

फडणवीस ने कहा, “ऐसी कोई बात नहीं हुई। ये पूरी तरह से झूठे दावे हैं। जब मैं पद पर था, मैंने कोई नीतिगत निर्णय नहीं लिया। इस तरह की कोई बात नहीं हुई थी। सरकार का वित्त विभाग ऐसे दावों की जाँच कर सकता है।” उन्होंने कहा कि जो लोग राज्य और केंद्र सरकारों की लेखा प्रणालियों को समझते हैं, वे समझ जाएँगे कि इस तरह से धन का हस्तांतरण नहीं हो सकता।

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