Homeराजनीतिबुरहान वानी 'साहब'... आतंकी को सम्मान देने के लिए J&K के पूर्व CM उमर...

बुरहान वानी ‘साहब’… आतंकी को सम्मान देने के लिए J&K के पूर्व CM उमर अब्दुल्ला को पड़ रही लताड़

इससे पहले उमर अब्दुल्ला ने बुरहान वानी को कश्मीर के असंतुष्ट तबके का मसीहा बताया था। उन्होंने कहा था कि बुरहान इस समूह का आइकॉन...

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मारे गए आतंकी बुरहान वानी को ‘साहब’ कह कर संबोधित किया है। आतंकी को इज्ज़त देने के लिए उमर अब्दुल्ला की ख़ासी आलोचना हो रही है। अब्दुल्ला ने एक ब्रिटिश मीडिया एजेंसी से बात करते हुए इस शब्द का इस्तेमाल किया। दरअसल, उनसे सवाल पूछा गया था कि हाल ही में आतंकी जाकिर मूसा को मारे जाने पर वो क्या कहना चाहेंगे, इसके बाद अब्दुल्ला ने याद दिलाया कि बुरहान वानी ‘साहब’ के मारे जाने के बाद कश्मीर में हालात बदतर हो गए थे।

इससे पहले उमर अब्दुल्ला ने बुरहान वानी को कश्मीर के असंतुष्ट तबके का मसीहा बताया था। उन्होंने कहा था कि वानी इस समूह का आइकॉन बन चुका है। अब उन्होंने विदेशी मीडिया से बात करते हुए एक आतंकी का नाम सम्मान से लिया है। बता दें कि बुरहान की मौत के बाद जाकिर मूसा उसके आतंकी संगठन का प्रमुख सरगना बना था, भारतीय सेना ने उसे भी मार गिराया। मूसा ने कश्मीर में अल-कायदा से जुड़ा संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद शुरू किया था।

सेना ने अब बुरहान वानी के आतंकी संगठन का पूरी तरह सफाया कर दिया है। उसका आखिरी सदस्य भी मारा गया है। 2017 में हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहानी वानी की साथी आतंकियों के साथ एक फोटो वायरल हुई थी, जिसके बाद सेना ने एक-एक कर सबको निपटा दिया है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

विवादों में ‘कॉकरोचों’ का 6 जून का प्रदर्शन, दिपके ने माना- ‘नहीं ली प्रोटेस्ट की परमिशन’: समझें- SC का फैसला, 7 दिन वाला नियम...

CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन के बहाने समझिए जंतर-मंतर पर धरना देने की पूरी प्रक्रिया, दिल्ली पुलिस के नियम और सुप्रीम कोर्ट का रुख।

‘पहले मंदिर में नमाज पढ़ेंगे, फिर कहेंगे मस्जिद थी’: बुलंदशहर से भोजशाला तक, हिंदू पवित्र स्थलों पर दावों का कट्टरपंथियों का पैटर्न और लिबरल...

हिंदुओं के पवित्र स्थानों पर नमाज अदा करना भूल नहीं, सोची-समझी साजिश है। यदि कट्टरपंथियों का मन इतना ही साफ होता तो मंदिरों पर कब्जा नहीं करते।
- विज्ञापन -