Homeराजनीतिउत्तर प्रदेश में भाजपा के सर्वाधिक सवर्ण उम्मीदवार, बाकी पार्टियों ने काटे टिकट

उत्तर प्रदेश में भाजपा के सर्वाधिक सवर्ण उम्मीदवार, बाकी पार्टियों ने काटे टिकट

भाजपा ने उत्तर प्रदेश में पिछले चुनाव में 36 सवर्णों को टिकट देकर अपना उम्मीदवार बनाया था और इस बार भी भाजपा ने इतने ही सवर्णों को टिकट दिया है।

2019 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा को छोड़कर सभी पार्टियों ने सबसे कम सवर्णों को टिकट दिए हैं। सवर्णों के सबसे अधिक टिकट समाजवादी पार्टी ने काटे हैं। कॉन्ग्रेस ने भी पिछले चुनावों के मुकाबले अपने उम्मीदवारों में सवर्णों की संख्या घटा दी है।

नवभारत टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक भाजपा ने उत्तर प्रदेश में पिछले चुनावों में 36 सवर्णों को टिकट देकर अपना उम्मीदवार बनाया था और इस बार भी भाजपा ने इतने ही सवर्णों को टिकट दिया है। जबकि 2014 में सपा ने अपने 20 सवर्ण उम्मीदवार मैदान में उतारे थे लेकिन इस बार यह संख्या 6 रह गई है। इसका एक कारण बसपा के साथ हुए गठबंधन को भी बताया जा रहा है क्योंकि सपा को गठबंधन में 37 सीटें मिली हैं।

दूसरी ओर दलितों की पार्टी कही जाने वाली बसपा ने जातिगत समीकरणों को देखते हुए एक चौथाई सीट पर सवर्णों को टिकट देकर बड़ा दाव खेलने का प्रयास किया है। हालाँकि 2014 में 26 सवर्णों को टिकट देने वाली मायावती ने गठबंधन में 38 सीटों पर 10 सवर्णों को टिकट दिया है।

कॉन्ग्रेस की बात करें तो 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 34 टिकट सवर्ण कैंडिडेट को दिए थे लेकिन नतीजे उनके पक्ष में नहीं थे। साल 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी ने पुराने नतीजों को ध्यान में रखा और केवल 26 सवर्णों को ही टिकट देकर अपना उम्मीदवार बनाया।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘मेविस्तान’ बनाने का सपना, अलवर-भरतपुर में हिंसा और फिर गाँधी-नेहरू का हस्तक्षेप: जानिए मेवात के उस इतिहास की पूरी कहानी, जिसने बदल दिया इलाके...

मेविस्तान की माँग, 1933 का गोविंदगढ़ संघर्ष, 1947 का अलवर-भरतपुर घटनाक्रम और गाँधी-नेहरू के हस्तक्षेप से जुड़ी मेवात की पूरी कहानी जानिए।

59 करोड़ अकाउंट्स, लाखों करोड़ की कैपिटल और आखिरी व्यक्ति तक पहुँचता बैंकिंग सिस्टम… फिर क्यों जनधन योजना से सुभाष गर्ग को लगी मिर्ची?

सुभाष गर्ग ने जनधन योजना के 59 करोड़ खातों पर सवाल उठाए, जानिए जीरो बैलेंस, इनएक्टिव अकाउंट्स और DBT से जुड़ी पूरी कहानी।
- विज्ञापन -