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‘ममता की पुलिस की वजह से मर गया मेरा बेटा, डॉक्टर मदद करना चाहते थे’

मैंने उन्हें बताया कि मेरा बच्चा गंभीर हालत में है, मेरे पास सागर दत्ता कॉलेज से बेहतर इलाज के लिए कहीं और ले जाने के कागज़ात हैं। जूनियर डॉक्टरों ने अपनी ओर से भरसक प्रयास किया, हमारी सहायता करने की पूरी कोशिश की, वह रो रहे थे, लेकिन पुलिस ने हमें अंदर नहीं आने दिया।

पश्चिम बंगाल में चल रही डॉक्टरों की हड़ताल में अपने बेटे को खोने वाले अभिजित मलिक ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे की मौत की वजह स्थानीय पुलिस थी, जिसने उन्हें अस्पताल के अंदर नहीं जाने दिया। उन्होंने बताया कि जूनियर डॉक्टर उनके बेटे की मदद करना चाहते थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य के स्वास्थ्य विभाग को चार बार फ़ोन किया गया था लेकिन फोन किसी ने नहीं उठाया।

चाइल्ड स्पेशलिस्ट की तलाश में भटक रहे थे

अभिजित मलिक ने बताया कि वह सागर दत्ता अस्पताल से रेफर करने के कागज़ लिए-लिए चाइल्ड-स्पेशलिस्ट अस्पताल की तलाश में भटक रहे थे। 11 जून को पैदा हुए उनके नवजात बेटे को साँस लेने में समस्या थी। जब समस्या बहुत बढ़ गई तो 12 को सागर दत्ता अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें किसी शिशु विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाने की सलाह दी।

अभिजित बताते हैं कि वह अपने बच्चे को कई अस्पतालों में लेकर गए लेकिन हड़ताल के कारण कहीं भी उनके बेटे को भर्ती नहीं किया गया। अंततः इलाज के आभाव में उनके नवजात शिशु ने 13 जून को दम तोड़ दिया। उत्तर परगना में उन्होंने पत्रकारों को यह भी बताया कि राज्य के स्वास्थ्य विभाग में इस बाबत किया गया फ़ोन भी नहीं उठा।

“आरजी कर मेडिकल, चितरंजन में पुलिस ने हमें घुसने नहीं दिया। मैंने उन्हें बताया कि मेरा बच्चा गंभीर हालत में है, मेरे पास सागर दत्ता कॉलेज से बेहतर इलाज के लिए कहीं और ले जाने के कागज़ात हैं। जूनियर डॉक्टरों ने अपनी ओर से भरसक प्रयास किया, हमारी सहायता करने की पूरी कोशिश की, वह रो रहे थे, लेकिन पुलिस ने हमें अंदर नहीं आने दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को भी चार बार फ़ोन किया लेकिन किसी ने फ़ोन नहीं उठाया।”

दो डॉक्टरों की मॉब लिंचिंग के बाद से हड़ताल

पश्चिम बंगाल में एनआरएस अस्पताल में एक दूसरे मजहब के मरीज की हृदयघात से मृत्यु हो जाने के बाद उसके तीमारदारों द्वारा भीड़ जुटाकर जूनियर डॉक्टरों पर हमला बोल दिया गया था। दो डॉक्टरों को इतनी गंभीर चोटें आईं कि उन्हें आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। इसके बाद इसके विरोध में पहले तो एनआरएस के और फिर पूरे प्रदेश में जूनियर डॉक्टर बड़ी तादाद में हड़ताल पर चले गए हैं। डॉक्टरों के अनुसार उनकी बस इतनी माँग है कि ममता बनर्जी हमले के आरोपितों को तुरंत गिरफ़्तार करवाएँ और डॉक्टरों की अस्पताल में सुरक्षा सुनिश्चित करें।

इस हड़ताल के दौरान पश्चिम बंगाल के सरकारी अस्पताल के 700 से ज्यादा डॉक्टरों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। ऐसा उन्होंने हड़ताल कर रहे जूनियर डॉक्टरों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए किया। इससे पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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