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बिहार: नवादा सीट को लेकर फँसा पेंच, भाजपा के लिए गिरिराज सिंह के नाराज़ होने के मायने

फिलहाल लोजपा भी नवादा पर अपना दावा छोड़ने को तैयार नहीं है और गिरिराज सिंह भी पीछे नहीं हट रहे। उम्मीद है कि राजग जल्द ही इन मुद्दों को सुलझा कर सभी सीटों पर उम्मीदवारों के नामों की घोषणा जल्द करेगी।

कहते हैं कि उत्तर प्रदेश, बिहार की राजनीति पूरे भारत मे सबसे अलग है। शायद इसीलिए, केंद्र में सरकार बनाने में इन दोनों राज्यों का बड़ा ही अहम योगदान होता है। आम चुनावों के लिए ही भाजपा ने गुरुवार (मार्च 21, 2019) को लोकसभा की 250 सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है। भाजपा ने अभी तक बिहार की किसी सीट पर उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की। ऐसा कहा जा रहा है कि बिहार में सीटों की घोषणा राजग संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस बुला के करेगी क्योंकि बिहार में अभी कुछ सीटों पर मामला फँसा हुआ है।

भाजपा की कुछ सीटें जिन्हें लेकर मामला फँसा हुआ है, उनमें से एक सीट भाजपा के फायरब्रांड नेता, कट्टर हिंदुत्व के पक्षकार और 2014 चुनाव के पहले जब भाजपा दो गुटों (आडवाणी और मोदी) में बँटी हुई थी, तब मोदी को प्रधानमंत्री बनाने का खुलकर समर्थन करने वाले, बिहार की नवादा सीट से वर्तमान सांसद गिरिराज सिंह की है। मामला कुछ यूँ हुआ कि सीट बँटवारे के समय गिरिराज सिंह की नवादा सीट जो कि भाजपा की सुरक्षित सीट मानी जाती है, सहयोगी दल लोजपा के खाते में चली गई जहाँ से अभी मुंगेर सांसद वीणा देवी के लड़ने की संभावना है।

पार्टी गिरिराज सिंह को बेगूसराय से लड़ाना चाहती है जहाँ उनकी टक्कर वामपंथ के नए पोस्टर बॉय कन्हैया कुमार से होने की संभावना है। अब पेंच कुछ यूँ फँसा है कि गिरिराज सिंह अपनी सीट छोड़ने को तैयार नही है और वो नवादा से ही लड़ना चाहते हैं। उन्होंने मीडिया में ये बयान दिया, “लड़ूंगा तो नवादा से वरना नहीं लड़ूंगा।

असल में गिरिराज सिंह भूमिहार जाति से ताल्लुक रखते हैं, जो कि बिहार में मुख्यतः ज़मींदार वर्ग माना जाता है। इनका वोट शेयर लगभग 4.5% है लेकिन भूमिहार नेतृत्व के नाम पर अभी बिहार भाजपा में सिर्फ पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सीपी ठाकुर और गिरिराज सिंह बचे है। चूँकि 1990 से बिहार में कॉन्ग्रेस पार्टी के पतन के बाद से भूमिहार मुख्य तौर पर भाजपा के मतदाता रहे हैं और 2014 में भी मुख्यतः इनका वोट भाजपा को ही मिला था। फिर भी भाजपा ने सिर्फ एक भूमिहार नेता गिरिराज सिंह को टिकट दिया है इसलिए भाजपा इन्हें नाराज़ करके कोई रिस्क नहीं लेना चाहेगी।

फिलहाल लोजपा भी नवादा पर अपना दावा छोड़ने को तैयार नहीं है और गिरिराज सिंह भी पीछे नहीं हट रहे। हालाँकि गिरिराज सिंह ने एक और बयान में कहा है, “चुनाव लड़ूँ या नही, पार्टी की सेवा की है और करता रहूँगा।” उम्मीद है कि राजग जल्द ही इन मुद्दों को सुलझा कर सभी सीटों पर उम्मीदवारों के नामों की घोषणा जल्द करेगी।

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प्रणय राज
प्रणय राज
थोड़े खिलाड़ी और थोड़े अनारी लेकिन पूरे बिहारी.

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