Tuesday, June 18, 2024
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ऑनलाइन गेम की दुनिया पर अब सरकार की नजर: बन सकता है नया कानून, जुआ या स्किल… सबकी कसेगी नकेल

प्रधानमंत्री कार्यालय ने उस प्रपोजल को नकार दिया जिसमें केवल स्किल आधारित खेलों को नियंत्रित करने की बात थी। अब चाहे स्किल खेल हों या फिर कोई जुआ संबंधी खेल... सरकार द्वारा सब पर नजर रखा जा सकता है।

ऑनलाइन गेम्स के जरिए होने वाली कमाई पर अब सख्ती होने के आसार हैं। खबर है कि मोदी सरकार जल्द उन सभी ऑनलाइन खेलों को रेगुलेट करेगी जिनमें पैसा शामिल होता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार प्रधानमंत्री कार्यालय ने उस प्रपोजल को नकार दिया जिसमें केवल स्किल आधारित खेलों को नियंत्रित करने की बात थी। अब चाहे स्किल खेल हों या फिर कोई जुआ संबंधी खेल… सरकार द्वारा सब पर नजर रखा जा सकता है। रॉयटर्स की खबर में सरकारी दस्तावेज व तीन सूत्रों के आधार पर इस जानकारी का उल्लेख किया गया है।

बता दें कि ऑनलाइन गेमिंग को भारत में पिछले दिनों बहुत रफ्तार मिली है। ड्रीम 11 या मोबाइल प्रीमियर लीग को टाइगर ग्लोबल और सिकोइया कैपिटल का समर्थन मिला है। यही वजह है कि रिसर्च फर्म रेडसियर का अनुमान कहता है भारत में साल 2026 तक गेमिंग सेक्टर 56995 करोड़ (7 बिलियन डॉलर) का होने वाला है। 

कथिततौर पर भारत में एक पेनल को अगस्त में इस पर नियमन का मसौदा तैयार करने को कहा गया था। एक समिति बनाने को कहा गया था जो तय करे स्किल खेलों के लिए रजिस्ट्रेशन हो जबकि जुआ आधारित खेलों (जो भारत में प्रतिबंधित हैं) को राज्य सरकार की निगरानी में अलग से नियंत्रित किए जाने का उल्लेख था।

हालाँकि रॉयटर्स कहता है कि अक्टूबर में इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय की एक और मीटिंग में इस तरह के वर्गीकरण पर आपत्ति जताई गई और कहा गया कि वह हर तरह के गेमों पर नजर रखेंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक, नियम बनाने की कड़ी में 3 लोग मुख्य रूप से शामिल है। इनमें नई दिल्ली के दो सरकारी अधिकारी हैं जिन्होंने रॉयटर्स को बताया कि नियम संघीय प्रशासन को सभी प्रकार के खेलों के व्यापर निगरानी रखने की आजादी होगी जबकि राज्य सरकार को जुए वाले खेलों पर प्रतिबंध लगाने के अधिकार होंगे।

उल्लेखनीय है कि भारत में ऑनलाइन खेलों को लेकर सरकार की चिंता ऐसे समय में सामने आई है जब आज का युवा इनका आदी होता जा रहा है। न केवल इसके चलते वह अपना समय गवाते हैं बल्कि इससे उन्हें आर्थिक नुकसान भी होता है। कई जगह तो ऐसे खेलों के कारण सुसाइड के मामले भी आ चुके हैं।

24 जून 2021 को प्रधानमंत्री कार्यालय से ट्वीट में भी इसका जिक्र हुआ था। पीएमओ के ट्वीट में लिखा था, जितने भी ऑनलाइन या डिजिटल गेम्स आज मार्केट में उपलब्ध हैं, उनमें से अधिकतर का कॉन्सेप्ट भारतीय नहीं है। आप भी जानते हैं कि इसमें अनेक गेम्स के कॉन्सेप्ट या तो हिंसा को प्रमोट करते हैं या फिर मानसिक तनाव का कारण बनते हैं

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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