Sunday, August 1, 2021
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उत्तर भारत से पाकिस्तान तक ‘मुस्लिम पट्टी’ बनाने की साजिश, हरियाणा से लेकर बंगाल तक के इलाके शामिल: लेख में दावा

दरभंगा में बम ब्लास्ट, महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती पर हमला और अलकायदा के नेटवर्क का खुलासा भी पिछले कुछ दिनों में ही हुआ है। मालदा, कैराना और मेवात से हिन्दुओं से पलायन की खबरें नई नहीं हैं।

उत्तर भारत में एक ‘मुस्लिम पट्टी (Muslim Belt)’ बनाने की साजिश चल रही है। इस पट्टी में पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा जैसे राज्यों के इलाके होंगे जो पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़ा होगा। यह दावा ‘दैनिक जागर’ण में प्रकाशित एक लेख में किया गया है। इसे लिखा है बिहार के पूर्व विधान पार्षद हरेंद्र प्रताप ने। लेख में उन्होंने कहा है कि जहाँ देश में मुस्लिमों की जनसंख्या बढ़ती चली गई, वहीं बाकी मतावलंबियों की आबादी कम हुई है।

इसका कारण बताते हुए कहा कि अन्य मतों के लोग स्वतः दो बच्चों वाली नीति का पालन करते रहे हैं, जबकि मुस्लिम घुसपैठियों ने अपनी जनसंख्या बढ़ाने पर जोर दिया है। साथ ही उन्होंने इसका कारण बताते हुए कहा कि जहाँ अन्य मतों के लोग स्वतः दो बच्चों वाली नीति का पालन करते रहे, मुस्लिम घुसपैठियों ने अपनी जनसंख्या बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने बड़ा दावा किया कि पाकिस्तान और बांग्लादेश को जोड़ने के लिए भारत में एक ‘मुस्लिम पट्टी (Muslim Belt)’ बनाने की कट्टरपंथियों की साजिश है।

‘मुस्लिम गलियारा’ बना पाकिस्तान-बांग्लादेश को जोड़ने की साजिश: पूर्व MLC

‘दैनिक जागरण’ में लिखे इस लेख में उन्होंने बताया है कि उत्तर भारत में मुस्लिम षड्यंत्रकारियों ने जिस मुस्लिम गलियारे को तैयार करने की साजिश रची है, वो बांग्लादेश से सटे पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा होते हुए पाकिस्तान से मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस गलियारे में मुस्लिमों को बड़ी संख्या में बसाने का काम शुरू किया जा रहा है और असम में घुसपैठियों के खिलाफ हुए आंदोलन के बाद वहाँ के कई मुस्लिमों को भी इधर ही बसाया गया है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में शासन के संरक्षण और भाषाई अनुकूलता के कारण वो खुले रूप से अपना काम कर रहे हैं, लेकिन यूपी-बिहार में इसकी अनदेखी आश्चर्यजनक है। उन्होंने कैराना से हिन्दुओं के पलायन की खबर याद दिलाते हुए लिखा है कि 2011 की जनगणना में जहाँ हिंदू जनसंख्या वृद्धि दर राष्ट्रीय से आधा यानी 9.19% तथा मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि हिंदू से तीन गुना यानी 29.81% थी।

उन्होंने आँकड़ा पेश किया कि 2001-11 में पश्चिम बंगाल से 35 लाख हिन्दुओं के पलायन की बात सामने आई है। उन्होंने पूर्णिया के बायसी विधानसभा में एक दलित बस्ती को जलाए जाने की घटना को भी याद किया और कहा कि वहाँ से असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने जीत दर्ज की है। बकौल हरेंद्र प्रताप, ओवैसी हैदराबाद को कश्मीर बनाना चाहते हैं और वहाँ हिन्दू जनसंख्या पहले से घटी है।

‘अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद’ के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव हरेंद्र प्रताप ने अपने लेख में नेपाल सीमा पर मरदसों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण गिरोह की सक्रियता को भी इसी साजिश का हिस्सा बताया। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम बहुल इलाकों मुजफ्फरनगर (50.14%), मुरादाबाद (46.77%), बरेली (50.13%), सीतापुर (129.66%), हरदोई (40.14%), बहराइच (49.17%) और गोंडा (42.20%) से ‘मुस्लिम पट्टी’ बनाने की साजिश है। 

‘चिकेन्स नेक’ को काटने की बात

दिल्ली के शाहीन बाग़ में कई महीनों तक हिन्दू विरोधी प्रदर्शन चला था। इस विरोध प्रदर्शन के सरगना शरजील इमाम ने असम को हिंदुस्तान से अलग करने की बात की थी। उसने कहा था कि अब वक्त आ गया है कि हम गैर-मुस्लिमों से बोलें कि अगर हमारे हमदर्द हो तो हमारी शर्तों पर आकर खड़े हो। साथ ही धमकी दी थी कि अगर वो हमारी शर्तों पर खड़े नहीं होते तो वो हमारे हमदर्द नहीं हैं।

इसके बाद उसने बड़ी साजिश का खुलासा करते हुए कहा था कि अगर 5 लाख लोग हमारे पास संगठित रूप से हों तो हम उत्तर-पूर्व और शेष भारत को हमेशा के लिए काट सकते हैं। उसने कहा था, “परमानेंटली नहीं तो कम से कम एक-आध महीने के लिए असम को हिंदुस्तान से काट ही सकते हैं। मतलब इतना मवाद डालो पटरियों पर, रोड पर कि उनको हटाने में एक महीना लगे। जाना हो तो जाएँ एयरफोर्स से।”

उसने कहा था, असम को काटना हमारी जिम्मेदारी है। असम और इंडिया कटकर अलग हो जाए, तभी ये हमारी बात सुनेंगे। अगर हमें असम की मदद करनी है तो हमें असम का रास्ता बंद करना होगा फौज के लिए और जो भी जितना भी सप्लाई जा रहा है बंद करो उसे। बंद कर सकते हैं हम उसे, क्योंकि चिकन नेक जो इलाका है, वह मुस्लिम बहुल इलाका है। बता दें कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर को चिकन नेक कहा जाता है।

इस चिकन नेक के माध्यम से ही उत्तर-पूर्वी भारत शेष भारत से जुड़ा हुआ है। इस गलियारे की लंबाई 21 से 24 किलोमीटर है। इससे भूटान, म्यामार, बांग्लादेश और चीन जैसे देशों की सीमा जुड़ती है। यहीं से भारत में घुसपैठ सबसे अधिक होती है। कई इलाकों से ऐसी ख़बरें आती हैं जहाँ इस तरह के मुस्लिम बहुल इलाकों से हिन्दुओं के पर्व-त्योहारों के दौरान उन पर पत्थरबाजी होती है। उन्हें उधर से गुजरने नहीं दिया जाता।

घुसपैठ और इस्लामी कट्टरता की कई घटनाएँ

इसी साल जून में उत्तर प्रदेश एटीएस ने अवैध रूप से भारत में बांग्लादेशियों की घुसपैठ कराने के मामले में 4 रोहिंग्या को गिरफ्तार किया था। हाफिज शफीक नामक व्यक्ति मेरठ में एक गिरोह चला रहा था, जो भारत में लाए गए रोहिंग्याओं के आधार, वोटर आईडी, पासपोर्ट आदि बनवाते थे। इसी तरह हरियाणा का मेवात इस्लामी कट्टरता के लिए कुख्यात हो चुका है, जहाँ से आए दिन कई घटनाएँ सामने आती रहती हैं।

मीडिया रिपोर्ट में ये भी सामने आया था कि हरियाणा के मेवात जिले के नूँह में कथित तौर पर बड़ी संख्या में रोहिंग्या बसाए जा रहे हैं। यह इलाका पशुओं की तस्करी सहित विभिन्न तरह की आपराधिक गतिविधियों के लिए भी पहचान रखता है। रिपोर्ट्स का कहना था कि 600-700 रोहिंग्या परिवार राज्य में बसे हैं। करीब 2 हजार रोहिंग्या के अकेले मेवात जिले में होने की बात कही जा रही है। VHP तो इसे वास्तविकता से कम बताती है।

दरभंगा में बम ब्लास्ट, महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती पर हमला और अलकायदा के नेटवर्क का खुलासा भी पिछले कुछ दिनों में ही हुआ है। केरल और पश्चिम बंगाल से आतंकियों के मॉड्यूल का खुलासा पहले ही हो चुका है। धर्मांतरण गिरोह के मौलाना मोहम्मद उमर गौतम और जहाँगीर काजी धराए, जिन्होंने 1000 मूक-बधिर हिन्दुओं का धर्म-परिवर्तन कराया था। कैराना, मुर्शिदाबाद और एर्नाकुलम जैसे जगह आतंकियों के हॉटस्पॉट बने

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले रोहिंग्या मुसलमानों को राज्य में बसाने को लेकर एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश भी हुआ है। इनके फर्जी आधार कार्ड, वोटर कार्ड सहित अन्य दस्तावेज तैयार करवाए जा रहे हैं ताकि वे वोट डाल सकें। एजेंसियों को पता चला है कि दिल्ली के खजूरी खास इलाके के एक वेंडर ने रोहिंग्याओं को उत्तर प्रदेश में बसाया था। रोहिंग्या मुस्लिम फर्जी राशन कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी कार्ड के साथ प्रदेश के विभिन्न स्थानों में बसने लगे हैं। आर्थिक मदद भी मिल रही।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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