Monday, March 8, 2021
Home राजनीति जय श्रीराम का नारा कम्युनल है क्या? - फेसबुक प्रमुख से पूछे गए कई...

जय श्रीराम का नारा कम्युनल है क्या? – फेसबुक प्रमुख से पूछे गए कई सवाल, 150 से ज्यादा का नहीं मिला जवाब

क्या जय श्रीराम कहना फेसबुक की पॉलिसी के हिसाब से सांप्रदायिक है? कश्मीर में सुरक्षा के नाम पर भारत सरकार आतंक फैला रही है? 'फेसबुक फॉर मुस्लिम' जैसे ग्रपु पर एक्शन नहीं जबकि देवी-देवताओं की तस्वीर हेट पोस्ट कहकर हटा दी गईं।

सोशल मीडिया के बड़े प्लेटफॉर्म फेसबुक की निष्पक्षता को लेकर हर राजनैतिक दल के मन में बड़ा सवाल है। सत्ताधारी पार्टी को लग रहा है कि फेसबुक विपक्ष से साँठ-गाँठ किए बैठा है और विपक्ष को लग रहा है कि फेसबुक के भाजपा से लिंक हैं। 

ऐसी उठा पटक के बीच में बुधवार (सितंबर 2, 2020) को संसदीय समिति की बैठक हुई। इस बैठक में फेसबुक भारत के प्रमुख अजित मोहन शामिल हुए। समिति की अध्यक्षता शशि थरूर ने की। यह बैठक करीब 3 घंटे चली। इस बैठक में दोनों पक्षों ने अजित मोहन के सामने फेसबुक के झुकाव के बारे में बात की।

एक ओर कॉन्ग्रेस सांसदों की ओर से हेटस्पीच के कई उदाहरण दिए गए। वहीं, दूसरी ओर से भाजपा के सांसदों ने फेसबुक से कई तीखे सवाल कर डाले। भाजपा ने अजित मोहन से जय श्रीराम के नारे से लेकर कश्मीर मुद्दे पर उनकी राय माँगी।

उन्होंने पूछा कि क्या जय श्रीराम कहना फेसबुक की पॉलिसी के हिसाब से सांप्रदायिक है? उन्होंने मोहन से पूछा कि क्या वह मानते हैं कि कश्मीर में सुरक्षा के नाम पर भारत सरकार आतंक फैला रही है, जैसा कि उन्होंने अपने आलेखों में लिखा है?

इसके अलावा चुनावों में फेसबुक की भूमिका और फेसबुक के कॉन्ग्रेस से संबंधों के बारे में खुल कर पूछा गया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर क्यों फेसबुक अपने को भारत में बिचौलिया कहता है? फेसबुक के अफसरों का कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल से क्या रिश्ते हैं? फेसबुक के फैक्ट चैकिंग बोर्ड में शामिल कोई पार्टनर क्या कॉन्ग्रेस के डाटा एनेलेटिक्स में काम कर चुका है?

इसके बाद साल 2019 में लोकसभा चुनावों में दक्षिणपंथी अकाउंट्स को हटाने की बात भी भाजपा सांसदों ने उठाई। उन्होंने पूछा कि क्या यह सही है कि राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े वे 700 पेज हटाए गए, जिनकी कुल फॉलोइंग 26 लाख से अधिक थी। वहीं कॉन्ग्रेस और वामपंथी विचारधारा से जुड़े जो लेख हटाए गए, उनकी कुल फॉलोइंग 2 लाख थी?

सांसदों ने पूछा कि साल 2019 में फेसबुक ने चुनावों को कितना प्रभावित किया? नरेंद्र मोदी के बयानों के कितने फैक्ट चेक हुए और सोनिया गाँधी के बयानों को कितनी बार चेक किया गया। भाजपा सांसदों ने इस दौरान फेसबुक पर ईस्ट इंडिया कंपनी जैसी नीति अपनाने पर भी सवाल किए। उन्होंने पूछा कि क्या 21 वीं सदी की ईस्ट इंडिया कम्पनी फेसबुक है, जो भारतीय कानूनों को नहीं मानती और बाँटो एवं राज करो के नियम में यकीन करती है? 

यहाँ बता दें, इस संसदीय बैठक में दोनों पक्षों ने फेसबुक कार्रवाई के बारे में अजित मोहन से पूछा। भाजपा ने फैक्ट चेक टीम में प्रतीक सिन्हा के अपॉइंटमेंट पर सवाल उठाए। साथ ही यह भी पूछा कि क्या भाजपा, शिवसेना, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल या आरएसएस से किसी की नियुक्ति वहाँ की गई? जिसका कंपनी ने कोई डेटा उपलब्ध नहीं कराया।

समिति बैठक में शामिल मंत्रियों ने पूछा कि ‘फेसबुक फॉर मुस्लिम’ जैसे ग्रपु पर क्या एक्शन लिया गया। जिस पर फेसबुक की ओर से प्रतिनिधि ने कहा कि उनके पास ऐसी कोई पॉलिसी नहीं है कि वह उसे ब्लॉक करें या ऑब्जेक्ट करें।

कमिटी ने फेसबुक से कंंटेंट को हटाने की संपूर्ण जानकारी माँगी। विशेष तौर पर उस कंटेंट को हटाने की, जो साल 2019 में चुनाव के दौरान हटाए गए। उन्होंंने उदाहरण देते हुए पूछा कि सिख फॉर जस्टिस ग्रुप पर भारत का एक विकृत नक्शा दिखाया गया। लेकिन फेसबुक ने उसे नहीं हटाया जबकि जय श्री राम और देवी-देवताओं की तस्वीर हेट पोस्ट कहकर हटा दी गईं।

कुल मिलाकर इस बैठक में 150 से अधिक प्रश्नों के जवाब अजित मोहन से सांसदों को नहीं मिल पाए। इस बैठक में थरूर के अलावा, निशिकांत दुबे, राज्यवर्धन सिंह राठौर, महुआ मित्रा, सन्नी देओल, लॉकेट चटर्जी, नीतिक प्रमाणिक और नसीर हुसैन शामिल हुए। 

इससे पहले याद दिला दें कि कानून मंत्री रविशंकर ने फेसबुक सीईओ को पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने फेसबुक पर एकतरफा होने की बात कही थी। उन्होंने बताया था कि कैसे साल 2019 में फेसबुक ने दक्षिणपंथियों के अकॉउंटस बंद कर दिए थे या फिर उनकी रीच घटा दी थी। जबकि फेसबुक को तो संतुलित और निष्पक्ष होना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा था कि फेसबुक इंडिया टीम में कई वरिष्ठ अधिकारी एक विशेष राजनीतिक विचारधारा के समर्थक हैं।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

आरक्षण की सीमा 50% से अधिक हो सकती है? सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को भेजा नोटिस, 15 मार्च से सुनवाई

क्या इंद्रा साहनी जजमेंट (मंडल कमीशन केस) पर पुनर्विचार की जरूरत है? 1992 के इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की सीमा 50% तय की थी।

‘बच्चा कितना काला होगा’: प्रिंस हैरी-मेगन ने बताया शाही परिवार का घिनौना सच, ओप्रा विन्फ्रे के इंटरव्यू में खुलासा

मेगन ने बताया कि जब वह गर्भवती थीं तो शाही परिवार में कई तरह की बातें होती थीं। जैसे लोग बात करते थे कि उनके आने वाले बच्चे को शाही टाइटल नहीं दिया जा सकता।

राजस्थान: FIR दर्ज कराने गई थी महिला, सब-इंस्पेक्टर ने थाना परिसर में ही 3 दिन तक किया रेप

एक महिला खड़ेली थाना में अपने पति के खिलाफ FIR लिखवाने गई थी। वहाँ तैनात सब-इंस्पेक्टर ने थाना परिसर में ही उसके साथ रेप किया।

सबसे आगे उत्तर प्रदेश: 20 लाख कोरोना वैक्सीन की डोज लगाने वाला पहला राज्य बना

उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहाँ 20 लाख लोगों को कोरोना वैक्सीन का लाभ मिला है।

रेल इंजनों पर देश की महिला वीरांगनाओं के नाम: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर भारतीय रेलवे ने दिया सम्मान

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, इंदौर की रानी अहिल्याबाई और रामगढ़ की रानी अवंतीबाई इनमें प्रमुख हैं। ऐसे ही दक्षिण भारत में कित्तूर की रानी चिन्नम्मा, शिवगंगा की रानी वेलु नचियार को सम्मान दिया गया।

बुर्का बैन करने के लिए स्विट्जरलैंड तैयार, 51% से अधिक वोटरों का समर्थन: एमनेस्टी और इस्लामी संगठनों ने बताया खतरनाक

स्विट्जरलैंड में हुए रेफेरेंडम में 51% वोटरों ने सार्वजनिक जगहों पर बुर्का और हिजाब पहनने पर प्रतिबंध के पक्ष में वोट दिया है।

प्रचलित ख़बरें

मौलाना पर सवाल तो लगाया कुरान के अपमान का आरोप: मॉब लिंचिंग पर उतारू इस्लामी भीड़ का Video

पुलिस देखती रही और 'नारा-ए-तकबीर' और 'अल्लाहु अकबर' के नारे लगा रही भीड़ पीड़ित को बाहर खींच लाई।

14 साल के किशोर से 23 साल की महिला ने किया रेप, अदालत से कहा- मैं उसके बच्ची की माँ बनने वाली हूँ

अमेरिका में 14 साल के किशोर से रेप के आरोप में गिरफ्तार की गई ब्रिटनी ग्रे ने दावा किया है कि वह पीड़ित के बच्चे की माँ बनने वाली है।

‘हराम की बोटी’ को काट कर फेंक दो, खतने के बाद लड़कियाँ शादी तक पवित्र रहेंगी: FGM का भयावह सच

खतने के जरिए महिलाएँ पवित्र होती हैं। इससे समुदाय में उनका मान बढ़ता है और ज्यादा कामेच्छा नहीं जगती। - यही वो सोच है, जिसके कारण छोटी बच्चियों के जननांगों के साथ इतनी क्रूर प्रक्रिया अपनाई जाती है।

‘मासूमियत और गरिमा के साथ Kiss करो’: महेश भट्ट ने अपनी बेटी को साइड ले जाकर समझाया – ‘इसे वल्गर मत समझो’

संजय दत्त के साथ किसिंग सीन को करने में पूजा भट्ट असहज थीं। तब निर्देशक महेश भट्ट ने अपनी बेटी की सारी शंकाएँ दूर कीं।

‘ठकबाजी गीता’: हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अकील कुरैशी ने FIR रद्द की, नहीं माना धार्मिक भावनाओं का अपमान

चीफ जस्टिस अकील कुरैशी ने कहा, "धारा 295 ए धर्म और धार्मिक विश्वासों के अपमान या अपमान की कोशिश के किसी और प्रत्येक कृत्य को दंडित नहीं करता है।"

आज मनसुख हिरेन, 12 साल पहले भरत बोर्गे: अंबानी के खिलाफ साजिश में संदिग्ध मौतों का ये कैसा संयोग!

मनसुख हिरेन की मौत के पीछे साजिश की आशंका जताई जा रही है। 2009 में ऐसे ही भरत बोर्गे की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

292,339FansLike
81,970FollowersFollow
393,000SubscribersSubscribe