Friday, August 12, 2022
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गुजरात को नहीं देंगे नर्मदा का पानी: CM कमलनाथ

गुजरात के उप-मुख्यमंत्री नितिन पटेल के मुताबिक मध्य प्रदेश सरकार की धमकी NCA के अंतर्गत हुए अंतर्राज्यीय समझौते की समझ का अभाव दिखाती है।

मध्य प्रदेश के कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री कमलनाथ की सरकार ने गुजरात को दिए जाने वाले नर्मदा के पानी में कटौती की धमकी दी है। उनका आरोप है कि सरदार सरोवर बाँध के विस्थापितों के पुनर्वास को लेकर गुजरात की राज्य सरकार गंभीर नहीं है। यहाँ तक कि आरोपों के मुताबिक, नर्मदा कंट्रोल अथॉरिटी (NCA) की बैठकों को भी सीरियसली नहीं लिया जा रहा है।

‘बिजली के लिए पानी नहीं दे रही गुजरात सरकार’

मध्य प्रदेश के नर्मदा घाटी विकास मंत्री सुरेंद्र सिंह बघेल ने गुजरात को चेतावनी दी है कि अगर गुजरात और केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश की बाँध से विस्थापित हुए लोगों को लेकर चिंताओं पर गौर नहीं किया तो नर्मदा का पानी उनकी सरकार रोक देगी। उन्होंने बिजली के लिए गुजरात सरकार द्वारा मध्य प्रदेश को पानी न देने का भी आरोप लगाया। प्रत्युत्तर में गुजरात सरकार ने मध्य प्रदेश सरकार को चेतावनी दी है कि वह (कमलनाथ सरकार) बाँध के पानी के साथ राजनीतिक खिलवाड़ न करे। गुजरात सरकार ने मध्य प्रदेश को उन दोनों के सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों और नर्मदा कंट्रोल अथॉरिटी से बँधे होने की बात भी याद दिलाई।

गुजरात के उप-मुख्यमंत्री नितिन पटेल के मुताबिक मध्य प्रदेश सरकार की धमकी NCA के अंतर्गत हुए अंतर्राज्यीय समझौते की समझ का अभाव दिखाती है। उन्होंने साफ़ किया कि समझौते के अंतर्गत बिजली के लिए पानी तभी छोड़ा जा सकता है जब पानी का स्तर बाँध में 131 मीटर के स्तर से ऊपर पहुँच गया हो। उन्होंने ₹400 करोड़ विस्थापितों के पुनर्वास के लिए पहले ही जारी हो चुके होने का दावा भी किया।

विजय रूपाणि का बयान

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणि भी मामले में कूद पड़े हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात अपने न्यायोचित हिस्से का पानी लेकर रहेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस को समूचे देश के हितों को दाँव पर रख कर राजनीति करना शोभा नहीं देता। “कॉन्ग्रेस लोक सभा चुनावों में हार पचा नहीं पाई है और पहले ही तय हो चुके मुद्दों पर नए सिरे से राजनीति करने का मौका तलाश रही है। पानी का बँटवारा NCA समझौते के मुताबिक ही हो रहा है, और एक राज्य अचानक से इसे बदल देने का निर्णय नहीं ले सकता।”

रूपाणि ने साफ़ किया कि मध्य प्रदेश ने विस्थापितों का मुद्दा पहली बार गत 27 मई को ही उठाया था। उस समय मध्य प्रदेश सरकार का कहना था कि 6000 से ज्यादा लोगों का पुनर्वास अभी लंबित है। उनके दावे के मुताबिक मध्य प्रदेश ने 18 जुलाई की सरदार सरोवर रिजर्वायर रेगुलेशन कमिटी की मीटिंग का भी बहिष्कार किया था।

वहीं मध्य प्रदेश के मंत्री बघेल ने दावा किया कि मध्य प्रदेश को बैठक का बहिष्कार इसलिए करना पड़ा क्योंकि गुजरात सरकार और केंद्र उन्हें गंभीरता से ले नहीं रहे थे। सरदार सरोवर बाँध पर बने दो पनबिजली प्लांटों की बिजली का बँटवारा मध्य प्रदेश (57%), महाराष्ट्र (27 %) और गुजरात (16%) के बीच होता है

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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