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कर्नाटक के हिन्दू मंदिरों में मुस्लिमों को दुकान लगाने की अनुमति नहीं: राज्य सरकार ने फैसले को सही माना, कॉन्ग्रेस ने जताई आपत्ति

"हिन्दू धर्मस्थलों के पास मौजूद किसी भी जमीन की संपत्ति गैर-हिन्दू को नियमानुसार नहीं दी जा सकती। ये नियम हमारी सरकार के नहीं बल्कि कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा बनाए गए हैं।"

कर्नाटक के कई हिन्दू मंदिरों में मुस्लिमों द्वारा दुकानें लगाए जाने से रोक के बाद अब इस पर राज्य सरकार के कानून मंत्री ने सरकार का रूख स्पष्ट किया है। जेसी मधुस्वामी ने इसे सरकारी नियम बताते हुए मंदिर प्रशासन के निर्णय पर सहमति जताई है। इस मुद्दे पर कर्नाटक विधानसभा में बुधवार (23 मार्च, 2022) को चर्चा हुई थी। यह आदेश सभी गैर हिन्दुओं पर लागू है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विधानसभा में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठा था। कॉन्ग्रेस पार्टी के यू.टी. खादर और रिजवान अरशद ने मंदिरों पर लगे गैर हिन्दुओं को दुकानें न देने के फैसले वाले बैनरों पर आपत्ति जताई थी। उन्होने यह भी कहा कि ऐसा कई सार्वजनिक स्थलों पर भी हो रहा है। उन्होंने सरकार से इसे रोकने की माँग की।

इसके जवाब में कानून मंत्री जेसी मधुस्वामी ने ‘कर्नाटक धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम 2002’ के नियम संख्या 12 को सदन में रखा। उन्होंने कहा, “हिन्दू धर्मस्थलों के पास मौजूद किसी भी जमीन की संपत्ति गैर-हिन्दू को नियमानुसार नहीं दी जा सकती। ये नियम हमारी सरकार के नहीं बल्कि कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा बनाए गए हैं। यदि पट्टे का आवेदन मंदिर परिसर से बाहर है तो एक बार उस पर विचार किया जा सकता है।”

गौरतलब है कि कर्नाटक में चल रहे हिजाब मामले में हाईकोर्ट द्वारा बुर्का को इस्लाम का अनिवार्य अंग मानने से इनकार कर दिया था। इस फैसले के विरोध में मुस्लिम संगठनों ने बंद का आह्वान किया था। इस बंद में वो दुकानदार भी शामिल हुए जो मंदिर परिसर में फूल और नारियल की दुकानें लगाया करते थे। इसके बाद कर्नाटक के उडुपी में होसा मारिगुडी मंदिर, महालिंगेश्वर मंदिर और शिवमोगा में कोटे मरिकंबा जात्रा की आयोजन समिति ने उत्सव के दौरान केवल हिंदू दुकानदारों को अपनी दुकानें स्थापित करने की अनुमति देने का फैसला किया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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