Saturday, July 31, 2021
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अविवाहित रहे, राम मंदिर के लिए जीवन खपा दिया, आपातकाल में 18 महीने की जेल झेली: जानिए कौन हैं VHP के चंपत राय

प्रधानाध्यापक के कक्ष में चंपत राय को बुलाया गया। उस समय भी वो विद्यार्थियों को कक्षा में पढ़ा रहे थे। प्राचार्य कक्ष में उन्होंने पुलिस से कहा कि वो घर से कपड़े लेकर सीधे कोतवाली पहुँचेंगे। अपने कहे के अनुसार उन्होंने वादा निभाया और फिर उन्हें गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया गया।

राम मंदिर की जमीन खरीद मामले में AAP और सपा ने विश्व हिन्दू परिषद (VHP) नेता चंपत राय पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा कर अपना उल्लू सीधा किया है। इधर राय ने एक-एक आरोप का स्पष्टीकरण तथ्यों के साथ दिया और श्रद्धालुओं को राजनीति से प्रेरित बयानों पर भरोसा न करने को कहा। क्या आपको पता है कि ‘राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के महासचिव चंपत राय ने अपना पूरा जीवन इसी मंदिर के लिए संघर्ष करते हुए खपा दिया?

राम मंदिर के निर्माण में VHP के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय का बड़ा किरदार है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर स्थित नगीना कस्बे के सरायमीर मोहल्ले के निवासी चंपत राय के पिता का नाम रामेश्वर प्रसाद बंसल और माता का नाम सावित्री देवी था। नवंबर 18, 1946 में जन्मे चंपत राय की उम्र 75 वर्ष से भी ज्यादा है। उनके पिता भी अपने शुरुआती दिनों से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े हुए थे।

चंपत राय भी संघ के कामकाज से इतनी प्रभावित हुए कि युवावस्था में ही वो RSS के पूर्णकालिक सदस्य बन गए। पढ़ाई-लिखाई में भी वो तीव्र बुद्धि के थे। उन्हें धामपुर के RSM डिग्री कॉलेज में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर का पद मिला। 1975 में जब इंदिरा गाँधी ने देश में लोकतंत्र ख़त्म कर के आपातकाल की घोषणा की, तब राय उसी कॉलेज में प्रवक्ता थे। उन्हें गिरफ्तार करने के लिए पुलिस उनके कॉलेज पहुँची।

प्रधानाध्यापक के कक्ष में चंपत राय को बुलाया गया। उस समय भी वो विद्यार्थियों को कक्षा में पढ़ा रहे थे। प्राचार्य कक्ष में उन्होंने पुलिस से कहा कि वो घर से कपड़े लेकर सीधे कोतवाली पहुँचेंगे। अपने कहे के अनुसार उन्होंने वादा निभाया और फिर उन्हें गिरफ्तार कर के उन्हें जेल भेज दिया गया। जेल में उनके 18 महीने गुजरे। आपातकाल ख़त्म होने के बाद उन्हें जेल से रिहा किया गया। 1980-81 में चंपत राय ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और RSS के प्रचारक बन गए।

देहरादून और सहारनपुर में उन्हें प्रचारक का दायित्व सौंपा गया। 1985 में उन्हें मेरठ विभाग का प्रचारक नियुक्त किया गया। 1986 में विहिप में प्रान्त संगठन मंत्री बना कर भेजा गया। वर्ष 1991 में चंपत राय को क्षेत्रीय संगठन मंत्री बनाकर अयोध्या भेज दिया गया। 1996 में विहिप ने उन्हें संगठन का केंद्रीय मंत्री बनाया। 2002 में संयुक्त महामंत्री और फिर अंतरराष्ट्रीय महामंत्री के रूप में प्रमोट किया गया।

चंपत राय अविवाहित हैं और अपने घर न के बराबर ही आते-जाते हैं। चंपत राय सुप्रीम कोर्ट में चली राम मंदिर के मुकदमे की सुनवाई में मुख्य पैरोकार एवं पक्षकार रहे हैं। राम जन्मभूमि के पक्ष में महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाने और सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करने में उनकी बड़ी भूमिका रही है। राम मंदिर भूमिपूजन समारोह के आयोजन का प्रबंधन भी उन्होंने ही किया था। राम मंदिर निर्माण का कार्य उनकी ही निगरानी में हो रहा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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