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कॉन्ग्रेस को ‘जिन्नाह’ की पार्टी बताने वाले शत्रुघ्न सिन्हा की सफाई, चिदंबरम ने कहा ‘ख़ामोश’

बेचारे सिन्हा को शायद अब समझ नहीं आ रहा होगा कि क्या करें, जाएँ तो जाएँ कहाँ? बोले तो बोले क्या? आज शायद उन्हें धोबी के गधे वाली बात ज़रूर याद आई होगी जो न घर का होता है न घाट का। खैर जो भी हो बड़बोले सिन्हा को अब खुद को ही कहने का समय आ गया है ‘ख़ामोश।’

बड़बोले शत्रुघ्न सिन्हा के लिए मुसीबतें कम नहीं हो रही हैं बल्कि अब पहले से ही कई अन्य मुश्किलों का सामना कर रही कॉन्ग्रेस के लिए उन्होंने नई मुसीबत खड़ी कर दी। कॉन्ग्रेस को मो. अली जिन्नाह की पार्टी बता और देश के विकास में उनके महान योगदान की गाथा सुनाने के बाद अब शत्रुघ्न सिन्हा ने इसे लेकर आज सफाई दी। बयान पर मचे सियासी घमासान के बाद सिन्हा को अपनी गलती का एहसास हुआ और कहा कि उन्होंने कल जो भी कहा था वो स्लिप ऑफ टंग था, उनकी जुबान फिसल गई थी। वो कहना चाहते थे मौलाना आजाद, लेकिन उनके मुँह से मो. अली जिन्नाह निकल गया।

बता दें कि कॉन्ग्रेस के टिकट पर बिहार के पटना साहिब से चुनाव लड़ रहे शत्रुघ्न सिन्हा ने मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के सौसर में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कह दिया था कि भारत की आजादी और विकास में जिन्नाह का भी महत्वपूर्ण योगदान है।

सिन्हा के कॉन्ग्रेस में शामिल होने के बाद से ही गाँधी परिवार और उसके महान योगदान का गुणगान करने के क्रम में उन्होंने कुछ ऐसा कर दिया जो कॉन्ग्रेस के लिए फिर से एक सेल्फ गोल हो गया। सिन्हा ने यादगार भाषण में कहा, “कॉन्ग्रेस परिवार महात्मा गाँधी से लेकर सरदार वल्लभ भाई पटेल तक, मो अली जिन्नाह से लेकर जवाहर लाल नेहरू तक, इंदिरा गाँधी से लेकर राजीव गाँधी और राहुल गाँधी तक की पार्टी है। भारत की आजादी और विकास में इन सभी का योगदान है। इसलिए मैं कॉन्ग्रेस पार्टी में आया हूँ। और एक बार आ गया हूँ, पहली और शायद आखिरी बार, अब जाने का सवाल नहीं है।”

उनके इसी बयान पर सियासी घमासान छिड़ा हुआ है और एक बार फिर भाजपा को कॉन्ग्रेस पर हमले का मौका मिल गया। इसे लेकर कॉन्ग्रेस बैकफुट पर है और उसे अपनी तरफ से सफाई भी देनी पड़ रही है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस ने इस बयान से पूरी तरह पल्ला झाड़ने की कोशिश करते हुए उल्टा भाजपा को ही सफाई देने को कहा।

गौरतलब है कि आज पी चिदंबरम ने भी एक तरह से सिन्हा से किनारा करते हुए कहा, “उनके (सिन्हा) जो भी विचार हैं, उसका स्पष्टीकरण दिया जाना चाहिए। कुछ दिन पहले वह भाजपा का हिस्सा थे। भाजपा को बताना चाहिए कि वह इतने साल तक पार्टी का हिस्सा क्यों थे। मैं पार्टी के हर सदस्य के बयान पर स्पष्टीकरण नहीं दे सकता। सिर्फ पार्टी के आधिकारिक स्टैंड पर ही कुछ बोल सकता हूँ।”

बेचारे सिन्हा को शायद अब समझ नहीं आ रहा होगा कि क्या करें, जाएँ तो जाएँ कहाँ? बोले तो बोले क्या? आज शायद उन्हें धोबी के गधे वाली बात ज़रूर याद आई होगी जो न घर का होता है न घाट का। खैर जो भी हो बड़बोले सिन्हा को अब खुद को ही कहने का समय आ गया है ‘ख़ामोश।’

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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