गेस्ट हाउस कांड भुला मैनपुरी में 24 साल बाद मुलायम से मिलने पर मायावती ने कहा: ‘जनहित में लेने पड़ते हैं कठिन फैसले’

मुलायम की तारीफ़ों का पुल बाँधते हुए बीएसपी अध्यक्ष ने पीएम मोदी पर हमला बोला और कहा कि मुलायम सिंह यादव पीएम नरेंद्र मोदी की तरह नकली और पिछड़े वर्ग के नहीं हैं।

मैनपुरी में आज (अप्रैल 19, 2019) सपा, बसपा और रालोद की संयुक्त रैली हुई। इस रैली के दौरान बसपा प्रमुख मायावती ने सपा के पूर्व अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव की जमकर तारीफ़ की। साथ ही उन्होंने मंच से भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी पर भी जमकर निशाना साधा।

गेस्टहाउस कांड के कारण एक दूसरे के कट्टर विरोधी रहे मायावती और मुलायम सिंह यादव 24 साल बाद एक मंच पर दिखाई दिए। इस दौरान उनके समर्थकों ने जमकर ‘बसपा-सपा आई है’ के नारे लगाए। मुलायम सिंह यादव ने भी मायावती का स्वागत किया और जनता से अपील की कि वे हमेशा मायावती का सम्मान करें, क्योंकि उन्होंने हमेशा उनका साथ दिया है।

इस मंच के जरिए मायावती ने जनता से गुहार लगाई कि वे इस बार मैनपुरी लोकसभा सीट में एसपी प्रत्याशी मुलायम सिंह यादव को रिकॉर्ड तोड़ वोटों से जीत दिलाएँ। इस दौरान उन्होंने मुलायम सिंह यादव पर विश्वास जताते हुए कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि मुलायम ने सपा के बैनर तले सभी समाज के लोगों को जोड़ा है और अन्य पिछड़े वर्ग के लोगों को भी बड़े पैमाने पर जोड़ा।

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

मुलायम की तारीफ़ों का पुल बाँधते हुए बीएसपी अध्यक्ष ने पीएम मोदी पर हमला बोला और कहा कि मुलायम सिंह यादव पीएम नरेंद्र मोदी की तरह नकली और पिछड़े वर्ग के नहीं हैं।

मायावती की मानें तो मुलायम सिंह यादव असली, वास्तविक और जन्मजात पिछड़े वर्ग के हैं। जबकि नरेंद्र मोदी के लिए वो कहती हैं कि उन्होनें (मोदी) ने गुजरात में अपनी सरकार के समय में सत्ता का दुरुपयोग करके अपनी अगणी-उच्च जति को पिछड़े वर्ग का घोषित कर लिया। उन्होंने पिछले आम चुनावों में इसका लाभ उठाया और प्रधानमंत्री बन गए।

इस मंच के जरिए मायावती ने सपा के साथ गठबंधन करने के फैसले पर अपनी सफाई पेश करते हुए कहा कि “देश-आमहित में और पार्टी के मूवमेंट के हित में कभी-कभी हमें ऐसे कठिन फैसले लेने पड़ते हैं जिसको आगे रखकर ही हमने देश के वर्तमान हालातों के चलते हुए यूपी में एसपी के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ने का फैसला किया है।”

बता दें कि गेस्ट हाउस कांड के 24 साल बाद मुलायम सिंह और मायावती एक साथ किसी मंच पर दिखाई दिए हैं। गौरतलब है साल 1993 में सपा और बसपा ने भाजपा की सरकार को सत्ता में आने से रोकने के लिए गठबंधन किया था। जिसके बाद मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार बनी थी, लेकिन बाद में 2 जून 1995 को एक रैली में मायावती ने सपा से गठबंधन वापसी की घोषणा कर दी।

इसके बाद पार्टी विधायकों के साथ लखनऊ के मीराबाई गेस्ट हाउस के कमरा नंबर 1 में थीं। जहाँ अचानक समाजवादी पार्टी समर्थक गेस्ट हाउस में घुस आए और मायावती के साथ अभद्रता की और साथ ही अपशब्द भी कहे। खुद को बचाने के लिए मायावती इस दौरान एक कमरे में बंद हो गईं थी और बाद में सुरक्षाकर्मियों ने उनकी जान बचाई थी। मायावती पर लिखी किताब बहनजी में इस घटना का जिक्र किया गया है।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by paying for content

यू-ट्यूब से

ये पढ़ना का भूलें

लिबरल गिरोह दोबारा सक्रिय, EVM पर लगातार फैला रहा है अफवाह, EC दे रही करारा जवाब

ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

ओपी राजभर

इतना सीधा नहीं है ओपी राजभर को हटाने के पीछे का गणित, समझें शाह के व्यूह की तिलिस्मी संरचना

ये कहानी है एक ऐसे नेता को अप्रासंगिक बना देने की, जिसके पीछे अमित शाह की रणनीति और योगी के कड़े तेवर थे। इस कहानी के तीन किरदार हैं, तीनों एक से बढ़ कर एक। जानिए कैसे भाजपा ने योजना बना कर, धीमे-धीमे अमल कर ओपी राजभर को निकाल बाहर किया।
राहुल गाँधी

सरकार तो मोदी की ही बनेगी… कॉन्ग्रेस ने ऑफिशली मान ली अपनी हार

कॉन्ग्रेस ने 23 तारीख को चुनाव नतीजे आने तक का भी इंतजार करना जरूरी नहीं समझा। समझे भी कैसे! देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कॉन्ग्रेस भी उमर अबदुल्ला के ट्वीट से सहमत होकर...
उपेंद्र कुशवाहा

‘सड़कों पर बहेगा खून अगर मनमुताबिक चुनाव परिणाम न आए, समर्थक हथियार उठाने को तैयार’

एग्जिट पोल को ‘गप’ करार देने से शुरू हुआ विपक्ष का स्तर अब खुलेआम हिंसा करने और खून बहाने तक आ गया है। उपेंद्र कुशवाहा ने मतदान परिणाम मनमुताबिक न होने पर सड़कों पर खून बहा देने की धमकी दी है। इस संभावित हिंसा का ठीकरा वे नीतीश और केंद्र की मोदी सरकार के सर भी फोड़ा है।
राशिद अल्वी

EVM को सही साबित करने के लिए 3 राज्यों में कॉन्ग्रेस के जीत की रची गई थी साजिश: राशिद अल्वी

"अगर चुनाव परिणाम एग्जिट पोल की तरह ही आते हैं, तो इसका मतलब पिछले साल तीन राज्यों के विधानसभा के चुनाव में कॉन्ग्रेस जहाँ-जहाँ जीती थी, वह एक साजिश थी। तीन राज्यों में कॉन्ग्रेस की जीत के साथ ये भरोसा दिलाने की कोशिश की गई कि ईवीएम सही है।"
पुण्य प्रसून वाजपेयी

20 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली पार्टी को 35+ सीटें: ‘क्रन्तिकारी’ पत्रकार का क्रन्तिकारी Exit Poll

ऐसी पार्टी, जो सिर्फ़ 20 सीटों पर ही चुनाव लड़ रही है, उसे वाजपेयी ने 35 सीटें दे दी है। ऐसा कैसे संभव है? क्या डीएमके द्वारा जीती गई एक सीट को दो या डेढ़ गिना जाएगा? 20 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली पार्टी 35 सीटें कैसे जीत सकती है?

यूट्यूब पर लोग KRK, दीपक कलाल और रवीश को ही देखते हैं और कारण बस एक ही है

रवीश अब अपने दर्शकों से लगभग ब्रेकअप को उतारू प्रेमिका की तरह ब्लॉक करने लगे हैं, वो कहने लगे हैं कि तुम्हारी ही सब गलती थी, तुमने मुझे TRP नहीं दी, तुमने मेरे एजेंडा को प्राथमिकता नहीं माना। जब मुझे तुम्हारी जरूरत थी, तब तुम देशभक्त हो गए।
स्वरा भास्कर

प्रचार के लिए ब्लाउज़ सिलवाई, 20 साड़ियाँ खरीदी, ताकि बड़े मुद्दों पर बात कर सकूँ: स्वरा भास्कर

स्वरा भास्कर ने स्वीकार करते हुए बताया कि उन्हें प्रचार के लिए बुलाया गया क्योंकि वो हीरोइन हैं और इस वजह से ही उन्हें एक इमेज बनाना आवश्यक था। इसी छवि को बनाने के लिए उन्होंने 20 साड़ियाँ खरीदीं और और कुछ जूलरी खरीदी ताकि ‘बड़े मुद्दों पर’ बात की जा सके।
राहुल गाँधी, बीबीसी

2019 नहीं, अब 2024 में ‘पकेंगे’ राहुल गाँधी: BBC ने अपने ‘लाडले’ की प्रोफाइल में किया बदलाव

इससे भी ज्यादा बीबीसी ने प्रियंका की तारीफ़ों के पुल बांधे हैं। प्रियंका ने आज तक अपनी लोकप्रियता साबित नहीं की है, एक भी चुनाव नहीं जीता है, अपनी देखरेख में पार्टी को भी एक भी चुनाव नहीं जितवाया है, फिर भी बीबीसी उन्हें चमत्कारिक और लोकप्रिय बताता है।
योगेन्द्र यादव

योगेंद्र यादव का दावा: अबकी बार 272 पार, आएगा तो मोदी ही

उन्होंने स्वीकार किया कि बालाकोट एयरस्ट्राइक का बाद स्थिति बदल गई है। आज की स्थिति में अब बीजेपी बढ़त की ओर आगे बढ़ गई है।
ट्रोल प्रोपेगंडाबाज़ ध्रुव राठी

ध्रुव राठी के धैर्य का बाँध टूटा, बोले राहुल गाँधी ने 1 ही झूठ किया रिपीट, हमारा प्रोपेगैंडा पड़ा हल्का

जिस प्रकार से राहुल गाँधी लगातार मोदी सरकार को घोटालों में घिरा हुआ साबित करने के लिए झूठे डाक्यूमेंट्स और बयानों का सहारा लेते रहे, शायद ध्रुव राठी उन्हीं से अपनी निराशा व्यक्त कर रहे थे। ऐसे समय में उन्हें अपने झुंड के साथ रहना चाहिए।

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

41,313फैंसलाइक करें
7,863फॉलोवर्सफॉलो करें
63,970सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

शेयर करें, मदद करें: