HomeराजनीतिRSS और उससे जुड़े 18 संगठनों पर नीतीश की नजर, पदाधिकारियों की कुंडली तैयार...

RSS और उससे जुड़े 18 संगठनों पर नीतीश की नजर, पदाधिकारियों की कुंडली तैयार कर रही पुलिस

नीतीश कुमार 2016 में 'संघ मुक्त भारत' की बात कर चुके हैं। संभव है कि संघ पदाधिकारियों का ब्यौरा जुटाने का फैसला उनके स्तर से ही हुआ हो। वैसे भी फ़िलहाल बिहार एनडीए में सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उससे जुड़े संगठनों पर नीतीश कुमार की अगुआई वाली बिहार सरकार ने नजर गड़ा रखी है। इन संगठनों के पदाधिकारियों की कुंडली तैयार करने का काम पुलिस को दिया गया था। बीते साल जारी की गई एक चिट्ठी के अब सार्वजनिक होने से मामला सामने आया है।

पुलिस अधिकारियों को भेजी गई इस चिट्ठी में आरएसएस और उससे जुड़े 18 अन्य संगठनों के पदाधिकारियों के बारे में जानकारियाँ माँगी गई है। पटना विशेष शाखा के एसपी ने सभी डीएसपी को यह पत्र भेजते हुए जानकारियाँ जुटाने को कहा था।

पत्र में संघ और उससे सम्बद्ध 18 अन्य संगठनों के सभी पदाधिकारियों के नाम, पता, फोन नंबर और व्यवसाय से सम्बंधित जानकारियाँ जुटा कर भेजने को कहा गया है। हालाँकि, नीतीश सरकार आरएसएस, बजरंग दल, हिन्दू युवा वाहिनी, दुर्गा वाहिनी और हिन्दू महासभा सहित इन सभी संगठनों के पदाधिकारियों के बारे में सारे डिटेल्स क्यों निकलवा रही है, इस बारे में अभी तक कुछ भी पता नहीं चल पाया है।

28 मई 2019 को भेजी गई इस चिट्ठी में सारी जानकारियाँ पुलिस उपाधीक्षकों को एक सप्ताह के अंदर भेजने को कहा गया है। कहा जा रहा है कि स्पेशल ब्रांच गुप्त रूप से सीधा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सारे विवरण समय-समय पर देता है, ऐसे में संभव है कि यह निर्णय मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा ही लिया गया हो। वैसे भी अभी बिहार गठबंधन में सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। वांछित भागीदारी नहीं मिलने पर जदयू केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हुई थी। बाद में जब नीतीश ने बिहार में अपनी कैबिनेट का विस्तार किया तो उसमे भाजपा को जगह नहीं दी।

2016 में ‘संघ मुक्त भारत’ की बात कर चुके नीतीश कुमार के इस क़दम को लेकर भी भाजपा नेताओं की तरफ से कोई बयान नहीं आया है। इंसेफ्लाइटिस, गर्मी और बाढ़ के कारण इस साल सैकड़ों मौतों का गवाह बन चुके बिहार में नीतीश के इस ‘ऑपरेशन संघ परिवार’ के पीछे क्या कारण हैं, यह तो वक़्त ही बताएगा।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

100 नाराज़ ≠ 100 वोट: भारतीय राजनीति में सिर्फ़ ‘नाराज़गी’ का फ़ैक्टर कभी निर्णायक क्यों नहीं रहा

SC/ST Act, आरक्षण, Caste census, सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की राजनीति जैसे मुद्दे निश्चित रूप से सवर्णों में असंतोष पैदा कर सकते हैं। इन प्रश्नों को खारिज करना भी राजनीतिक मूर्खता होगी।

12 वर्ष पहले गोरखनाथ पीठ के पीठाधीश्वर, फिर देश के सबसे बड़े सूबे के CM: जनता तक पहुँच और समस्याओं पर तत्काल प्रतिक्रिया –...

योगी आदित्यनाथ की गोरखनाथ पीठाधीश्वर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक की यात्रा, विरासत को आगे बढ़ाने से लेकर विकसित होते UP की पूरी कहानी।
- विज्ञापन -