Homeराजनीति370 हटाने के बाद J&K में नहीं हुई एक भी मौत: PDP नेता अल्ताफ...

370 हटाने के बाद J&K में नहीं हुई एक भी मौत: PDP नेता अल्ताफ बुखारी

केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर से पिछले वर्ष 05 अगस्त को अनुच्छेद 370 निरस्त कर दिया था। इसके बाद कई नेता हिरासत में लिए गए थे। पिछले तीन हफ़्तों में पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस के 17 बड़े नेताओं को रिहा किया गया है।

जम्मू-कश्मीर में 6 महीनों के बाद राजनीतिक गतिविधियाँ अब जोर पकड़ने लगी हैं। पिछले तीन हफ़्तों में पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NCP) के 17 बड़े नेताओं को भी रिहा कर दिया गया है। इसी बीच जम्मू-कश्मीर के पूर्व वित्त मंत्री और पीडीपी नेता सैय्यद अल्ताफ बुखारी का बयान आया है। बुखारी ने केंद्र सरकार की तारीफ करते हुए कहा है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटने के बाद एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है। इसका श्रेय उन्होंने राज्य की जनता और केंद्र सरकार को दिया है। उन्होंने कहा कि मैं दोनों को बधाई देना चाहता हूँ।

गौरतलब है कि अनुछेद 370 हटने और राज्य के ​यूनियन टेरिटरी बनने के बाद कश्मीर में राजनीतिक गतविधियाँ थम गईं थीं। क्योंकि माहौल खराब होने से बचाने के लिए जम्मू-कश्मीर के कई बड़े नेताओं को या तो हिरासत में लिया गया था या फिर घरों में नज़रबंद कर दिया गया था।

वर्तमान में 36 केंद्रीय मंत्रियों का दल 6 दिवसीय जम्मू-कश्मीर के दौरे पर है। राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर सभी मंत्री अनुच्छेद 370 हटाने के फायदे बताएँगें। केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से पिछले वर्ष 05 अगस्त को अनुच्छेद 370 निरस्त कर दिया था। साथ ही राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बॉंट दिया गया था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

अखिलेश सरकार में हुए 62+ हत्याओं को याद करा रहा ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ पोस्टर: मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर...

मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ लिखे पोस्टर लगा गए हैं। इन पोस्टर्स ने 2013 की उस भयावह हिंसा की याद फिर ताजा कर दी है।

हैशटैग लगाओ, दुनिया बदलो… कितना आसान है न? क्या सोशल मीडिया लोकतंत्र को बर्बाद कर रहा है?

लोकतंत्र इंसान की कमियों को स्वीकार कर समझौतों से चलता है। लेकिन सोशल मीडिया का अनियंत्रित दौर हर छोटी कमी को भ्रष्टाचार बताकर लोकतंत्र की बुनियाद पर चोट कर रहा है। कैसे आज का सोशल मीडिया और डिजिटल यूटोपियनवाद हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है।
- विज्ञापन -