केजरीवाल बढ़ा सकते हैं ऑड-इवेन स्कीम की डेडलाइन, सुप्रीम कोर्ट ने भेजा नोटिस

दिल्ली सरकार और सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को यह आदेश दिया गया कि इस साल अक्टूबर से 14 नवंबर, 2019 तक का प्रदूषण डाटा रखा जाए। साथ ही पिछले साल के अक्टूबर से 31 दिसंबर, 2018 तक का डाटा भी माँगा।

सुप्रीम कोर्ट ने आज (बुधवार, 13 नवंबर 2019 को) दिल्ली सरकार को 4 नवंबर से 15 नवंबर, 2019 तक लागू ऑड-इवेन स्कीम को लेकर नोटिस भेजी है। यह नोटिस सरकार के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती के बाद भेजी गई है। और इस बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने घोषणा की है कि अगर ज़रूरत पड़ी को इस स्कीम को आगे और भी खींचा जा सकता है

इस स्कीम के तहत चौपहिया वाहनों को दिल्ली की सड़क पर आने की अनुमति अपनी नंबर प्लेट के अंतिम अंक के हिसाब से मिलेगी। यानी ‘ऑड’ वाले दिन (विषम संख्या वाली तारीख वाले दिन) केवल ‘ऑड’ नंबर पर खत्म होने वाली नंबर प्लेट वाली कारों को अनुमति होगी, वहीं ‘इवेन’ तारीख वाले दिन इवेन नंबर पर खत्म होने वाली नंबर प्लेट वाली कारों को। इस व्यवस्था को नोएडा के एक वकील ने चुनौती दी है, जिन्होंने इसे मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन बताया है। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि यह रोज़गार करने के अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत मिले संरक्षण का उल्लंघन है। साथ ही उन्होंने इसे ‘महज़ एक राजनीतिक और वोट बैंक के लिए खिलवाड़ जैसा स्टंट’ करार दिया है।

जस्टिस अरुण मिश्रा और दीपक गुप्ता की पीठ ने आज दिल्ली सरकार और सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) को आदेश दिया है कि उनके सामने इस साल अक्टूबर से आगामी कल (14 नवंबर, 2019) तक का प्रदूषण डाटा रखा जाए। उन्होंने पिछले साल के अक्टूबर से 31 दिसंबर, 2018 तक का डाटा भी माँगा। याचिका में सीपीसीबी, दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी (डीपीसीसी) समेत तीन स्रोतों के डाटा का हवाला देकर दावा किया गया था कि ऑड-इवेन का प्रदूषण पर कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ता।

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

अपने आदेश में पीठ ने यह भी कहा कि वह चाहेगी दिल्ली सरकार उसे समझाए कि दोपहिया वाहनों, तीनपहिया वाहनों और टैक्सियों के मुकाबले कम प्रदूषण करने वाली कारों को रोककर वह क्या हासिल कर रही है

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by making a monetary contribution

बड़ी ख़बर

उद्धव ठाकरे-शरद पवार
कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी के सावरकर को लेकर दिए गए बयान ने भी प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है। इस मसले पर भाजपा और शिवसेना के सुर एक जैसे हैं। इससे दोनों के जल्द साथ आने की अटकलों को बल मिला है।

सबसे ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

118,575फैंसलाइक करें
26,134फॉलोवर्सफॉलो करें
127,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

Advertisements
शेयर करें, मदद करें: