चिदंबरम को हाई कोर्ट ने नहीं दी जमानत, CBI ने कहा- देश छोड़ कर भाग सकते हैं

मामला आईएनएक्स मीडिया ग्रुप को 2007 में 305 करोड़ रुपये का विदेशी धन हासिल करने के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड की मंजूरी देने में अनियमितताओं से जुड़ा है। उस वक्त चिदंबरम वित्त मंत्री थे।

दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम की जमानत याचिका ख़ारिज कर दी है। आईएनएक्स मीडिया केस में तिहाड़ जेल में बंद चिदंबरम को लगभग डेढ़ महीने पहले सीबीआई ने गिरफ़्तार किया था। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें सीबीआई की कस्टडी में भेज दिया गया था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि पी चिदंबरम को लेकर ‘फ्लाइट रिस्क’ है। अर्थात, वह देश छोड़ कर भाग सकते हैं। उन्होंने कहा कि चिदंबरम वित्तीय रूप से विदेश भाग कर वहाँ रहने में सक्षम हैं।

आईएनएक्स मीडिया केस में चिदंबरम को सीबीआई ने 21 अगस्त को गिरफ्तार किया था। फिलहाल वे न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में बंद हैं। अपनी जमानत याचिका में चिदंबरम ने आरोप लगाया था कि सीबीआई केंद्र सरकार के इशारों पर काम कर रही है और एजेंसी उनकी साफ़-सुथरी छवि को नुकसान पहुँचाने के लिए ऐसा कर रही है। उन्होंने सीबीआई द्वारा अपनी गिरफ़्तारी को अवैध करार देते हुए इसे क़ानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन बताया था। चिदंबरम ने अपनी जमानत याचिका में कहा था कि सीबीआई द्वारा यह कहना कि वह अपने पद और हैसियत का इस्तेमाल कर जाँच को प्रभावित कर सकते हैं- ग़लत है।

वहीं सीबीआई ने चिदंबरम की जमानत याचिका का विरोध करते हुए हाईकोर्ट से कहा कि उन्हें जमानत देना भ्रष्टाचार को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ वाली नीति में बाधक सिद्ध होगा और एक ग़लत उदाहरण पेश करेगा। सीबीआई ने अपनी दलील में कहा था कि चिदंबरम बेहद प्रभावशाली व्यक्ति हैं, जो अपने रसूख का इस्तेमाल गवाहों को प्रभावित करने और सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने के लिए कर सकते हैं। चिदंबरम की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए, वहीं सीबीआई की तरफ से तुषार मेहता ने दलीलें रखीं।

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गौरतलब है कि आईएनएक्स मीडिया की प्रमोटर इंद्राणी मुखर्जी और उनके पति पीटर मुखर्जी के बयानों के आधार पर सीबीआई और ईडी ने इस मामले में चिदंबरम पर शिकंजा कसा है। आरोप है कि आईएनएक्स मीडिया ग्रुप को 2007 में 305 करोड़ रुपये का विदेशी धन हासिल करने के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड की मंजूरी में अनियमितता बरती गई थी। उस दौरान चिदंबरम वित्त मंत्री थे।

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