Saturday, July 31, 2021
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10 साल पहले अग्रेसिव लेंडिंग के नाम पर किया गया बैंकिंग सेंक्टर को कमजोर: PM मोदी ने पारदर्शिता को बताया प्राथमिकता

पीएम ने बताया कि लगभग 10 साल पहले अग्रेसिव लेंडिंग (ऋण) देने के नाम पर देश के वित्तीय और बैंकिंग क्षेत्र को कमजोर कर दिया गया है। इसके लिए उन्होंने कुछ कदम उठाए हैं और एनपीए की रिपोर्टिंग को अनिवार्य बना दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (फरवरी 26, 2020) को फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर में बजट के कार्यान्वयन पर बोलते हुए देश की इकोनॉमी में बैंकिंग और इंश्योरेंस सेक्टर पर बात की। देश के फाइनेंशियल सेक्टर को लेकर सरकार का विजन बिलकुल स्पष्ट बताते हुए उन्होंने कहा कि देश में कोई भी डिपोजिटर हो या कोई भी इन्वेस्टर, दोनों ही विश्वास और पारदर्शिता का अनुभव करें, ये उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा, देश की वित्तीय व्यवस्था चलती हुई अगर किसी एक बात पर टिकी हुई है तो वो है- विश्वास। विश्वास- अपनी कमाई की सुरक्षा का। विश्वास- निवेश के फलने फूलने का। विश्वास-देश के विकास का। पीएम ने बताया कि लगभग 10 साल पहले अग्रेसिव लेंडिंग (ऋण) देने के नाम पर देश के वित्तीय और बैंकिंग क्षेत्र को कमजोर कर दिया गया है। इसके लिए उन्होंने कुछ कदम उठाए हैं और एनपीए की रिपोर्टिंग को अनिवार्य बना दिया है।

प्राथमिकताओं पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि सामान्य परिवारों की कमाई की सुरक्षा, गरीब तक सरकारी लाभ की प्रभावी और लीकेज फ्री डिलीवरी, देश के विकास के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े निवेश को प्रोत्साहन, ये सभी उनकी प्राथमिकता है।

प्रधानमंत्री ने इस साल के बजट के फाइनेंशियल सर्विसेज से जुड़े पहलुओं के बारे में कहा कि हमारा ये लगातार प्रयास है कि जहाँ संभव हो वहाँ प्राइवेट उद्यम को ज्यादा से ज्यादा प्रोत्साहित किया जाए। लेकिन इसके साथ-साथ बैंकिंग और बीमा में पब्लिक सेक्टर की भी एक प्रभावी भागीदारी अभी देश की ज़रूरत है। 

उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत किसानों से, कृषि उत्पादों को बेहतर बनाने वाली इकाइयों से बनेगा। आत्मनिर्भर भारत, हमारे MSMEs से बनेगा, हमारे स्टार्ट अप्स से बनेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत सिर्फ बड़े उद्योगों या बड़े शहरों से नहीं बनेगा। आत्मनिर्भर भारत गाँव में, छोटे शहरों में छोटे-छोटे उद्यमियों के, सामान्य भारतीयों के परिश्रम से बनेगा। आत्मनिर्भर भारत किसानों से, कृषि उत्पादों को बेहतर बनाने वाली इकाइयों से बनेगा।

वह बोले, “आप सभी भली-भाँति जानते हैं कि हमारे Fintech Start ups आज बेहतरीन काम कर रहे हैं और इस सेक्टर में हर संभावनाओं को एक्स्प्लोर कर रहे हैं। कोरोना काल में भी जितनी Start Up Deals हुई हैं, उनमें हमारे Fintechs की हिस्सेदारी बहुत अधिक रही है।”

वह बताते हैं कि प्रौद्योगिकी की बेहतर मदद ने पिछले कुछ वर्षों में वित्तीय समावेशन में गहरी भूमिका निभाई है। आज, 130 करोड़ भारतीयों के पास आधार है और 41 करोड़ से अधिक लोगों के पास जन धन खाते हैं। 55% से अधिक ऐसे खाते महिलाओं के हैं और लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपए के हैं।

आगे उन्होंने कहा मुद्रा योजना से ही बीते सालों में करीब 15 लाख करोड़ रुपए का ऋण छोटे उद्यमियों तक पहुँचा है। इसमें भी लगभग 70% महिलाएँ हैं और 50% से ज्यादा दलित, वंचित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के उद्यमी हैं।

पीएम मोदी कहते हैं कि सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास इसका मंत्र फाइनेंशल सेक्टर पर स्पष्ट दिख रहा है। आज गरीब हो, किसान हो, पशुपालक हो, मछुआरे हो, छोटे दुकानदार हो सबके लिए क्रेडिट एक्सेस हो पाया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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