Thursday, June 20, 2024
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‘कुपोषण से निपटने के लिए भजन-कीर्तन का भी हुआ इस्तेमाल’: PM मोदी ने दिया दतिया का उदाहरण, लिबरल गिरोह फैलाने लगा प्रपंच

"इसके तहत जिले में भजन-कीर्तन आयोजित किए गए, जिसमें पोषण गुरु कहलाने वाले शिक्षकों को बुलाया गया। यहाँ एक मटका कार्यक्रम भी हुआ।"

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 28 अगस्त, 2022 को ‘मन की बात (Mann Ki Baat)’ कार्यक्रम में लोगों से कुपोषण उन्मूलन के प्रयासों में शामिल होने का आग्रह किया। उन्होंने देश को संबोधित करते हुए बताया कि भारत में कुपोषण के खतरे से निपटने के लिए क्या-क्या अनोखे प्रयास किए जा रहे हैं। हालाँकि, मध्य प्रदेश के दतिया का उन्होंने एक उदाहरण भी इस दौरान दिया, जिसे लिबरल गिरोह ने गलत ढंग से पेश करने का प्रयास किया।

पीएम मोदी (PM Modi) ने मन की बात कार्यक्रम में असम के बोंगाईगाँव के बारे में बात करते हुए कहा कि वहाँ एक दिलचस्प परियोजना ‘प्रोजक्ट संपूर्ण‘ चलाई जा रही है। इस योजना का उद्देश्य कुपोषण के खिलाफ लड़ाई है और इस लड़ाई का तरीका बहुत की खास है। इसके तहत किसी आँगनबाड़ी केंद्र के स्वस्थ बच्चे की माँ एक कुपोषित बच्चे की माँ से हर सप्ताह मिलती है और पोषण से संबंधित हर जानकारियों पर उससे चर्चा करती है।

उन्हों कहा, “एक माँ दूसरी माँ की मित्र बनकर उसकी मदद करती है। उसे सीख देती है। इस प्रोजेक्ट की मदद से इस क्षेत्र में एक साल में 90 प्रतिशत से ज्यादा बच्चों में कुपोषण दूर हुआ है।”

इसके बाद पीएम मोदी ने मध्य प्रदेश के दतिया जिले के बारे में बात की। पीएम मोदी ने कहा कि क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि कुपोषण को दूर करने में गीत, संगीत और भजन का भी इस्तेमाल हो सकता है। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश के दतिया जिले में ‘मेरा बच्चा अभियान‘ में इसका सफलतापूर्वक प्रयोग किया गया। उन्होंने जानकारी दी, “इसके तहत जिले में भजन-कीर्तन आयोजित किए गए, जिसमें पोषण गुरु कहलाने वाले शिक्षकों को बुलाया गया। यहाँ एक मटका कार्यक्रम भी हुआ। इसमें महिलाएँ आँगनबाड़ी केंद्र के लिए मुट्ठीभर अनाज लेकर आती हैं और इसी अनाज से हर शनिवार को बाल भोज का आयोजन होता है। इससे आँगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ने के साथ ही कुपोषण भी कम हुआ है।”

ध्यान दीजिए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसा नहीं कहा कि भजन-कीर्तन से कुपोषण ख़त्म हो गया, बल्कि उन्होंने बताया कि कैसे कुपोषण ख़त्म करने और पोषण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए भजन-कीर्तन का भी प्रयोग किया गया।

पीएम मोदी ने कहा कि इसी तरह झारखंड के गिरिडीह में भी कुपोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए अनोखा अभियान चल रहा है। गिरीडीह में साँप-सीढ़ी का एक गेम तैयार किया गया है। इसमें बच्चों को खेल के माध्यम से पोषण के बारे में अच्छी और बुरी आदतों के बारे में सिखाया जाता है। पीएम के शब्दों में, “मैं आपकों कुपोषण दूर करने वाले इन नए-नए प्रयोगों के बारे में इसलिए बता रहा हूँ, क्योंकि हम सबको आने वाले महीने में इन अभियानों से जुड़ना है।” 32.5 मिनट के वीडियो में पीएम मोदी ने 12 से 14.23 मिनट के बीच ये बातें कहीं।

पोषण माह


पीएम मोदी ने कहा कि सितंबर का महीना कुपोषण से लड़ने के अभियान के तौर पर ‘पोषण माह’ के तौर पर मनाया जाएगा। प्रौद्योगिकी का बेहतर उपयोग और जन भागीदारी भी पोषण अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। देश में लाखों आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मोबाइल डिवाइस उपलब्ध कराने से लेकर आँगनबाड़ी सेवाओं की पहुँच की निगरानी के लिए एक पोषण ट्रैकर भी लॉन्च किया गया है। उन्होंने कहा कि सभी ‘आकांक्षी जिलों’ और उत्तर पूर्व के राज्यों में 14 से 18 साल की लड़कियों को भी ‘पोषण अभियान’ के दायरे में लाया गया है। कुपोषण का समाधान सिर्फ इन्हीं तक सीमित नहीं है। इस लड़ाई में कई अन्य पहल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। 

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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