राहुल गाँधी अमेठी में, वायनाड में एक और किसान ने की आत्महत्या

पीढ़ियों से गाँधी-नेहरू परिवार के गढ़ रहे अमेठी में इस बार लोकसभा चुनाव में राहुल को भाजपा की स्मृति ईरानी ने 55 हजार से अधिक मतों से शिकस्त दी थी। हार के बाद पहली बार अमेठी पहुँचे राहुल ने समीक्षा बैठक की

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र वायनाड में एक और किसान ने आत्महत्या कर ली है। केरल के वायनाड से किसान के खुदकुशी करने की खबर ऐसे समय में सामने आई है, जब राहुल अपने पूर्व संसदीय क्षेत्र अमेठी के एक दिन के दौरे पर हैं।

पीढ़ियों से गाँधी-नेहरू परिवार के गढ़ रहे अमेठी में इस बार लोकसभा चुनाव में राहुल को भाजपा की स्मृति ईरानी ने 55 हजार से अधिक मतों से शिकस्त दी थी। हालॉंकि, वायनाड से जीतकर वे लोकसभा पहुँचने में कामयाब रहे। हार के बाद पहली बार अमेठी पहुँचे राहुल ने पार्टी के स्थानीय नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ समीक्षा बैठक की।

इसी दौरान, पुल्लापल्ली में 55 वर्षीय एक किसान के जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या करने की खबर सामने आई। पीटीआई के मुताबिक, मृतक की पहचान अंकितन के तौर पर हुई है। बताया जाता है कि उसने मंगलवार को जहरीला पदार्थ खा लिया था। इसके बाद परिजनों ने उसे अस्पताल में दाखिल कराया, जहाँ बुधवार सुबह अंकितन ने दम तोड़ दिया।

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मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक बीते छह महीने में वायनाड में 5 किसान आत्महत्या कर चुके हैं। इससे पहले मई में वायनाड के कर्ज में डूबे 53 वर्षीय किसान दिनेश कुमार ने जहरीला पदार्थ खाकर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। दिनेश ने तीन बैंकों से 10 लाख रुपए का कर्ज लिया था और कथित तौर पर बैंक वसूली के लिए उस पर दबाव बना रहे थे। इससे आजिज आकर उसने आत्महत्या कर ली थी।

यह मामला सामने आने के बाद राहुल ने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को पत्र लिखकर मृतक के परिवार को सहायता देने की माँग की थी। 28 मई को लिखे अपने पत्र में राहुल ने कहा था कि आत्महत्या की इस घटना से वह ‘‘बेहद दुखी’’ हैं। उन्होंने राज्य सरकार से मृतक परिवार को आर्थिक मदद देने के साथ मामले की जाँच कराने का भी अनुरोध किया था। इसके जवाब में विजयन ने कहा था कि इस मुद्दे को संसद में उठाए जाने की आवश्यकता है।

2019 लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गॉंधी ने भाजपा पर किसानों की दुर्दशा की अनदेखी का आरोप लगाया था। हालॉंकि, उन राज्यों में जहॉं भाजपा की सरकार नहीं है, वहाँ किसानों की हालत पर वे चुप ही रहते हैं। यहॉं तक कि 2018 में तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद भी कॉन्ग्रेस सरकारों ने किसानों की हालत में सुधार लाने के लिए कुछ खास नहीं किया। कर्ज माफी के राहुल के वादे के बावजूद काफी कम किसानों को लाभ मिला है और इन राज्यों में भी किसान आत्महत्या को मजबूर हैं।

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