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राहुल गाँधी ने अज़ान के लिए रोका भाषण: वायनाड की ‘अल्पसंख्यक’ राजनीति अब अमेठी में

राहुल गाँधी केरल के जिस वायनाड से ‘सुरक्षित’ लोकसभा निर्वाचन की आस लगाए हैं, वहाँ हिन्दू अल्पसंख्यक हैं, और इस्लामी-ईसाई मतावलंबी बहुतायत में हैं। ऐसे में राहुल गाँधी के इस सीट को चुनने के पीछे समुदाय विशेष के तुष्टिकरण से लेकर हिन्दुओं को ‘सन्देश’ तक बहुतेरे कयास लगाए जा रहे हैं।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने अपना चुनावी भाषण बीच में तब रोक दिया जब उन्हें पास की किसी मस्जिद से अज़ान की आवाज सुनाई दी। मामला उनके वर्तमान लोकसभा क्षेत्र अमेठी का है, जहाँ से वह एक बार फिर निर्वाचन के लिए उम्मीदवार हैं। गौरतलब है कि अज़ान दिन के पाँचों वक्त की अनिवार्य नमाज़ के लिए इस्लाम के समर्थकों को बुलाने के लिए लगाई जाती है।

वायनाड का रुख कर चुके हैं राहुल

हालाँकि, अमेठी राहुल गाँधी के परिवार का पारंपरिक लोकसभा क्षेत्र रहा है और वह खुद यहाँ से तीन बार संसद जा चुके हैं पर इस बार वह वायनाड से भी चुनाव लड़ रहे हैं। माना जा रहा है कि उन्हें ऐसा मोदी कैबिनेट की कद्दावर मंत्री और भाजपा से दूसरी बार अमेठी की प्रत्याशी स्मृति ईरानी के चलते करना पड़ रहा है। पिछली बार स्मृति ईरानी ने उन्हें कड़ी टक्कर दी थी, और उनका जीत का अंतर 2014 में 2009 के मुकाबले केवल एक-चौथाई बचा था- वो भी तब जब स्मृति ईरानी को भाजपा ने आखिरी समय में अमेठी भेजा था।

निर्वाचन में पराजित होने के उपरांत भी स्मृति ने अमेठी आना-जाना नहीं छोड़ा, और एक जनप्रतिनिधि की भाँति ही अमेठी के लिए कार्य किया है। शायद इसीलिए राहुल गाँधी को अमेठी से बाहर एक ‘सुरक्षित’ सीट भी देखनी पड़ी है।

हिन्दू अल्पसंख्यक हैं वायनाड में

राहुल गाँधी केरल के जिस वायनाड से ‘सुरक्षित’ लोकसभा निर्वाचन की आस लगाए हैं, वहाँ हिन्दू अल्पसंख्यक हैं, और इस्लामी-ईसाई मतावलंबी बहुतायत में हैं। ऐसे में राहुल गाँधी के इस सीट को चुनने के पीछे समुदाय विशेष के तुष्टिकरण से लेकर हिन्दुओं को ‘सन्देश’ तक बहुतेरे कयास लगाए जा रहे हैं। वायनाड में जहाँ 23 अप्रैल को मतदान संपन्न हो चुका है, वहीं अमेठी में 6 मई को होना है। निर्वाचन आयोग परिणामों की घोषणा 23 मई 2019 को करेगा।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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