Homeराजनीतिईश्वर की योजना है नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री बनना, प्रधानसेवक हमारे अभिभावक हैं: शिवसेना

ईश्वर की योजना है नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री बनना, प्रधानसेवक हमारे अभिभावक हैं: शिवसेना

नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए शिवसेना ने यह भी लिखा है कि आज देश के समक्ष कई मुद्दे हैं, लेकिन पीएम मोदी इनसे दृढ़ संकल्‍प से पार पाने में समर्थ हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (मई 30, 2019) दूसरे कार्यकाल के लिए पीएम पद की शपथ लेने जा रहे हैं, जिसमें शामिल होने के लिए बिम्सटेक (BIMSTEC) देशों के राष्‍ट्र-प्रमुखों को आमंत्रित किया गया है। शपथ-ग्रहण से पहले शिवसेना ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा है कि वह ‘ईश्‍वर की योजना से’ एक बार फिर इस देश की अगुवाई करने जा रहे हैं।

लोकसभा चुनाव में NDA को मिली प्रचंड जीत के बाद शिवसेना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते नहीं थक रही है। इसी क्रम में उन्होंने मुखपत्र “सामना” में नरेंद्र मोदी को देश के प्रधानमंत्री के तौर पर चुने जाने को ईश्वर की योजना बताया है। शिवसेना का कहना है कि पीएम मोदी का शपथ ग्रहण समारोह देश को मजबूती की और ले जाने वाला साबित होगा। इसी के साथ शिवसेना पार्टी ने पीएम मोदी की तारीफों के पुल बाँधते हुए कहा है कि पहले पीएम मोदी प्रधानसेवक और चौकीदार थे, लेकिन अब वो अभिभावक भी हैं। नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए शिवसेना ने यह भी लिखा है कि आज देश के समक्ष कई मुद्दे हैं, लेकिन पीएम मोदी इनसे दृढ़ संकल्‍प से पार पाने में समर्थ हैं।

शिवसेना ने कहा, “जीत के बाद पीएम मोदी ने विपक्ष के खिलाफ एक शब्द नहीं कहा, इस पर गौर किया जाना चाहिए। पीएम मोदी की कार्यशैली से साफ हो गया है कि ये नई सरकार मानवता और संयम की भावना के साथ काम करेगी।”

मुखपत्र “सामना” में शिवसेना ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा है। ममता बनर्जी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं होने को लेकर सामना में कहा गया है कि ममता बनर्जी का ये कदम लोकतंत्र के दायरे में नहीं आता। शिवसेना ने सामना में लिखा है, “पीएम मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में उन लोगों के परिवार वालों को भी बुलाया गया है, जो पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा के दौरान मारे गए। ये नाराज होने की कोई वजह नहीं हो सकती। उन परिवारों को भी शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद रहने का अधिकार है। अगर ममता बनर्जी और उनकी पार्टी को ये मंजूर नहीं, तो ये तय है कि वो लोकतंत्र को नहीं मानते।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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