आज़म खान पुरुष सांसदों पर धब्‍बा, उनका शर्मनाक बयान उनके चरित्र का प्रतिबिम्ब: स्‍मृति ईरानी

बीजेपी सदस्यों ने आज़म खान के व्यवहार के लिए कड़ी आपत्ति जताई और माफी माँगने के लिए कहा। लेकिन आज़म खान ने माफी माँगने की बजाय सपा सदस्यों के साथ सदन से वॉकआउट कर लिया।

लोकसभा में ट्रिपल तलाक बिल पर चर्चा के दौरान सदन की अध्यक्षता कर रही भाजपा सांसद रमा देवी पर सपा सांसद आज़म खान द्वारा की गई आपत्तिजनक टिप्पणी की हर तरफ आलोचना हो रही है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी आज़म  खान के बयान की आलोचना करते हुए इसे शर्मनाक बताया है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “आज़म खान द्वारा दिया गया शर्मनाक बयान उनके चरित्र का प्रतिबिंब है; उनका बचाव करके अखिलेश यादव ने भी प्रमाणित कर दिया की उनकी सोच में भी कोई फ़र्क़ नहीं। जो सदन में महिला के साथ निंदनीय व्यवहार कर सकता है वह साधारण महिला से किस प्रकार का व्यवहार करता होगा, यह सोचने वाली बात है।” इसके साथ ही एक और ट्वीट में स्मृति ने आज़म खान को सभी पुरुष सांसदों पर धब्बा बताया।

गौरतलब है कि, आज़म खान ने गुरुवार (जुलाई 25, 2019) को सदन में भाजपा सांसद रमा देवी से कहा, “आप मुझे इतनी अच्छी लगती हैं कि मेरा मन करता है कि आपकी आँखों में आँखें डाले रहूॅं।” पार्टी मुखिया अखिलेश यादव ने भी आज़म खान के इस बयान को सही बताते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि आजम खान स्पीकर का असम्मान करना चाहते थे और उन्होंने जो कुछ भी बोला, उसमें कुछ भी गलत नहीं है।

वहीं दूसरी तरफ एनसीपी नेता माजिद मेमन ने भी आजम खान का बचाव किया। माजिद मेमन ने कहा कि आज़म खान ने जो कहा वह कहीं से भी गलत नहीं लगता है। उन्होंने असम्मान की भावना से चेयरपर्सन को कुछ नहीं कहा है। यही नहीं माजिद मेमन ने तो यहाँ तक कह दिया कि आज़म खान के बयान की सराहना होनी चाहिए, उनके बयान को तारीफ के तौर पर देखना चाहिए।

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बीजेपी सदस्यों ने आज़म खान के व्यवहार के लिए कड़ी आपत्ति जताई और माफी माँगने के लिए कहा। लेकिन आज़म खान ने माफी माँगने की बजाय सपा सदस्यों के साथ सदन से वॉकआउट कर लिया। उनका कहना था कि उन्होंने किसी असंसदीय शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है और अगर ऐसा हुआ है, तो वो इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं।

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शरजील इमाम
“अब वक्त आ गया है कि हम गैर मुस्लिमों से बोलें कि अगर हमारे हमदर्द हो तो हमारी शर्तों पर आकर खड़े हो। अगर वो हमारी शर्तों पर खड़े नहीं होते तो वो हमारे हमदर्द नहीं हैं। असम को काटना हमारी जिम्मेदारी है। असम और इंडिया कटकर अलग हो जाए, तभी ये हमारी बात सुनेंगे।"

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