Wednesday, May 12, 2021
Home राजनीति 'कानून रद्द नहीं होगा, चाहें तो सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं': कृषि मंत्री का...

‘कानून रद्द नहीं होगा, चाहें तो सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं’: कृषि मंत्री का किसान नेताओं को दो टूक जवाब

किसानों के कानून रद्द करने की माँग पर सरकार ने एक संयुक्त कमेटी बनाने का प्रस्ताव रखा। लेकिन किसान नेता इस पर राजी नहीं हुए। किसानों की एक ही माँग है कि सरकार एमएसपी पर लिखित में आश्वासन दे और तीनों कानूनों को रद्द करने का वादा करे।

सरकार और किसानों के बीच सातवें दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही। अब अगले दौर की बैठक 8 जनवरी को आयोजित होगी। किसानों के कानून रद्द करने की माँग पर सरकार ने एक संयुक्त कमेटी बनाने का प्रस्ताव रखा। लेकिन किसान नेता इस पर राजी नहीं हुए। किसानों की एक ही माँग है कि सरकार एमएसपी पर लिखित में आश्वासन दे और तीनों कानूनों को रद्द करने का वादा करे।

हालाँकि, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने स्पष्ट कर दिया है कि तीनों कृषि कानूनों को रद्द नहीं किया जाएगा। इसके लिए किसान चाहें तो सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। यह बातें किसान मजदूर संघर्ष समिति के सरवन सिंह पंधेर ने कहा, जिन्होंने बैठक में भाग लिया था। उन्होंने कहा, “हम पंजाब के युवाओं से लंबी दौड़ की तैयारी करने का आग्रह करते हैं। हम गणतंत्र दिवस पर एक बड़ा जुलूस निकालेंगे।”

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के प्रदर्शन और केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानून को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं पर बुधवार (जनवरी 6, 2021) को सुनवाई करते हुए सीजेआई ने कहा कि सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की जाएगी। सीजेआई ने कहा कि कोर्ट नए कृषि कानून के खिलाफ दाखिल याचिका पर सोमवार (जनवरी 11, 2021) को सुनवाई करेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि वो किसानों की समस्याओं को समझते हैं।

बता दें कि केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानून को रद्द करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। कृषि कानूनों के खिलाफ ये याचिका वकील एमएल शर्मा ने दाखिल की है। याचिका में वकील ने केंद्र सरकार की ओर से लाए तीनों कानूनों को खत्म करने की माँग की है। याचिका में कहा गया है कि नए कृषि कानून कॉर्पोरेट के हितों को प्रोमोट करने वाले और किसानों को नुकसान की ओर ले जाने वाले हैं।

गौरतलब है कि पिछले साल केंद्र द्वारा लाए गए तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने की माँग पर अड़े हजारों किसान बीते एक महीने से भी ऊपर वक्त से दिल्ली की सीमाओं पर डटे हैं। यह गतिरोध खत्म करने के लिए केंद्र सरकार किसान संगठनों के साथ कई दौर की वार्ता कर चुकी हैं लेकिन ये सभी बेनतीजा रही हैं। 

सातवें दौर की बैठक के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि किसानों के कानून को वापस लेने की ज़िद पर अड़े रहने के कारण कोई नतीजा नहीं निकल सका। तोमर का कहना था, “हमलोग चाहते थे कि किसान नेता तीनों कृषि कानूनों के एक-एक क्लॉज पर बात करें। हमलोग किसी नतीजे पर नहीं पहुँच सके क्योंकि किसान नेता कानून को वापस लिए जाने की अपनी माँग पर अड़े हुए थे।”

दरअसल, केंद्र सरकार तीन नए कृषि कानून लेकर आई है, जिनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडार सीमा खत्म करने जैसे प्रावधान किए गए हैं। इसको लेकर किसान लगातार आंदोलनरत हैं और इन कानूनों को वापस लेने की माँग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि ये कानून मंडी सिस्टम और पूरी खेती को प्राइवेट हाथों में सौंप देंगे, जिससे किसान को भारी नुकसान उठाना होगा। किसान इन कानूनों को खेती के खिलाफ कह रहे हैं और तीनों कानूनों को वापस नहीं होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। वहीं सरकार का कहना है कि किसानों को विपक्ष ने भ्रम में डाला है, ये कानून उनके फायदे के लिए हैं।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

ऑक्सीजन पर लताड़े जाने के बाद केजरीवाल सरकार ने की Covid टीकों की उपलब्धता पर राजनीति: बीजेपी ने खोली पोल

पत्र को करीब से देखने से यह स्पष्ट होता है कि संबित पात्रा ने जो कहा वह वास्तव में सही है। पत्रों में उल्लेख है कि दिल्ली में केजरीवाल सरकार 'खरीद करने की योजना' बना रही है। न कि ऑर्डर दिया है।

‘#FreePalestine’ कैम्पेन पर ट्रोल हुई स्वरा भास्कर, मोसाद के पैरोडी अकाउंट के साथ लोगों ने लिए मजे

स्वरा के ट्वीट का हवाला देते हुए @TheMossadIL ने ट्वीट किया कि अगर इस ट्वीट को स्वरा भास्कर के ट्वीट से अधिक लाइक मिलते हैं, तो वे भारतीय अभिनेत्री को एक स्पेशल ‘पॉकेट रॉकेट’ भेजेंगे।

स्वप्ना पाटकर के ट्वीट हटाने के लिए कोर्ट पहुँचे संजय राउत: प्रताड़ना का आरोप लगा PM को भी महिला ने लिखा था पत्र

संजय राउत ने उन सभी ट्वीट्स को हटाने का निर्देश देने की गुहार कोर्ट से लगाई है जिसमें स्वप्ना पाटकर ने उन पर आरोप लगाए हैं।

उद्धव ठाकरे की जाएगी कुर्सी, शरद पवार खुद बनना चाहते हैं CM? रिपोर्ट से महाराष्ट्र सरकार के गिरने के कयास

बताया जा रहा है कि उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाकर अब शरद पवार पछता रहे हैं। उन्हें यह 'भारी भूल' लग रही है।

बंगाल के नतीजों पर नाची, हिंसा पर होठ सिले: अब ममता ने मीडिया को दी पॉजिटिव रिपोर्टिंग की ‘हिदायत’

विडंबना यह नहीं कि ममता ने मीडिया को चेताया है। विडंबना यह है कि उनके वक्तव्य को छिपाने की कोशिश भी यही मीडिया करेगी।

मोदी से घृणा के लिए वे क्या कम हैं जो आप भी उसी जाल में उलझ रहे: नैरेटिव निर्माण की वामपंथी चाल को समझिए

सच यही है कि कपटी कम्युनिस्टों ने हमेशा इस देश को बाँटने का काम किया है। तोड़ने का काम किया है। झूठ को, कोरे-सफेद झूठ को स्थापित किया है।

प्रचलित ख़बरें

योगेंद्र यादव को पता था कि ‘किसानों’ के टेंट में हुआ है गैंगरेप, AAP के दो नेता भी आरोपित: टिकरी बॉर्डर पर हुई थी...

दैनिक भास्कर के मुताबिक योगेंद्र यादव को इस घटना के बारे में पता था, लेकिन उन्होंने पुलिस को जानकारी नहीं दी।

मुस्लिम वैज्ञानिक ‘मेजर जनरल पृथ्वीराज’ और PM वाजपेयी ने रचा था इतिहास, सोनिया ने दी थी संयम की सलाह

...उसके बाद कई देशों ने प्रतिबन्ध लगाए। लेकिन वाजपेयी झुके नहीं और यही कारण है कि देश आज सुपर-पावर बनने की ओर अग्रसर है।

हिंदू त्योहार ‘पाप’, हमारी गलियों से नहीं निकलने दें जुलूस: मुस्लिम बहुल इलाके की याचिका, मद्रास HC का सॉलिड जवाब

मद्रास हाई कोर्ट ने धार्मिक असहिष्णुता को देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने के लिए खतरनाक बताया। कोर्ट ने कहा कि त्योहारों के आयोजन...

‘इस्लाम को रियायतों से आज खतरे में फ्रांस’: सैनिकों ने राष्ट्रपति को गृहयुद्ध के खतरे से किया आगाह

फ्रांसीसी सैनिकों के एक समूह ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को खुला पत्र लिखा है। इस्लाम की वजह से फ्रांस में पैदा हुए खतरों को लेकर चेताया है।

फराह खान ने खुलेआम की मोदी समर्थकों की मौत की कामना- माँगी दुआ, पहले भी कर चुकी हैं RSS की ISIS से तुलना

"मैं दुआ करती हूँ कि तुम्हारा कोई परिजन मरे ताकि तुम्हें वो गुस्सा महसूस हो जो कुप्रबंधन और सत्ता की भूखे एजेंडे के कारण अपनों को न बचा पाने की वजह से पैदा होता है।"

हिन्दुओ… इस आदेश को रट लो, क्योंकि यह केवल एक गाँव-एक प्रांत की समस्या नहीं

ऐसे हालात में अमूमन हिंदू मन मसोस रह जाते हैं। अब इससे इतर मद्रास हाई कोर्ट ने एक रास्ता दिखाया है।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,392FansLike
92,425FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe