पंजाब: Sidhu के पूर्व मंत्रालय से अमरिंदर सिंह से जुड़ी लुधियाना सिटी सेंटर घोटाले की फाइल गायब

सिटी सेंटर घोटाला अमरिंदर सिंह के पहले कार्यकाल से जुड़ा है। बादल सरकार ने इसकी विजिलेंस जॉंच के आदेश दिए थे। लेकिन, अमरिंदर के सत्ता में लौटने के बाद उन्हें और अन्य आरोपियों को क्लीन चिट दे दी गई।

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने मंत्री पद से नवजोत सिंह सिद्धू का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। लेकिन, सिद्धू के पूर्व महकमे से महत्वपूर्ण फाइलें गायब होने की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि इनमें से एक फाइल मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह से जुड़ी 1,144 करोड़ रुपए के लुधियाना सिटी सेंटर घोटाले से संबंधित है।

लोकल गवर्नमेंट डिपार्टमेंट से गायब हुई दूसरी फाइल लुधियाना में कृषि भूमि पर अनाधिकृत निर्माण से सम्बंधित है। वैसे, विजलेंस ब्यूरो पहले ही अमरिंदर सिंह, उनके बेटे रनिंदर सिंह व अन्य को लुधियाना सिंटी सेंटर घोटाले में क्लीन चिट दे चुकी है।

खबरों के अनुसार स्थानीय निकाय विभाग के नए मंत्री ब्रहम मोहिंद्रा ने गायब फाइलों के लिए विभागीय जांच का आदेश दिया है, जिसमें लुधियाना में लक्जरी अपार्टमेंट परियोजना को मंजूरी दिए जाने की भी फाइल है। मुख्यमंत्री ने भी मुख्य सचिव और विभागीय सेक्रेट्री से फाइलों का पता लगाने को कहा है।

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गौरतलब है गायब हुई फाइलों में सबसे महत्तवपूर्ण फाइल सिटी सेंटर घोटाले की है। यह मामला अमरिंदर सिंह के पहले कार्यकाल से जुड़ा है। बादल सरकार ने इस मामले की विजिलेंस जाँच के आदेश दिए थे।

अमरिंदर सिंह के दोबारा सत्ता में आने के बाद विजिलेंस ने इसपर क्लोजर रिपोर्ट दे दी।

मीडिया खबरों की मानें तो इन फाइलों के गायब होने के बाद दो तरह की बहस छिड़ गई है कि क्या सिटी सेंटर घोटाले से संबंधित फाइल सचमुच नवजोत सिंह सिद्धू के पास है या उनके इस्तीफ़े की आड़ में उसे गायब कर दिया गया। लोगों का कहना है कि इस बहस का जवाब सिर्फ़ सिद्धू दे पाएँगे, लेकिन वे पिछले डेढ़ महीने से मीडिया से दूरी बनाए हुए हैं। उनसे कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन मुमकिन नहीं हो पाया।

आपको बता दें नवजोत सिंह सिद्धू को 6 जून को लोकल सरकार व संस्कृति मामले के पोर्टफोलियों से हटा दिया गया था। कैबिनेट में फेरबदल करके उन्हें बिजली व नव एवं नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत मंत्रालय दिया था। लेकिन, मतभेदों के चलते 14 जुलाई को सिद्धू ने मंत्रालय से इस्तीफ़ा दे दिया, जिसे मुख्यमंत्री ने अब स्वीकार किया है।

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