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J&K में लोगों से मिलकर लौटे NC के 2 सांसद, कॉन्ग्रेस के ‘लोकतंत्र की हत्या’ वाले आरोप की निकली हवा

ये नेतागण केंद्र सरकार और भाजपा के ख़िलाफ़ बयान भी दे रहे हैं लेकिन उन्हें पुलिस ने गिरफ़्तार नहीं किया। इससे विपक्षी पार्टियों के आरोपों की पोल भी खुल जाती है। मोदी सरकार पहले से ही कहती आ रही है कि जम्मू कश्मीर को 2 परिवारों के चंगुल से मुक्त कराना है।

जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने और राज्य के पुनर्गठन का निर्णय लिए जाने के बाद विपक्षी दलों ने जम कर राजनीति की। कॉन्ग्रेस ने तो इसे अंतरराष्ट्रीय मसला तक बता दिया। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद के साथ कई विपक्षी नेतागण श्रीनगर पहुँचे लेकिन उन्हें एयरपोर्ट से ही वापस दिल्ली भेज दिया गया। राज्यपाल सत्यपाल मलिक का कहना है कि ये नेता राजनीति करने यहाँ आए थे और इससे माहौल बिगड़ सकता था।

इसके बाद विपक्षी दलों ने यह कहना शुरू कर दिया कि जम्मू कश्मीर में सबकुछ ठीक नहीं है। हालाँकि, बसपा सुप्रीमो मायावती ने इन नेताओं को फटकार लगाते हुए केंद्र सरकार को समय देने की बात कही। नवीन पटनायक की बीजद, चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी और जगन रेड्डी की वाईएसआरसीपी सही कई विपक्षी दलों ने अनुच्छेद 370 पर संसद में सरकार का साथ भी दिया था। लेकिन, क्या आपको पता है कि जम्मू कश्मीर में कुछ विपक्षी नेता न सिर्फ़ घूम रहे हैं बल्कि लोगों से मिल भी रहे हैं।

ये नेतागण केंद्र सरकार और भाजपा के ख़िलाफ़ बयान भी दे रहे हैं लेकिन उन्हें पुलिस ने गिरफ़्तार नहीं किया। इससे विपक्षी पार्टियों के आरोपों की पोल भी खुल जाती है। मोदी सरकार पहले से ही कहती आ रही है कि जम्मू कश्मीर को 2 परिवारों के चंगुल से मुक्त कराना है।

अब्दुल्ला परिवार की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस के 2 सांसदों ने जम्मू कश्मीर का दौरा किया और अब वे दिल्ली लौट आए हैं। दोनों नेताओं ने पूरी सक्रियता से घाटी में लोगों से मुलाक़ातें की। एनसी के वरिष्ठ नेताओं मोहम्मद अकबर लोन और जस्टिस (रिटायर्ड) हसनैन मसूदी ने कश्मीर का दौरा किया।

दोनों नेताओं ने एनसी के श्रीनगर स्थित मुख्यालय में बैठकें की और सिविल सोसाइटी से संवाद किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, केंद्र सरकार कुछ स्थानीय नेताओं के माध्यम से जनता से संवाद कर हालात को सामान्य बनाए रखने की जुगत में लगी है। इसके लिए स्थानीय नेताओं की मदद ली जा रही है। हालाँकि, यह भी याद होना चाहिए कि अकबर लोन कभी पाकिस्तान का समर्थन कर चुके हैं और विधानसभा में भारत-विरोधी नारेबाजी भी कर चुके हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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