Homeदेश-समाजबिहार में सीमांचल एक्सप्रेस हादसा: 7 की मौत, इन नंबरों पर करें संपर्क

बिहार में सीमांचल एक्सप्रेस हादसा: 7 की मौत, इन नंबरों पर करें संपर्क

रेलवे ने इस हादसे पर मुआवजे का ऐलान कर दिया है। ऐलान के अनुसार, मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपए जबकि गंभीर रूप से घायलों को 1 लाख रुपए तक मुआवज़ा दिया जाएगा।

बिहार में रविवार की सुबह एक बड़ा रेल हादसा हुआ। हादसे में बिहार के जोगबनी से नई दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल जा रही सीमांचल एक्सप्रेस की 11 बोगियां पटरी से उतर गईं। अभी तक की जानकारी में 7 लोगों मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हैं।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह हादसा संभवत: पटरी के टूट जाने की वजह से हुआ है। यह हादसा हाजीपुर-बछ़वाड़ा रेल सेक्शन के बीच सहदोई स्टेशन के पास हुआ। हादसे के वक्त ट्रेन फूल स्पीड में थी और पटरी से उतरने के बाद बोगियाँ एक के ऊपर एक चढ़ गई।

रेलवे द्वारा हादसे संबधित जानकारी के लिए जारी किए गए नंबर:

  • सोनपुर- 06158221645
  • हाजीपुर- 06224272230
  • बरौनी- 0627923222
  • पटना- 06122202290, 06122202291, 06122202292, 06122213234

इस बीच रेलवे ने इस हादसे पर मुआवजे का ऐलान कर दिया है। ऐलान के अनुसार, मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपए जबकि गंभीर रूप से घायलों को 1 लाख रुपए तक मुआवज़ा दिया जाएगा। मामूली रूप से जख्मी को 50 हजार रुपए का मुआवजा मिलेगा। इसके साथ ही रेलवे ने हादसे के जाँच के आदेश भी दे दिए हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -