Wednesday, June 26, 2024
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हिन्दू विवाह की रीति-रिवाजों का मजाक बनाता है बॉलीवुड, सोशल मीडिया में तस्वीरें बेच कमाते हैं पैसे भी: जानिए इस पवित्र बंधन का महत्व

अन्य मजहबों में विवाह पति और पत्नी के बीच एक प्रकार का करार होता है, जिसे किसी विशेष परिस्थिति में तोड़ा भी जा सकता है, लेकिन हिंदू विवाह में पति और पत्नी के बीच जन्म-जन्मांतरों का संबंध होता है, जिसे किसी भी तरह से तोड़ा नहीं जा सकता है।

हिंदू सनातन धर्म में विवाह को बहुत ही पवित्र बंधन माना गया है। विवाह वर एवं वधू के बीच एक अनुबंध, करार या समझौता ना होकर एक पवित्र आध्यात्मिक संबंध है, लेकिन बॉलीवुड वालों के लिए विवाह के मायने कुछ और ही हैं। हाल ही में 5 सालों से रिलेशनशिप में रहे आलिया भट्ट और रणबीर कपूर (Alia Bhatt & Ranbir Kapoor Wedding) हिंदू-पंजाबी रीति रिवाज से शादी के बंधन में बँधे। इसके बाद कपूर हाउस में जमकर पार्टी हुई और दूल्हा-दुल्हन ने केक काटकर जश्न मनाया।

साथ ही बाहों में बाहें डालकर वाइन भी पी। इसके बाद फैशन डिजाइनर सब्यसाची मुखर्जी के डिजाइन किए गए कपड़ों में आलिया भट्ट और रणबीर कपूर ने मीडिया वालों को कई पोज देकर अपनी तस्वीरें दी। खैर, ऐसा करके वह लाइम लाइट में तो आ गए, लेकिन इन लोगों ने सनातन धर्म को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

यही नहीं, इससे पहले कैटरीना कैफ, विक्की कौशल, प्रियंका चोपड़ा, दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह जैसे कई कलाकारों ने भी हिंदू विवाह और इससे जुड़े रीति-रिवाजों का केवल मजाक ही उड़ाया है। उन्होंने अपने विवाह को केवल फैशन और ट्रेंड से जोड़कर देखा। फैशन डिजाइनर सब्यसाची मुखर्जी का डिजाइन किया हुआ लहंगा और कपड़े ​पहने बिना तो इनकी शादी मानो पूरी ही नहीं होती है। सिंदूर, बिंदी, चूड़ियाँ, लहँगा, साड़ी, पगड़ी, हल्दी, मेहंदी की रस्म इनके लिए केवल सुर्खियाँ बटोरने से ज्यादा और कुछ नहीं है। यही नहीं, अपने सोशल मीडिया पर शादी, मेहंदी और संगीत सेरेमनी की तस्वीरें और वीडियो शेयर कर ये लोग करोड़ों रुपए कमाते हैं।

हिंदू सनातन धर्म में विवाह का महत्व

हिंदू सनातन धर्म में विवाह को बहुत ही पवित्र बंधन माना गया है। हिंदू धर्म में विवाह और इससे जुड़ी रस्मों का भी विशेष महत्व होता है। हिंदू धर्म शास्त्रों में हमारे सोलह संस्कार बताए गए हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण विवाह संस्कार होता है। अन्य मजहबों में विवाह पति और पत्नी के बीच एक प्रकार का करार होता है, जिसे किसी विशेष परिस्थिति में तोड़ा भी जा सकता है, लेकिन हिंदू विवाह में पति और पत्नी के बीच जन्म-जन्मांतरों का संबंध होता है, जिसे किसी भी तरह से तोड़ा नहीं जा सकता है। ​अग्नि के सामने सात फेरे लेने के बाद पति-पत्नी तन, मन और आत्मा से पवित्र बंधन में बँध जाते हैं। यानी कि हिंदू धर्म में विवाह के जरिए वर-वधू का, जिनके पास दो शरीर, दो मन, दो हृदय, दो प्राण और दो आत्माएँ होती हैं उनका आपस में मिलन हो जाता है। इसे बेहद अटूट मिलन कहा गया है।

विवाह पवित्र संस्कार

भारतीय संस्कृति में कई तरह के विवाह प्रचलित हैं। इनमें ब्रम्ह, देव, प्रजापत्य, असुर, गंधर्व प्रमुख हैं। इनमें गठबंधन को विवाह का प्रतीक माना जाता है। हिंदू विवाह में गठबंधन के समय वर के पल्लू में सिक्का, हल्दी, अक्षत, पुष्प, दूब इत्यादि रखकर वधू के पल्लू से गाँठ बाँधी जाती है। सिक्के मतलब यह होता है कि धन पर केवल एक शख्स का ही अधिकार नहीं होगा, बल्कि घर में आने वाले धन के पति और पत्नी दोनों समान रूप से अधिकारी होंगे। फूल इस बात का प्रतीक होता है कि दोनों सदैव एक-दूसरे को देखकर प्रसन्न रहेंगे। वहीं, हल्दी सेहत, दूब हरियाली और अक्षत अन्न को दर्शाती है। यानी, यह गठबंधन इस बात का प्रतीक होता है कि वर-वधू जीवनभर के लिए एक-दूसरे के हो गए हैं। वर-वधू पर भी इस बात की जिम्मेदारी होती है कि वे इस गठबंधन को कभी भी टूटने नहीं देंगे। इन्हीं परंपराओं के कारण विवाह को पवित्र संस्कार माना गया है। इसके अलावा हिंदू विवाह में सिंदूर, सात फेरों, चूड़ियों और कन्यादान का विशेष महत्व होता है।

विवाह की धार्मिक महत्ता मनु ने इस प्रकार लिखी है-

दश पूर्वांन् परान्वंश्यान् आत्मनं चैकविंशकम्।
ब्राह्मीपुत्रः सुकृतकृन् मोचये देनसः पितृन्।।

अर्थात, ‘ब्राह्मविवाह’ से उत्पन्न पुत्र अपने कुल की 21 पीढ़ियों को पाप से मुक्त करता है- 10 अपने आगे की, 10 अपने से पीछे और एक स्वयं अपनी। भविष्य पुराण में लिखा है कि जो किसी लड़की से ब्राह्मविधि से विवाह करते हैं, वे निश्चय ही अपने सात पूर्वजों और सात वंशजों को नरक में जाने से बचा लेते हैं।

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