आम्रपाली ने फर्जी अग्रीमेंट के जरिए धोनी और साक्षी की कंपनियों को होम बायर्स के रुपए भेजे

क्रिकेटर मौहम्मद कैफ ने भी आम्रपाली के खिलाफ नोएडा में मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि आम्रपाली के निदेशक...

वर्ल्ड कप क्रिकेट के बाद महेंद्र सिंह धोनी एक बार फिर चर्चा में हैं। लेकिन इस बार मामला क्रिकेट मैदान पर उनकी परफॉर्मेंस को लेकर नहीं बल्कि कुछ और है। सुप्रीम कोर्ट में चल रहे आम्रपाली होम बायर्स मामले में मंगलवार (जुलाई 23, 2019) को फॉरेंसिक ऑडिटर्स पवन कुमार अग्रवाल और रविंद्र भाटिया ने सुप्रीम कोर्ट ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि आम्रपाली ने रिती स्पोर्ट्स मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड और आम्रपाली माही डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक फर्जी एग्रीमेंट किया था।

इसके अनुसार, धोनी जिन्हें माही के नाम से जाना जाता है, उनका रिती स्पोर्ट्स मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड में बड़ा स्टेक है और उनकी पत्नी साक्षी धोनी आम्रपाली माही डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक के पद पर हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने कल ही अपने एक निर्णय में कहा कि आम्रपाली ने ग्राहकों से धोखाधड़ी कर उनके पैसे डायवर्ट किए। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त ऑडिटर्स ने अपनी फोरेंसिक रिपोर्ट में देखा है कि आम्रपाली ने उन कंपनियों के साथ संदिग्ध तरीके से समझौते किए, जिनमें पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और उनकी पत्नी साक्षी धोनी के बड़े स्‍टेक हैं।

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दरअसल, फॉरेंसिक ऑडिटर पवन कुमार अग्रवाल और रविंदर भाटिया द्वारा सुप्रीम कोर्ट में सनसनीखेज खुलासे किए गए। इसमें पता चला है कि आम्रपाली ने रिति स्पोर्ट्स मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड और आम्रपाली माही डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ फर्जी समझौते किए। अप्रैल 2016 तक महेंद्र सिंह धोनी भी सात साल तक आम्रपाली के एक ब्रांड एंबेसडर थे। हालाँकि, वे हजारों असंतुष्ट खरीदारों के दबाव के बाद उससे हट गए थे।

जस्टिस अरुण मिश्रा और यूयू ललित की सुप्रीम कोर्ट की बेंच के सामने मंगलवार (जुलाई 24, 2019) को पुन: पेश की गई फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट में कहा, “हमें ये महसूस हो रहा है कि घर खरीदने वाले लोगों का पैसा गैर कानूनी तरीके से रिति स्पोर्ट्स मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड को चला गया और अब वो पैसे वहाँ से वापस निकालना जरूरी है और जो बात हम कह रहे हैं, वो हमारा विचार है जो बाकी के कानून पर लागू नहीं होता है। उनसे यह वसूला जाना चाहिए, क्योंकि हमारी राय में उक्त समझौता कानून की कसौटी पर खरा नहीं उतरता है।”

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि 42,000 से ज्यादा परेशान फ्लैट खरीदारों को राहत देने के लिए आम्रपाली समूह की रुकी हुई परियोजनाओं को कौन पूरा करेगा? शीर्ष अदालत ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अधिकारियों के 10 मई को इस मामले में फैसला सुरक्षित रखने के बाद कहा था कि उनके पास आम्रपाली समूह की रुकी हुई परियोजनाओं के निर्माण के लिए संसाधन और विशेषज्ञता नहीं है।

अप्रैल 2016 में ट्विटर पर लोगों ने ग्रुप के प्रोजेक्ट पूरे न होने के कारण उनको भी निशाने पर ले लिया था, जिसके बाद एमएस धोनी ने ब्रांड एंबेसडर के तौर पर कंपनी से किनारा कर लिया था। इसके बाद धोनी के ब्रांड प्रमोशन को मैनेज करने वाली कंपनी रिति स्पोर्ट्स ने दिल्ली हाईकोर्ट में आम्रपाली के खिलाफ 150 करोड़ रुपए की रिकवरी के लिए केस किया था। रिति स्पोर्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर अरुण पांडे ने बातचीत में बताया था कि कम्पनी ने ब्रैंडिंग और मार्केटिंग ऐक्टिविटीज के लिए उन्हें पैसा नहीं दिया। बल्कि, कंपनी के ऊपर उनके 200 करोड़ रुपए बकाया हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आम्रपाली मामले में सीरियस फ्रॉड हुआ है और बड़ी राशि की हेर-फेर की गई है। इसमें फेमा का उल्लंघन कर विदेशों में धन भेजा गया है। ग्रेटर नोएडा और नोएडा ऑथोरिटी ने भी इस मामले में लापरवाही की है। शीर्ष अदालत ने ईडी को आदेश दिए हैं कि वह फेमा के तहत जांच कर 3 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट दाखिल करे।

2011 में किया था पूरी क्रिकेट टीम को विला देने का वादा

वर्ष 2011 में विश्व कप जीतने वाली क्रिकेट टीम के प्रत्येक सदस्य को आम्रपाली ने 2016 में अपने नोएडा एक्सटेंशन स्थित ड्रीम वैली प्रोजेक्ट में विला देने का वादा किया था। इस ऐलान में धोनी को 1 करोड़ रुपए और अन्य खिलाड़ियों को 55 लाख की कीमत का 1690 वर्गफुट का एरिया वाला विला देने की बात कही गई थी। यह वादा अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।

क्रिकेटर मौहम्मद कैफ ने भी मुकदमा दर्ज कराया था

क्रिकेटर मौहम्मद कैफ ने भी आम्रपाली के खिलाफ नोएडा में मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि आम्रपाली के निदेशक अनिल शर्मा, शिव प्रिया और अजय कुमार ने एश्योर्ड रिटर्न स्कीम के तहत अपनी अल्ट्रा होम कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड में उनसे दो करोड़ रुपए का निवेश करवाया।

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