RJD नेता और पूर्व MLA व मंत्री को 5 साल की सज़ा, 22 साल पहले किया था ₹1.57 करोड़ का घोटाला

1994 में रोड डिविजन द्वारा चतरा में सड़कों का निर्माण कार्य किया जा रहा था। जिसके लिए हल्दिया ऑयल रिफाइनरी कोलकाता से अलकतरा आने वाली थी। कंपनी के साथ साठ-गाँठ बैठाकर मंत्री और इंजीनियरों ने करोड़ों रुपयों का घोटाला किया था।

22 साल पुराने अलकतरा मामले में पूर्व RJD विधायक और बिहार के पूर्व पथ निर्माण मंत्री मोहम्मद इलियास हुसैन सहित सात अभियुक्तों को कोर्ट ने 5-5 साल की सज़ा सुनाई है। इस सज़ा के साथ ही इन पर ₹20 लाख का जुर्माना भी लगाया गया है।

इस मामले की सुनवाई सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अनिल कुमार मिश्र ने की। इस मामले में जिन आरोपितों के नाम हैं, वह संयुक्त बिहार के पूर्व पथ निर्माण मंत्री मो. इलियास हुसैन, मंत्री के पीए शहाबुद्दीन बेग, चीफ़ इंजीनियर केदार पासवान, उपनिदेशक मुजतबा अहमद, कार्यपालक अभियंता रामानंद राम, सेक्शन पदाधिकारी शोभा सिन्हा और ट्रांसपोर्टर आपूर्तिकर्ता डीएन सिंह हैं।

अदालत ने 19 फरवरी को अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से दलीलें सुनने के बाद फ़ैसले के लिए तारीख तय की थी। इस मामले को सीबीआई ने साल 1997 में कांड संख्या-आरसी 2/97 में दर्ज किया था।

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दरअसल, साल 1994 में रोड डिविजन द्वारा चतरा में सड़कों का निर्माण कार्य किया जा रहा था। जिसके लिए हल्दिया ऑयल रिफाइनरी कोलकाता से अलकतरा आने वाली थी। लेकिन कंपनी के साथ अपनी आपसी साठ-गाँठ बैठाकर मंत्री और इंजीनियरों ने सरकार को करोड़ों रुपयों का नुकसान पहुँचाया। जब इस मामले की सीबीआई जाँच शुरू हुई तो सबूत मिले कि 3,266 मीट्रिक टन अलकतरा अवैध ढंग से बेचा गया, जिसकी क़ीमत ₹1.57 करोड़ थी।

इस मामले पर झारखंड हाईकोर्ट ने इलियास की ज़मानत याचिका को ख़ारिज कर दिया था। साथ ही इलियास हुसैन की ज़मानत याचिका को ख़ारिज करते हुए न्यायमूर्ति आनंद सेन ने इसे भ्रष्टाचार का गंभीर मामला बताया था।


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